गोरखपुर जंक्शन में गांजा तस्करी का खुलासा, सादे कपड़ों में ‘जीआरपी कर्मी’ बनकर अंजाम देता था नेपाल का तस्कर
गोरखपुर जंक्शन को ट्रांजिट प्वाइंट बनाकर सीमावर्ती इलाकों से हरियाणा-पंजाब तक गांजा तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। अंबाला जीआरपी की जांच में सामने आया कि ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अंबाला जीआरपी की जांच में पता चला कि गोरखपुर जंक्शन को ट्रांजिट प्वाइंट बनाकर सीमावर्ती इलाकों से गांजा लाया जाता, प्लेटफार्म स्थित स्टाल से पैकेट उठवाकर कुलियों के जरिए ट्रेन में चढ़ाया जाता और फिर कैरियर के माध्यम से हरियाणा-पंजाब रूट पर भेज दिया जाता। संदेह के दायरे में नेपाल का रहने वाला तस्कर टिक्का भी है।
कुलियों ने पूछताछ में बताया कि सादे कपड़ों में एक व्यक्ति, हाथ में डंडा लिए, खुद को जीआरपी का स्टाफ बताकर बैग रखवाने को कह रहा था। यही व्यक्ति अब जांच का केंद्र है। सूत्रों के मुताबिक उसकी पहचान ‘टिक्का’ के रूप में सामने आ रही है, जो नेपाल का निवासी बताया जा रहा है और लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय तस्कर माना जाता है।
स्टाल से उठाई गई थी गांजा की खेप
तफ्तीश में यह भी सामने आया कि प्लेटफार्म नंबर दो पर स्थित स्टाल से गांजा की खेप उठाई गई थी। स्टाल संचालक के बेटे की गिरफ्तारी और तीन किलो गांजा व 46 किलो डोडा चूरा की बरामदगी ने इस कड़ी को मजबूत किया है। जांचकर्ता अब यह खंगाल रहे हैं कि क्या स्टाल सिर्फ स्टोरेज प्वाइंट था या पैकेजिंग और वितरण की भूमिका भी निभा रहा था।
आशंका है कि नेटवर्क बहुस्तरीय है। पहला चरण में सीमा पार से गांजा लाया जाता है, दूसरे चरण में स्थानीय संपर्क के जरिए जंक्शन तक पहुंचाते हैं। तीसरा रेल मार्ग से ट्रांजिट और और चौथा गंतव्य तक पहुंचाने का है। अंबाला में पकड़ी गई महिला व स्टाल संचालक इस चेन की एक कड़ी भर है।
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पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर काल डिटेल, सीसी कैमरे के फुटेज,और वित्तीय लेन-देन की समानांतर जांच चल रही है। ‘टिक्का’ की भूमिका को लेकर खुफिया इनपुट जुटाए जा रहे हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ‘टिक्का’ के पकड़े जाने पर नेपाल कनेक्शन से लेकर हरियाणा-पंजाब तक फैले इस नेटवर्क की पूरी संरचना सामने आ रही है।