गोरखपुर के ताल कंदला में बनेगा अत्याधुनिक एक्वा पार्क, पूर्वांचल के मत्स्य कारोबार को मिलेगी नई उड़ान
गोरखपुर के ताल कंदला में 30 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एक्वा पार्क, मत्स्य मंडी और प्रसंस्करण केंद्र विकसित ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
ताल कंदला में 30 करोड़ का अत्याधुनिक एक्वा पार्क।
मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन की आधुनिक सुविधाएं।
गोरखपुर बनेगा पूर्वांचल का बड़ा मत्स्य केंद्र।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वांचल में मत्स्य कारोबार को नई पहचान देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ी पहल की है। खोराबार क्षेत्र स्थित ताल कंदला में अत्याधुनिक एक्वा पार्क, मत्स्य मंडी व प्रसंस्करण केंद्र विकसित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। मत्स्य विभाग की ओर से भेजे गए 30 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को शासन स्तर से स्वीकृति मिल चुकी है। बजट आवंटित होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ताल कंदला में 27 एकड़ भूमि पर एकीकृत एक्वा पार्क विकसित किया जाएगा। यहां मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, प्रशिक्षण और विपणन की आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। अधिकारियों का दावा है कि परियोजना पूरी होने के बाद गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े मत्स्य केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
मत्स्य पालक विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष राम ने बताया कि जिले में तीन हजार मत्स्य पालक व विक्रेता जुड़े हुए हैं। उनकी आय बढ़ाने व कारोबार को संगठित स्वरूप देने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि पूर्व में 100 एकड़ भूमि पर परियोजना प्रस्तावित थी, लेकिन पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब 27 एकड़ भूमि पर निर्माण की तैयारी की जा रही है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी मछली मंडी
प्रस्तावित एक्वा पार्क में अत्याधुनिक मछली मंडी स्थापित की जाएगी। इसमें हाइड्रोलिक मछली विक्रय मंच, शीत भंडारण, बर्फ संयंत्र, डिजिटल विक्रय मशीन, पैकेजिंग इकाई और लोडिंग-अनलोडिंग की आधुनिक व्यवस्था होगी। इसके साथ ई-नीलामी व विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे मत्स्य पालकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सकेगा।
नई प्रजातियों के विकास और प्रशिक्षण पर रहेगा जोर
परियोजना के अंतर्गत मत्स्य बीज बैंक व नई प्रजातियों के विकास के लिए अलग केंद्र स्थापित किया जाएगा। मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण व वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। परिसर में प्रसंस्करण इकाई, परीक्षण प्रयोगशाला, शीतगृह व तैयार उत्पाद इकाई भी बनाई जाएगी। इससे मछलियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने व दूसरे जिलों व प्रदेशों तक आसानी से भेजने में मदद मिलेगी।
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वर्तमान में महेवा स्थित मछली मंडी में जगह कम होने व आधुनिक सुविधाओं के अभाव में व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। पर्याप्त शीत भंडारण न होने से मछलियां जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान होता है। प्रसंस्करण व पैकेजिंग इकाई न होने के कारण स्थानीय उत्पाद बड़े बाजारों तक नहीं पहुंच पाते। मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण व आधुनिक तकनीक की जानकारी भी पर्याप्त नहीं मिल पाती, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है।
पर्यटन व रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार एक्वा पार्क को पर्यटन गतिविधियों से भी जोड़ने की तैयारी में है। परिसर में नौका विहार व जल पर्यटन की सुविधा विकसित की जाएगी। इससे ताल कंदला क्षेत्र पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों में भी परियोजना को लेकर उत्साह है। देईपार स्थित मत्स्य विकास हैचरी के संचालक बीआर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की यह पहल गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में मत्स्य पालन व्यवसाय के लिए क्रांतिकारी कदम साबित होगी। इससे मछलियों के विपणन और परिवहन को नई गति मिलेगी।
वहीं, नैयापार के मत्स्य पालक राकेश मल्ल ने कहा कि ताल कंदला में बनने वाला एक्वा पार्क गोरखपुर के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे मत्स्य कारोबार को नई पहचान मिलेगी और हजारों लोगों की आजीविका मजबूत होगी।
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