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    गोरखपुर में पंचायतों ने विकास योजना से झाड़ा 'पल्ला', गांवों की रफ्तार पर ब्रेक

    Updated: Sat, 09 May 2026 11:37 AM (IST)

    गोरखपुर मंडल की ग्राम पंचायतों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विकास कार्ययोजना (जीपीडीपी) अब तक तैयार नहीं की है। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर मंडल की पंचायतों ने कार्ययोजना नहीं बनाई।

    2. प्रधानों की रुचि घटने से विकास कार्य ठप पड़े।

    3. सड़क, नाली, पेयजल जैसे कार्यों में होगी देरी।

    अरुण चन्द, गोरखपुर। गोरखपुर मंडल की ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2026-27 के विकास कार्यों की तैयारियां फिलहाल ठप पड़ी हुई हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही गांवों के विकास को लेकर प्रधानों की सक्रियता भी कम हो गई है।

    स्थिति यह है कि मंडल के चारों जिलों गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया की एक भी ग्राम पंचायत ने अब तक ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार नहीं की है। जबकि नियमानुसार अगले वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना मार्च महीने में ही तैयार कर पोर्टल पर अपलोड कर दी जानी चाहिए थी।

    जीपीडीपी स्वीकृत हुए बिना पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग से विकास कार्यों के लिए बजट जारी नहीं होता। नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक न पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित हुईं और न ही विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय हो सकीं। इसके चलते गांवों में सड़क, खड़ंजा, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पंचायत भवन और तालाब सुंदरीकरण जैसे जरूरी कार्यों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

    पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति के करीब होने के कारण प्रधान अब नई योजनाओं में विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं शासन स्तर पर भी निवर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों से पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कराने को लेकर संशय बना हुआ है। यही वजह है कि इस बार जीपीडीपी तैयार कराने को लेकर शुरुआती स्तर पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई गई।

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    हर वर्ष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाती हैं। इसके बाद पंचायतें प्रस्तावों को जीपीडीपी पोर्टल पर अपलोड करती हैं और स्वीकृति मिलने के बाद केंद्रीय वित्त आयोग से धनराशि जारी होती है। लेकिन इस बार पंचायतों की उदासीनता के चलते पूरी प्रक्रिया पटरी से उतरती दिख रही है।

    सूत्रों के मुताबिक यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी बनी हुई है। कई प्रधानों का मानना है कि अब नई पंचायतों का गठन होना है, ऐसे में अगली कार्ययोजना की जिम्मेदारी नई टीम को संभालनी चाहिए। यही कारण है कि गांवों के विकास कार्यों को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई दे रही।

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    यदि पंचायतों की ओर से जल्द कार्ययोजना तैयार नहीं की गई तो विकास कार्यों की शुरुआत में महीनों की देरी हो सकती है। साथ ही पंचायतों को मिलने वाला केंद्रीय वित्त भी प्रभावित होगा। इसका सीधा असर ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं पर पड़ेगा।

    हालांकि उप निदेशक पंचायत हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि मंडल के सभी डीपीआरओ को पंचायत सचिवों और सहायक विकास अधिकारियों को सक्रिय करते हुए जल्द से जल्द कार्ययोजना तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि पंचायतों की योजनाएं शीघ्र तैयार कर पोर्टल पर अपलोड कराई जाएं ताकि विकास कार्यों में अधिक देरी न हो।

    क्या है केंद्रीय वित्त आयोग का पंचायत फंड?
    ग्राम पंचायतों को मिलने वाला केंद्रीय वित्त मुख्य रूप से 15वें वित्त आयोग (2021-26) के तहत जारी किया जाता है। इस धनराशि को दो हिस्सों में बांटा जाता है। 60 प्रतिशत बंधित (टायड) और 40 प्रतिशत अबंधित (अनटायड)। बंधित निधि का उपयोग स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, नाली निर्माण और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े कार्यों में किया जाता है। वहीं अबंधित निधि का इस्तेमाल ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के तहत स्थानीय जरूरतों के अनुसार सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, पंचायत भवन, तालाब सुंदरीकरण और अन्य विकास कार्यों में किया जा सकता है।