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    गोरखपुर में खुद को वारिस बताकर बेच दिया दूसरे का मकान, पांच पर केस दर्ज

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 11:00 AM (IST)

    गोरखपुर के खूनीपुर में एक मकान को खुद का वारिस बताकर 86 लाख रुपये में बेचने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता सैय्यद फिरोज आलम की तहरीर पर विक्रेता, ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. खूनीपुर में 86 लाख का फर्जी बैनामा मामला।

    2. विक्रेता, खरीदार, गवाहों सहित पांच पर केस।

    3. शिकायतकर्ता ने 1976 के बैनामे का दावा।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। खूनीपुर स्थित एक मकान का खुद को वारिस बताकर 86 लाख रुपये में गलत तरीके से बैनामा कराने का मामला सामने आया है। शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने विक्रेता, दोनों खरीदार और बैनामे के दो गवाहों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस संपत्ति का स्वामित्व नगर निगम के रिकार्ड में पहले से उनके नाम दर्ज है,उसी का फर्जी दस्तावेज तैयार कर दोबारा बैनामा कर दिया गया।

    खूनीपुर निवासी सैय्यद फिरोज आलम ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 1976 में उन्होंने समीम बेगम से मकान संख्या-84 का बैनामा कराया था। तब से वह करीब 9,900 वर्गफुट भूमि पर काबिज हैं। उनके अनुसार पहले नगर निगम के अभिलेखों में संपत्ति समीम बेगम के नाम दर्ज थी, लेकिन बैनामे के आधार पर पांच जनवरी 2015 को नगर निगम के रिकार्ड में उनका नाम दर्ज कर दिया गया।

    संपत्ति से जुड़े मूल दस्तावेज भी उनके पास सुरक्षित हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार 17 जून 2026 को उन्हें जानकारी मिली कि नादिर हुसैन ने खुद को हसीना बेगम का वारिस बताते हुए उसी संपत्ति का विनोद कुमार गुप्ता और विजय शर्मा के पक्ष में 86 लाख रुपये में बैनामा कर दिया। उनका आरोप है कि नादिर हुसैन और हसीना बेगम का उक्त संपत्ति से कोई वैधानिक संबंध नहीं था।

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    पुलिस ने नादिर हुसैन, दोनों खरीदारों तथा बैनामे के गवाह मोहित गुप्ता और मोहसिन अब्दुल्लाह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि जब नगर निगम के रिकॉर्ड में संपत्ति पहले से उनके नाम दर्ज थी, तब दोबारा बैनामा किन दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण और पंजीकरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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    सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि राजस्व और नगर निगम के अभिलेखों सहित सभी दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है। साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।