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    गोरखपुर का जानलेवा नाला बना मौत का कुआं, बजट के अभाव में निर्माण ठप

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 08:31 AM (GMT+05:30)

    गोरखपुर में खजांची फ्लाईओवर के पास जानलेवा खुला नाला अभी भी जस का तस है, जिसमें दो साल में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बजट के इंतजार में नाले का निर् ...और पढ़ें

    खजांची चौराहा पर फ्लाईओवर के फातिमा की तरफ बनना है नाला। जागरण

    खजांची चौराहा पर फ्लाईओवर के फातिमा की तरफ बनना है नाला। जागरण

    HighLights

    1. नाले में डूबकर दो साल में तीन मौतें हो चुकी हैं।

    2. बजट की कमी से नाले का निर्माण कार्य रुका है।

    3. लोक निर्माण विभाग ने जल निगम को जिम्मा दिया।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। खजांची फ्लाईओवर के आगे फातिमा की तरफ जानलेवा नाला अब भी खुला पड़ा है। दो वर्ष में नाले में डूबकर तीन लोगों की मृत्यु के बाद भी बजट के इंतजार में निर्माण नहीं शुरू हो पा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने नाला निर्माण का जिम्मा जल निगम को दिया है। जल निगम को जितना धन मिला, उतने हिस्से का नाला निर्माण कराया।

    अब बचे 394 मीटर हिस्से के लिए धन का इंतजार है। जल निगम के अभियंताओं का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने चार करोड़ का बजट दिया है। बचे ढाई करोड़ रुपये जल्द देने का आश्वासन दिया है। आश्वासन के आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

    खजांची फ्लाईओवर से फातिमा रोड पर गोड़धोइया नाला तक तकरीबन 754 मीटर लंबाई में गहरा नाला है। सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग का निर्माण खंड तीन करा रहा है। नाला गहरा होने के कारण इसे बनाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग ने जल निगम को दी है।

    जल निगम ने नाला निर्माण के लिए 12.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। लोक निर्माण विभाग ने पहली किस्त में जल निगम को छह करोड़ रुपये दिए। इन रुपयों से 360 मीटर लंबाई में नाला निर्माण के लिए टेंडर जारी कर काम शुरू करा दिया गया।

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    बचे 394 मीटर लंबाई में निर्माण के लिए साढ़े छह करोड़ रुपये मिलने थे। लोक निर्माण विभाग ने दोबारा चार करोड़ रुपये दिए। इसके बाद ढाई करोड़ रुपये न मिलने से नाले के दूसरे हिस्से का टेंडर नहीं हो पा रहा है।

    नौ जून को हुई थी तेतरदास की मृत्यु
    नौ जून को नाले में गिरकर बिहार निवासी तेतरदास की मृत्यु हो गई थी। गहरे नाले तेतरदास गिर गया। उसे निकालने में देर हुई। दो युवक हिम्मत कर नाले में उतरे। उन्होंने तेतरदास को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया था। दो वर्ष के भीतर गहरे नाले में डूबकर तीसरी मृत्यु हुई है।

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    जाल भी हो गया गायब
    तेतरदास की मृत्यु के बाद पहले तो कोई विभाग नाला को अपना मानने को तैयार नहीं हुआ। दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर आयुक्त ने खुले गहरे नाले के किनारे हरे रंग का जाल लगवा दिया, लेकिन कुछ दिन बाद ही जाल गायब कर दी गई। अब कुछ हिस्से में ही जाल लगी है।

    सड़क से बिल्कुल सटा है गहरा नाला
    नाला बहुत गहरा है। गंभीर बात यह है कि यह सड़क से बिल्कुल सटकर है। रात में इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं जलती है। यदि किसी वाहन का पहिया या व्यक्ति का पैर फिसला तो सीधे गहरे नाले में जाना तय है। आसपास के नागरिकों का कहना है कि रात में सबसे ज्यादा खतरा होता है।