गोरखपुर में मानव तस्करी की जांच अटकी, विदेश मंत्रालय तक पहुंचा मामला
मानव तस्करी के मामले में पकड़े गए बांग्लादेशी-म्यांमार नागरिकों और नाबालिगों के सत्यापन में देरी से देवरिया पुलिस की जांच तीन माह से अटकी है। एसपी ने ...और पढ़ें

म्यांमार और बांग्लादेश से नहीं मिला दो आरोपितों व तीन नाबालिगों का सत्यापन। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
मानव तस्करी जांच तीन माह से अधर में।
बांग्लादेशी-म्यांमार नागरिकों का सत्यापन लंबित।
विदेश मंत्रालय से मांगी गई आधिकारिक पुष्टि।
सतीश पांडेय, गोरखपुर। मानव तस्करी में पकड़े गए बांग्लादेशी-म्यांमार के नागरिकों व तीन नाबालिगों का सत्याप न होने से मुकदमे की विवेचना तीन माह से अधर में लटकी हुई है। आरोपितों के बताए गए पते और नागरिकता का आधिकारिक सत्यापन नहीं होने से देवरिया पुलिस न तो जांच पूरी कर पा रही है और न ही मानव तस्करी के नेटवर्क की पूरी कड़ियां जोड़ पा रही है। एसेपी देवरिया अभिजीत आर. शंकर ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर दोनों देशों से सत्यापन कराने का अनुरोध करने के साथ ही उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी।
16 अप्रैल को अवध-असम एक्सप्रेस में एस्कॉर्ट ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान को कुछ यात्रियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। सिवान जिले के जीरादेई के पास पूछताछ के बाद उन्हें निगरानी में रखा गया और देवरिया रेलवे स्टेशन पर उतारकर जांच की गई।
दस्तावेज और पहचान संदिग्ध मिलने पर दो युवकों और तीन नाबालिगों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में एक युवक ने अपनी पहचान म्यांमार के मौन्डू स्थित फोकीरा बाजार निवासी सद्दाम हुसैन के रूप में बताई, जबकि दूसरे ने अपना नाम जाहिर हुसैन उर्फ जाहिद हुसैन उर्फ आयात हुसैन बताते हुए म्यांमार के मौन्डू और बांग्लादेश के काक्स बाजार स्थित कुटुपालांग रोहिंग्या शरणार्थी शिविर का पता बताया।
तीन नाबालिगों में दो लड़कियां थीं, जिन्होंने खुद को म्यांमार का निवासी बताते हुए वर्तमान में कुटुपालांग शिविर में रहने का दावा किया। देवरिया पुलिस ने दोनों आरोपितों को विदेशी अधिनियम और मानव तस्करी के आरोप में जेल भेज दिया।
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नाबालिग लड़कियों को बाराबंकी और किशोर को गोरखपुर के बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया। विवेचना के दौरान आरोपितों की पहचान, बताए गए पते और नागरिकता संबंधी जानकारी संदिग्ध लगी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर म्यांमार और बांग्लादेश में संबंधित पते और नागरिकता से जुड़े अभिलेखों का आधिकारिक सत्यापन कराने का अनुरोध किया। विदेशी नागरिकों की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के बाद ही विवेचना को अंतिम रूप दिया जाएगा और मानव तस्करी से जुड़े पूरे गिरोह की भूमिका भी स्पष्ट हो सकेगी।