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    गोरखपुर रामगढ़ताल पर लगेंगे सीमा पिलर, भू-माफिया से सुरक्षित होगा क्षेत्र

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:03 PM (IST)

    रामगढ़ताल की भूमि पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए जीडीए स्थायी सीमा पिलर लगाने की तैयारी में है। यह पहल ताल के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन को ...और पढ़ें

    रामगढ़ताल के वेटलैंड के सीमांकन का काम अंतिम चरण में। जागरण

    रामगढ़ताल के वेटलैंड के सीमांकन का काम अंतिम चरण में। जागरण

    HighLights

    1. रामगढ़ताल पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए लगेंगे स्थायी पिलर।

    2. जीडीए ने जियो टैगिंग से सीमांकन का काम किया पूरा।

    3. मुख्यमंत्री की पहल से ताल का प्राकृतिक स्वरूप होगा सुरक्षित।

    अरुण चन्द, गोरखपुर। रामगढ़ताल की भूमि पर भूमाफिया नजर नहीं गड़ा सकेंगे। कोई अपनी जमीन से थोड़ा बढ़कर ताल की भूमि में अपने मकान का विस्तार कर कब्जा भी नहीं कर सकेगा। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ताल के वेटलैंड के सीमांकन का काम पूरा हो चुका है।

    जियो टैगिंग के आधार पर सीमा तय हो चुकी है। अब जल्द ही स्थायी सीमा पिलर लगाने की तैयारी है। पिलर स्थापित होते ही रामगढ़ताल की वास्तविक सीमा हमेशा के लिए चिह्नित हो जाएगी। इससे भविष्य में ताल की भूमि पर अवैध कब्जा, प्लाटिंग या निर्माण करना लगभग असंभव हो जाएगा।

    रामगढ़ताल को वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश की पहली अधिसूचित शहरी आर्द्रभूमि (वेटलैंड) घोषित किया गया था। इसके पीछे मुख्यमंत्री की मंशा यह थी कि ताल के प्राकृतिक स्वरूप, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को स्थायी सुरक्षा मिले और ताल की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो। अधिसूचना के करीब छह वर्ष बाद अब सीमांकन और सीमा पिलर लगाने की प्रक्रिया से उनकी सोच साकार होने जा रही है।

    जीडीए ने वर्ष 2020 की अधिसूचना के अनुरूप ताल के आसपास के पूरे प्रभाव क्षेत्र को 28 जोन में विभाजित कर वैज्ञानिक तरीके से जियो टैगिंग कराई थी। इसी जियो टैगिंग के आधार पर प्राधिकरण अब सीमांकन और पिलर लगाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है।

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    28 में से 22 जोन में प्रतिबंधित क्षेत्र 50 मीटर निर्धारित किया गया है। वहीं 6 जोन में यह दायरा 80 मीटर से लेकर 119 मीटर तक है। इनमें ज्यादातर क्षेत्र सहारा एस्टेट, महादेव झारखंडी और पैडलेगंज से स्मार्ट ह्वील के बीच के हैं। इन्हीं मानकों के अनुसार सीमांकन पूरा किया गया है।

    हाल ही में जिला पर्यावरण समिति की बैठक में जीडीए ने इस कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि सीमांकन पूरा होने के बाद अब स्थायी पिलर लगाने की तैयारी चल रही है। पिलर लगने के बाद किसी भी व्यक्ति के लिए यह दावा करना संभव नहीं होगा कि संबंधित भूमि उसकी है या उस पर निर्माण किया जा सकता है। हर सीमा स्पष्ट रूप से दिखाई देगी और किसी भी अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई आसान हो जाएगी।

    रामगढ़ताल पहले भी भू-माफिया की नजर में रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाना शुरू किया है। वेटलैंड नोटिफिकेशन के बाद अब तक 10 अवैध अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें तीन अवैध निर्माण ध्वस्त किए जा चुके हैं, जबकि तीन अन्य भवन सील कर दिए गए हैं। शेष मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा पिलर लगने के बाद ऐसे मामलों में और तेजी आएगी। नए अतिक्रमण की आशंका लगभग समाप्त हो जाएगी।

    दिसंबर, 2020 में जारी हुई अधिसूचना, पहले के निर्माण सुरक्षित
    आर्द्रभूमि प्रबंधन नियम-2017 के तहत वेटलैंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और नए निर्माण पर पहले से ही प्रतिबंध है। सात दिसंबर, 2020 की अधिसूचना में ताल के आसपास के संवेदनशील क्षेत्र को संरक्षित घोषित करते हुए निर्माण पर रोक लगाई गई थी। अब सीमांकन और पिलर स्थापना के बाद इन प्रतिबंधों का पालन और अधिक प्रभावी ढंग से कराया जा सकेगा। अधिसूचना जारी होने से पहले के निर्माण पूरी तरह सुरक्षित हैं। नए निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

    जहां निर्माण, वहां आगे बढ़कर लगाए जाएंगे पिलर
    कुछ स्थानों पर निर्माण हो जाने की वजह से वहां पिलर लगा पाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निर्माण वाली जगह से आगे जहां जगह खाली रहेगी, वहां पिलर लगाए जाएंगे। लेकिन, पिलर पर यह तथ्य स्पष्ट अंकित किया जाएगा कि संबंधित स्थान पर प्रतिबंध का दायरा पीछे कितनी दूरी तक है।

    हाइलाइटर : रामगढ़ताल का दायरा

    • कुल क्षेत्रफल: 742.245 हेक्टेयर
    • ताल (जल क्षेत्र): 529.169 हेक्टेयर
    • राजकीय संपत्ति: 177.325 हेक्टेयर
    • निजी काश्तकार की भूमि: 35.751 हेक्टेयर

    किस जोन में कितना प्रतिबंध

    • 22 जोन में 50 मीटर तक
    • एक जोन में 119 मीटर तक
    • एक जोन में 100.40 मीटर तक
    • तीन जोन में 100 मीटर तक
    • एक जोन में 80 मीटर तक

    शासन की अधिसूचना के अनुरूप पूरे प्रभाव क्षेत्र का वैज्ञानिक चिह्नांकन कराया गया है। सीमा पिलर स्थापित होने के बाद रामगढ़ताल की सुरक्षा और मजबूत होगी। इससे भविष्य में अवैध कब्जों और अनियोजित निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। शहरी वेटलैंड के रूप में रामगढ़ताल का पर्यावरणीय स्वरूप लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।

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    - अभिनव गोपाल, उपाध्यक्ष, जीडीए