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    गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में पेड़ों की कटाई, काटे जा रहे 1192 पेड़; छात्र संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

    Updated: Fri, 15 May 2026 08:12 AM (IST)

    गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में 1.38 करोड़ रुपये के टेंडर पर 1192 पेड़ों की कटाई हो रही है, जिसमें मुख्य रूप से सागौन के पेड़ शामिल हैं। छात्र संगठन इ ...और पढ़ें

    गोरखपुर विश्वविद्यालय

    गोरखपुर विश्वविद्यालय

    HighLights

    1. गोरखपुर विश्वविद्यालय में 1192 पेड़ों की कटाई जारी।

    2. 1.38 करोड़ रुपये का टेंडर, मुख्यत: सागौन के पेड़।

    3. छात्र संगठन विरोध में, आंदोलन की चेतावनी।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर से लेकर आवासीय कालोनियों और छात्रावासों में तक में इन दिनों जोरशोर से पेड़ों की कटाई चल रही है। कुल 1192 पेड़ काटे जाने हैं। इसके लिए 1.38 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) का टेंडर हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन पेड़ों की कटाई को जरूरी बता रहा है। उधर छात्र संगठन इसके विरोध में उतर गए हैं। कटाई न रोके जाने पर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

    विश्वविद्यालय की ओर से पेड़ों की नीलामी के लिए टेंडर निकाला गया था। इसका टेंडर पीलीभीत के विकास अग्रवाल को मिला है। इसके तहत 1192 पेड़ काटे जाने हैं। सर्वाधिक 1013 पेड़ सागौन के हैं। इसके अलावा सीरसा के 34, औकठ के 31, यूकेलिप्टस के 28, बेर व सेमर के 15-15, अशोक के 11 सहित 20 प्रकार के पेड़ काटे जाने हैं। वन विभाग की मंजूरी मिलने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह से लेकर देर रात तक पेड़ों की कटाई चल रही है।

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हरे-भरे पेड़ों की कटाई का विरोध किया है। गोरक्ष प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता ने कहा कि जिस शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता व प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, वहीं पर्यावरण विनाश का ऐसा दृश्य प्रस्तुत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक एवं निंदनीय है। ऐसे संवेदनहीन निर्णय भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न कर सकते हैं। अभाविप कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर से मिलकर कटाई पर रोक लगाने की मांग उठाई। आंदोलन की चेतावनी दी।

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    एनएसयूआइ के प्रदेश महासचिव आदित्य शुक्ल ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि परिसर में लगातार सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। एक तरफ सरकार 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ डीडीयू प्रशासन कैंपस को वृक्ष विहीन बनाने पर तुला है।

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    उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतने पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि तीन दिन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थित स्पष्ट नहीं की तो एनएसयूआई की ओर से उग्र आंदोलन किया जाएगा।