गोरखपुर जीडीए का बड़ा फैसला, 3 नगर पंचायतों और 233 गांवों में अब आसानी से पास होंगे नक्शे
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) बोर्ड ने विस्तारित क्षेत्र की तीन नगर पंचायतों और 233 गांवों में भवनों के मानचित्र स्वीकृति ...और पढ़ें

जीडीए की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
विस्तारित जीडीए क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृति को मिली मंजूरी।
गंभीरनाथ प्रेक्षागृह का किराया 4.13 लाख से 1.30 लाख हुआ।
खोराबार की आवासीय परियोजनाओं को मिले नए नाम।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तारित क्षेत्र में शामिल तीन नगर पंचायतों और 233 नए राजस्व गांवों में अब भवनों के मानचित्र स्वीकृत हो सकेंगे। जीडीए बोर्ड की 131वीं बैठक में शासन द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंगीकार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इससे वर्षों से महायोजना और निर्धारित भू-उपयोग के अभाव में मानचित्र स्वीकृति की समस्या झेल रहे तीन लाख से अधिक की आबादी को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कमिश्नर एवं जीडीए अध्यक्ष इन्द्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। जीडीए की सीमा विस्तार के बाद पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायत के साथ 233 राजस्व गांव प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किए गए थे। हालांकि इन नए क्षेत्रों की अलग महायोजना तैयार नहीं होने के कारण भवन निर्माण के मानचित्रों की स्वीकृति को लेकर लंबे समय से समस्या बनी हुई थी।
गोरखपुर महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) में शामिल क्षेत्र के अतिरिक्त विकास क्षेत्र में आने वाले इन इलाकों के लिए शासन की एसओपी अपनाने से अब प्राधिकरण नियमानुसार मानचित्र स्वीकृत कर सकेगा। बैठक के दौरान कमिश्नर ने यह ध्यान रखने को कहा कि जहां जो मानचित्र पास किया जाए, उसका लिखित विवरण रखा जाएग, जिससे जब महायोजना बने तो उस जगह पर वही भू उपयोग हो, जिसका मानचित्र पास किया गया हो। ऐसा न हो कि जहां आवासीय मानचित्र पास किया गया हो, वहां भू उपयोग खुला क्षेत्र हो जाए।
नए एसओपी के तहत प्राधिकरण सर्वे करेगा। जहां कई स्कूल होंगे, वहां स्कूली मानचित्र पास किया जाएगा। इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यावसायिक मानचित्र पास होगा। आवासीय क्षेत्रों में प्लाटिंग के लिए लेआउट भी स्वीकृत किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में आवासीय मानचित्र भी पास होगा। लेकिन जहां कृषि कार्य हो रहा होगा, वहां किसी अन्य का मानचित्र पास नहीं किया जाएगा। यह फैसला विस्तारित क्षेत्रों में नियोजित विकास और अनियंत्रित निर्माण पर रोक की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
बैठक में महायोजना-2031 लागू होने के बाद आर्किटेक्ट, विकासकर्ताओं और आम लोगों की ओर से उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर भी विचार किया गया। बोर्ड ने संबंधित प्रस्तावों को शासन को भेजने के निर्देश दिए। विस्तारित क्षेत्र के लिए जीआइएस आधारित महायोजना तैयार कराने की प्रक्रिया भी पहले से चल रही है। इसी तरह जीडीए बोर्ड ने राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड के माध्यम से प्राधिकरण की जर्जर और पुरानी संपत्तियों के पुनर्विकास के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि प्रस्ताव शून्य वित्तीय भार के आधार पर तैयार किया गया है।
बोर्ड ने संबंधित संपत्तियों का विस्तृत विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। योजना को अंतिम रूप मिलने पर पुरानी और अनुपयोगी हो रही जीडीए परिसंपत्तियों को नए स्वरूप में विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।
बैठक में उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, नगर आयुक्त अजय जैन, नामित बोर्ड सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन कुमार त्रिपाठी और दुर्गेश बजाज सहित अन्य अधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
