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    गोरखपुर में साइबर अपराधियों का नया जाल, युवाओं के बैंक खाते बन रहे अवैध कमाई का जरिया

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 11:22 AM (IST)

    साइबर अपराधी युवाओं को मामूली रकम का लालच देकर उनके बैंक खाते अवैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। गोरखपुर में 2500 से अधिक ऐसे 'म्यूल खातों' की जा ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. युवाओं को लालच देकर साइबर अपराधी खुलवा रहे बैंक खाते।

    2. गोरखपुर में 2500 'म्यूल खातों' की पुलिस कर रही जांच।

    3. अवैध ऑनलाइन गेमिंग और साइबर अपराधों में हो रहा उपयोग।

    जितेन्द्र पाण्डेय, गोरखपुर। साइबर अपराधी युवाओं को चार से पांच हजार रुपये का लालच देकर अपना स्लीपर सेल बना रहे हैं। 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग के कई युवक बैंक खाते खुलवाकर उनका संचालन साइबर अपराधियों को सौंप रहे हैं। इन खातों का उपयोग अवैध ऑनलाइन गेमिंग और अन्य साइबर अपराधों से अर्जित रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा है। कुछ युवक साइबर गिरोह के लिए सक्रिय रूप से काम भी कर रहे हैं। खाते में रकम आने के बाद वे एटीएम से नकदी निकालकर अपराधियों के बताए खातों में जमा कर रहे हैं।

    साइबर पुलिस ऐसे 2500 म्यूल खातों की जांच में जुटी है। इन खातों के संचालकों के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध से जुड़े मुकदमे दर्ज हुए है, जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इसमें सबसे अधिक 1700 संदिग्ध खाते कैंट, कोतवाली, शाहपुर और गुलरिहा थाना क्षेत्र में स्थित एक बैंक की शाखाओं में खोले गए है। जबकि बैंक का मुख्य ब्रांच रामगढ़ताल थाना क्षेत्र में स्थित है।

    साइबर सेल के शशी जायसवाल ने बताया कि अधिकांश खाताधारक स्नातक स्तर के छात्र हैं, जिन्हें मामूली रकम का लालच देकर गिरोह अपने जाल में फंसा रहा है। फिर, उनका खाता खुलवाकर दो से तीन महीने के लिए किराए पर लेकर संचालित कर रहे है। इस बीच उनके खातों से अवैध रूप से अर्जित साइब अपराध की भारी-भरकम का लेनदेन कर उन खातों का संचालकन बंद कर दिया जा रहा है।

    पीड़ितों द्वारा तहरीर देने पर ऐसे खाता संचालकों पर मुकदमा दर्ज हो रहा है। जिले में ऐसे ही म्यूल खातों की सूची तैयार पर साइबर पुलिस खाताधारकों की भूमिका, साइबर अपराधियों से उनके संपर्क और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कार्रवाई भी हो रही है। कोतवाली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार हुए छह आरोपित युवकों से खाता खुलवाकर साइबर अपराध की रकम का लेनदेन कर रहे थे।

    चार थानों में सबसे अधिक विद्यालय और कॉलेज
    पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी सबसे अधिक शहर के युवकों को ही अपने जाल में फंसा रहे है। कैंट, कोतवाली, शाहपुर और गुलरिहा थाना क्षेत्र में सबसे अधिक विद्यालय और बैंक है। इन क्षेत्रों में ही सबसे अधिक बाहर से आकर पढ़ने व नौकरी ढूढने वाले युवकों की संख्या होती है। इन युवकों को रुपये का लालच देकर खाता खुलवाने में आसानी होती है। युवक भी अपने खर्चों को पूरा करने के लिए हर महीने रुपये लेकर खातों का संचालन करने के लिए दे देते है।

    चाय की दुकान और रेस्टोरेंट को बनाया अड्डा
    पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों के लिए काम करने वाले स्लीपर सेल चाय की दुकान और रेस्टोरेंट को अपना अड्डा बना लिया है। यहां पर बैठकर वह युवकों को आसानी से फंसा रहे है। उनकी जरूरतों को जानकर पहले पूरा कर रहे, फिर प्रलोभन व अन्य तरीकों से उन्हें फंसाकर खाता खुलवा रहे। इसमें कुछ युवक अधिक धन कमाने के चक्कर में उनके लिए काम करना शुरू कर दें रहे है तो कुछ युवक सिर्फ खाता खोलकर संचालन के लिए एटीएम, पासबुक समेत अन्य कागजात उन्हेें सौंप दे रहे।

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    बिहार में बैठे है गिरोह के सदस्य
    पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों के सरगना आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, बंगाल समेत अन्य राज्यों में बैठे है। जबकि उनके गिरोह के अधिकतर सदस्य बिहार में बैठकर पूर्वांचल के जिलों के युवकों को निशाना बना रहे है। जांच में समाने आया कि बिहार में बैठे सदस्य टेलीग्राम के माध्यम से युवकों को नौकरी समेत अन्य का झांसा दे रहा है।

    बातचीत के दौरान जब सभी कागजात युवकों से प्राप्त हो जा रहा है तो उन्हें रेस्टोरेंट या होटल में बुलाकर उन्हें 25 से 30 हजार रुपये महीने देने की बात कर टारगेट दे रहे है। साथ ही प्रति युवक जोड़ने के बदले उन्हें कमिशन भी देने का प्रलोभन दिया जाता है। इसके बाद ये युवक साइबर अपराधियों के लिए काम करते हुए युवकों को जोड़ रहे और उनके खाते खुलवाकर साइबर अपराध के दलदल में ढकेल रहे।

    पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों को जैसे ही पता चलता है कि उनके द्वारा संचालित खाता सीज हो गया या खाता धारक पर केस दर्ज हो गया है, वे तत्काल खातों का संचालन बंद कर उसके सभी कागजात नष्ट कर देंते है, जिससे की वह पकड़ में न आए। गीडा क्षेत्र की युवती और कोतवाली क्षेत्र का दिव्यांग युवक साइबर अपराधियों के झांसे में आकर फंसे थे, दोनों की शिकायत बाद जब जांच हुई तो छह आरोपित गिरफ्तार किए गए। इसमें दो बिहार के थे।


    जिले में संचालित 2500 म्यूल खातों की सूची तैयार कर जांच की जा रही है। ये सभी खाते किसी और के नाम से है, लेकिन संचालन दूसरे के द्वारा किया जा रहा था। इन खातों से साइबर अपराध से हुई आमदनी की रकम का लेनदेन हुआ है। संबंधित थानों में जांच के लिए भेजा गया है। जैसे-जैसे जांच पूरी हो रही है और आरोपितों का नाम सामने आ रहा है, उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।

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    -सुधीर जायसवाल, एसपी अपराध