गोरखपुर मतदाता सूची में ‘लाजिकल डिस्क्रिप्शन’ से होगी बड़ी सफाई, BLO करेंगे सत्यापन
गोरखपुर में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के तहत 'लॉजिकल डिस्क्रिप्शन' प्रक्रिया शुरू हुई है। इसका उद्देश्य तकनीकी और तर्कहीन त्रुटियों को सुधारकर सूची ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
'लॉजिकल डिस्क्रिप्शन' प्रक्रिया से मतदाता सूची में सुधार।
तकनीकी और तर्कहीन त्रुटियों को चिन्हित कर सुधारा जाएगा।
मतदाताओं को बीएलओ को दस्तावेज देने होंगे, सुनवाई नहीं।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-एसआइआर अभियान के तहत अब ‘लाजिकल डिस्क्रिप्शन’ प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज उन तकनीकी और तर्कहीन त्रुटियों को चिन्हित कर सुधारना है, जो सामान्य डेटा पैटर्न के आधार पर असंभव या संदिग्ध प्रतीत होती हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि मतदाता सूची में किसी पिता की आयु 15 वर्ष दर्ज है, जो स्पष्ट रूप से डेटा एंट्री की त्रुटि दर्शाता है। इसी तरह एक ही व्यक्ति से छह या उससे अधिक मतदाताओं को बच्चों के रूप में जोड़े जाने जैसी असामान्य प्रविष्टियां भी जांच के दायरे में हैं। आयोग का उद्देश्य इन विसंगतियों को दूर कर मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है।
जिले में अब तक करीब छह लाख मतदाताओं के नाम इस प्रक्रिया के तहत चिन्हित किए गए हैं। संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं, हालांकि उन्हें किसी प्रकार की व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने आयु, पारिवारिक संबंध या अन्य विवरण से जुड़े आवश्यक प्रमाण पत्र संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) को उपलब्ध करा देंगे। बीएलओ दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सूची में आवश्यक संशोधन करेंगे।
यह भी पढ़ें- फर्जी हस्ताक्षर से फॉर्म-7 जमा करने वालों पर FIR दर्ज कराए आयोग, सपा ने की मांग
निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी आधार पर संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य किसी का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में शुद्ध और अद्यतन सूची का उपयोग किया जा सके।