गंभीरनाथ प्रेक्षागृह का किराया अब 4 लाख की जगह 1.30 लाख
गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में कार्यक्रम आयोजित करना अब पहले की तुलना में काफी सस्ता होगा। जीडीए बोर्ड ने प्रेक्षागृह के बड़े और छोटे हाल का किराया संशोधित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। निर्णय के अनुसार बड़े हाल का किराया अब 4.13 लाख रुपये के स्थान पर 1.30 लाख रुपये होगा। वहीं छोटे हाल का किराया 2.24 लाख रुपये से घटाकर 47,200 रुपये कर दिया गया है।
किराये में भारी कमी से सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अन्य आयोजनों के लिए प्रेक्षागृह की पहुंच व्यापक होने की उम्मीद है। बोर्ड ने प्रेक्षागृह के प्रथम तल पर स्थित दो छोटे हाल भी किराये पर उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी है।
इसके साथ ही परिसर में मौजूद कैंटीन स्पेस और लाइब्रेरी हाल को पीपीपी माडल पर संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रेक्षागृह की सुविधाओं के बेहतर उपयोग के साथ नई गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही प्रेक्षागृह की देखरेख का खर्च भी निकल सकेगा।
खोराबार टाउनशिप में अब ‘रुद्राक्ष’ और ‘मानसरोवर’ एनक्लेव
जीडीए की खोराबार आवासीय योजना में निर्माणाधीन बहुमंजिली आवासीय परियोजनाओं को नई पहचान मिल गई है। बोर्ड ने माइवान पद्धति पर विकसित की जा रही ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के नामकरण को मंजूरी दे दी। निर्माणाधीन बहुमंजिली ईडब्ल्यूएस और एलआइजी आवासों का नाम अब ‘रुद्राक्ष एनक्लेव’ होगा। वहीं बहुमंजिली मिनी एमआइजी और एमआइजी आवासों को ‘मानसरोवर एनक्लेव’ नाम दिया गया है।
बोर्ड ने प्राधिकरण की बहुमंजिली योजना कुश्मी एनक्लेव का नाम बदलकर ‘नवनाथ एनक्लेव’ करने को भी सहमति प्रदान कर दी। नामकरण के जरिए आवासीय परियोजनाओं को अलग पहचान देने के साथ उनकी ब्रांडिंग भी बेहतर होने की उम्मीद है।
जेटी पर चलेगा फव्वारा, नया सवेरा के पास एक और गेट पर विचार
रामगढ़ताल को स्वच्छ और पर्यटन के लिहाज से अधिक आकर्षक बनाने के लिए जीडीए बोर्ड ने वहां चल रहे और प्रस्तावित सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में जेटी पर स्थापित फव्वारे का नियमित संचालन कराने के निर्देश दिए गए।
बोर्ड ने रामगढ़ताल और आसपास पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों पर भी चर्चा की। नया सवेरा फेज-एक के प्रवेश द्वार के समीप स्थित सड़क पर भी एक समान डिजाइन और एकरूपता के दृष्टिकोण से एक और प्रवेश द्वार बनाए जाने की संभावना पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के अन्य महत्वपूर्ण फैसले
बैठक में जीडीए द्वारा विकसित गोरक्ष एनक्लेव, पत्रकारपुरम, पत्रकारपुरम विस्तार, राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना तथा पैडलेगंज से आरकेबीके तक ताल रिंग रोड और पैडलेगंज से नया सवेरा फेज-एक तक की सड़क को अनुरक्षण के लिए नगर निगम को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नगर निगम को 10 दिन के भीतर संयुक्त निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सिविल और विद्युतीकरण कार्यों के लिए ठेकेदारों का पंजीकरण अब वर्ष में दो बार मार्च और सितंबर में खोला जाएगा।
बोर्ड का मानना है कि इससे सभी श्रेणियों के ठेकेदारों को समान अवसर मिलेगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और तेज बनाने के लिए भी सैद्धांतिक सहमति दी गई। अभिलेखों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और डिजिटलीकरण से जुड़े कार्य पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए ईओआई के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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इसके अलावा सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए उप श्रम आयुक्त कार्यालय के पीछे स्थित 4000 वर्गमीटर भूमि का भू-उपयोग कार्यालय एवं सार्वजनिक-अर्द्ध सार्वजनिक सुविधा से आवासीय करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।
