उम्मीदें 2026: छोटी भूमि पर घने जंगल, गोरखपुर में हरियाली की नई पहल
गोरखपुर वन विभाग ने हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए 'घना जंगल' तकनीक अपनाई है। 2025 में 11 हेक्टेयर में 3.85 लाख पौधे लगाए गए। 2026 में गोरखप ...और पढ़ें

2025 में कुल 11 हेक्टेयर में रोपे गए तीन लाख 85 हजार पौधे। जागरण
HighLights
वन विभाग की 'घना जंगल' तकनीक से हरियाली बढ़ेगी।
कम जगह में 35 हजार पौधे, चार साल में पूर्ण विकसित।
नागरिक भी अपनी भूमि पर घने जंगल उगा सकते हैं।
जितेन्द्र पाण्डेय, गोरखपुर। हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने नई रणनीति अपनाई है। इसके तहत छोटे-छोटे भूखंडों को चिह्नित कर घने जंगल उगाए जा रहे हैं। 2025 में 11 हेक्टेयर में कुल तीन लाख 85 हजार पौधों का रोपण किया गया है। 2026 में गोरखपुर विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कालेज, सुथनी, नगर वन और गीडा क्षेत्र में एक भूखंड पर ऐसे ही जंगल उगाने की तैयारी है।
यह प्रदेशव्यापी वृहद पौधारोपण अभियान से अलग एक स्वतंत्र पहल है, जो ‘घना जंगल’ तकनीक पर आधारित है। शहरीकरण के कारण पौधारोपण के लिए स्थान की चुनौती को कम कर शहर में वनाच्छादन बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
डीएफओ विकास यादव बताते हैं कि एक हेक्टेयर में जहां 1600, तो वहीं इस तकनीक में 35 हजार पौधे रोपे जाते हैं। नीम, शीशम, खजूर, जंगल जलेबी, बबूल आदि जिन प्रजातियों का रोपण होता है, वो चार वर्षों में पूर्ण विकसित पेड़ का रूप ले लेते हैं। तब इनकी कार्बन अवशोषण क्षमता दस गुणा अधिक हो जाती है।
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इस तरह जैव विविधता से भरपूर जंगल क्षरित भूमि को पुनर्जीवित करने और जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने में सहायक होंगे। आम नागरिकों से भी आवेदन मांगे हैं। इच्छुक लोग अपनी भूमि और खर्च देकर इस तकनीक से पौधारोपण कर सकते हैं, जिसमें पेड़ों का स्वामित्व उनके पास ही रहेगा। लागत 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर आती है।
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2025 में रोपा गया ‘घना जंगल’
| स्थान | क्षेत्रफल | पौधे |
| चिड़ियाघर | तीन हेक्टेयर | एक लाख पांच हजार |
| एकला बंधे के पास | एक हेक्टेयर | 35 हजार |
फर्टिलाइजर क्षेत्र | चार हेक्टेयर | एक लाख 40 हजार |
| गीडा क्षेत्र | तीन हेक्टेयर | एक लाख पांच हजार |