गोरखपुर में भी हो सकेगा 'वंदे भारत' के एसी का अनुरक्षण, ग्रीन एनर्जी से चमकेगा पूर्वोत्तर रेलवे
गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने में पूर्वोत्तर रेलवे का पहला सौर ऊर्जा संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' तैयार है। यह केंद्र वंदे भारत और एलएचबी कोचों के एसी क ...और पढ़ें

एनईआर का पहला सौर ऊर्जा से संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' तैयार। जागरण
HighLights
पूर्वोत्तर रेलवे का पहला सौर ऊर्जा संचालित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' तैयार।
वंदे भारत और एलएचबी कोचों के एसी का होगा अत्याधुनिक अनुरक्षण।
यांत्रिक कारखाने को ग्रीनको प्लैटिनम शील्ड से किया सम्मानित।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। सफर में वातानुकूलित कोचों के वातानुकूलन की शिकायत कम होगी। यांत्रिक कारखाना में सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों में लगने वाले लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों के साथ सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत में लगे रूफ माउंटेड पैकेज यूनिट (आरएमपीयू) के वातानुकूलन (एसी) का भी अनुरक्षण हो सकेगा।
इसके लिए कारखाने के इंजीनियरों ने पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) का पहला अत्याधुनिक 'सेंटर आफ एक्सीलेंस' विकसित किया है। खास बात यह है कि 'सेंटर आफ एक्सीलेंस' सौर ऊर्जा (सोलर प्लांट) से संचालित होगा, जिससे तकनीकी उन्नयन के साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।
'सेंटर आफ एक्सीलेंस' में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजीशन (एससएडीए) तकनीक से आरएमपीयू की निगरानी हो सकेगी। यह प्रणाली परीक्षण प्रक्रिया की वास्तविक समय में निगरानी, नियंत्रण और डिजिटल रिकार्ड तैयार करने में सक्षम है। इससे हर आरएमपीयू की तकनीकी स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा तथा संभावित खराबियों का पहले ही पता लगाया जा सकेगा।
आरएमपीयू वातानुकूलित कोचों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी कार्यक्षमता पर यात्रियों को मिलने वाली कूलिंग और यात्रा के दौरान आराम निर्भर करता है। नई परीक्षण व्यवस्था लागू होने से इन इकाइयों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। डिजिटल रिकार्ड उपलब्ध होने से भविष्य में खराबियों के रुझानों का विश्लेषण, अनुरक्षण योजना और गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक एवं पारदर्शी बन सकेगी।
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मुख्य यांत्रिक कारखाना प्रबंधक डा. सुनील कुमार शर्मा बताते हैं कि कारखाने में 1500 किलो वाट के सोलर पैनल लगाए हैं, जिनमें सिर्फ सेंटर आफ एक्सीलेंस को संचालित करने के लिए अलग से 500 किलो वाट के सोलर पैनल स्थापित किए गए हैं।
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यांत्रिक कारखाना ने हरित औद्योगिक विकास और संसाधन दक्षता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के ग्रीन बिजनेस सेंटर की ओर से यांत्रिक कारखाना को प्रतिष्ठित ग्रीनको प्लैटिनम शील्ड से सम्मानित किया गया है।
16 कोच वाली वंदे भारत का पीओएच कर बनाया रिकार्ड
यांत्रिक कारखाना ने सीमित संसाधन व उपकरण में 16 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन की रेक का पीरियाडिक ओवरहालिंग (पीओएच) रिकार्ड समय में पूरा कर भारतीय रेल में नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को रेलवे बोर्ड द्वारा सम्मानित भी किया गया है। कारखाना प्रबंधन ने गोरखपुर में भी वंदे भारत की पीओएच का प्लेटफार्म तैयार कर दिया है। आने वाले दिनों में गोरखपुर में भी वंदे भारत की रेक की पीरियाडिक ओवरहालिंग हो सकेगी।
यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर भारतीय रेल के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने में सफल हुआ है। पूर्वोत्तर रेलवे आधुनिक ट्रेनों के वातानुकूलन सिस्टम के रखरखाव में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा। डिजिटल गुणवत्ता नियंत्रण, सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग और ऊर्जा दक्षता के प्रयासों के चलते कारखाने को प्रतिष्ठित ग्रीनको प्लैटिनम मान्यता भी मिल चुका है।
- सुमित कुमार, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे