गोरखपुर रेलवे में फर्जी भर्ती के नाम पर ठग लिए लाखों रुपये, अब तक सामने आ चुके हैं 60 से 70 शिकार
गोरखपुर में रेलवे में फर्जी भर्ती के नाम पर लाखों की ठगी हुई है, जिसमें पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह ने 60-70 युवाओं से इंटरव्यू के बहाने पैसे वसूले ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
फर्जी भर्ती के नाम पर लाखों की ठगी।
पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह मास्टरमाइंड।
60-70 युवाओं से इंटरव्यू के बहाने पैसे वसूले।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलवे में फर्जी भर्ती के नाम पर जालसाज दीपक कुमार सिंह यांत्रिक कारखाने में इंटरव्यू कराने के लिए हर आवेदक से पांच से दस हजार रुपये वसूले हैं। टूल्स के नाम पर मोबाइल पर क्यूआर कोड भेजकर पैसे लिए गए। इस तरह वह फर्जी भर्ती के नाम पर लाखों रुपये पार कर चुका है।
दो दिनों में 60 से 70 युवक इंटरव्यू देने कारखाने पहुंच चुके हैं। फर्जी इंटरव्यू की खबर फैलने और लगातार युवाओं के पहुंचने से कारखाना प्रबंधन भी सतर्क हो गया है। शनिवार को वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी निरीक्षकों के साथ शाहपुर थाने पहुंचे और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया कि इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह पहले आलमबाग कार्यशाला में तैनात था, जिसे नौकरी से निकाला जा चुका है। वह खुद को रेलवे अधिकारी बता नौकरी दिलाने का झांसा दे रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर फर्जी विज्ञापन के संबंध में 22 मई के अंक में 'फर्जी नियुक्ति के लिए निकाल दिया इंटरव्यू का डेट' और 23 मई को 'इंटरव्यू देने कारखाना पहुंच गए धोखाधड़ी के शिकार युवा' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर दैनिक जागरण ने मामले को प्रमुखता से उठाया है।
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एनईआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार कहते हैं कि रेलवे ने भर्ती के लिए किसी भी प्राइवेट संस्था अथवा व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया है। रिक्तियों की सूचना पूर्ण विवरण के साथ सेंट्रलाइज्ड इम्प्लायमेंट नोटिफिकेशन में दी जाती है, जिसका प्रकाशन रोजगार समाचार में कराया जाता है। दैनिक समाचार पत्रों में भी इंडीकेटिव विज्ञापन प्रकाशित कराया जाता है।