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    गोरखपुर रामगढ़ताल हादसा: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बिखरी रही अव्यवस्था, अपनों को तलाशते रहे स्वजन

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 08:07 AM (IST)

    गोरखपुर रामगढ़ताल बोट हादसे के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अव्यवस्था और संवेदनहीनता सामने आई। घायल मासूम को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा, जबकि एक ...और पढ़ें

    घायल मासूम हमजा सिर से बहते खून के साथ खड़ा रहा, नहीं शुरू हुआ उपचार। जागरण

    घायल मासूम हमजा सिर से बहते खून के साथ खड़ा रहा, नहीं शुरू हुआ उपचार। जागरण

    HighLights

    1. घायल मासूम को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

    2. जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दिखी घोर संवेदनहीनता।

    3. एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद घायल को मिला उपचार।

    जितेन्द्र पाण्डेय, गोरखपुर। रामगढ़ताल के नौकायन पर हुए बोट हादसे के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी का अमानवीय चेहरा सामने आया है। हादसे में घायल मासूम हमजा सिर से बहते खून के साथ अस्पताल की इमरजेंसी में खड़ा था, लेकिन कर्मी अन्य कार्यों में लीन रहे। बाहर टूटे कंधे के साथ खड़े पिता कयामुद्दीन पत्नी रुक्साना खातून के आने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच एक युवक ने चीखकर कर्मियों को उपचार की याद दिलाई और नौकायन चौकी प्रभारी हरिओम से गुहार लगाई, तब जाकर मासूम का इलाज शुरू हुआ। हादसे की जानकारी होने के बाद भी वहां कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं दिखा।

    दूसरी ओर, हादसे में लखमुद्दीन की मौत से परिवार गहरे सदमे में था। बड़े भाई सलाउद्दीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि घर पर मौजूद माता-पिता और साथ आई बहन नाजिया को यह दुखद खबर कैसे दी जाए। परिवार के सदस्य इधर-उधर भागदौड़ करते रहे। बहन नाजिया बार-बार अपने भाई का हाल जानने के लिए इमरजेंसी की ओर बढ़ती रही।

    वह शव के पास जाने का प्रयास करती रही, लेकिन साथ मौजूद महिलाओं ने उसे रोक लिया। बाद में उसे अस्पताल परिसर के दूसरे छोर पर ले जाकर यह कहकर शांत करने की कोशिश की गई कि उसका भाई उपचाराधीन है। बोट हादसे की इस विचलित कर देने वाली घटना ने जिला प्रशासन की व्यवस्था और अस्पताल की संवेदनहीनता दोनों की पोल खोलकर रख दी है।

    उपचार के लिए लेकर गए एसडीएम
    हादसे के बाद घायल 9:30 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए, उन्हें संभालने के लिए इकलौते पहुंचे नौकायन चौकी प्रभारी, कभी बाहर खड़े परिवार के पास जा रहे थे तो कभी अंदर मृत शव के पास। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक लखमुद्दीन को मृत बताने के बाद अपनी कुर्सी पर बैठकर अन्य मरीजों का उपचार करने में जुट गए।

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    टूटा कंधा लिए कयामुद्दीन सदमे में खड़ा रहा, उसका उपचार भी नहीं हुआ। करीब 10:55 बजे पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार भी गाड़ी से उतरकर सीधे इमरजेंसी में पहुंच गए। वहां जाने पर जब उन्हें पता चला कि घायल अभी बाहर हैं। फिर वह पीड़ित परिवार के पास पहुंचे और कयामुद्दीन का हाथ पकड़कर अंदर ले गए और उपचार कराया।

    तीन घंटे बाद अस्पताल पहुंची पत्नी
    हादसे के बाद कुशीनगर से नौकायन घूमने आया पूरा परिवार बिखर गया, जिसे जो साधन मिला, वह उसी से जिला अस्पताल तक पहुंचा। घायलों को लेकर चौकी प्रभारी पहुंचे थे। इसी भागदौड़ में कयामुद्दीन की पत्नी रुक्साना लापता हो गई थी। वह किसी बाइक सवार युवक के साथ अस्पताल तक जाने के लिए निकली, लेकिन रास्ता भटक जाने से वह तीन घंटे बाद 12 बजे जिला अस्पताल पहुंची और अपने मासूम को गले लगाया और पति का हाल जाना।

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