नेपाल सीमा से अवैध घुसपैठ भारत के लिए खतरे की घंटी, हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
नेपाल सीमा से अवैध घुसपैठ, खासकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती संख्या, भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गई है। खुफिया इनपुट के बाद उत ...और पढ़ें

भारत के लिए खतरा बनती जा रही नेपाल की खुली सीमा।
HighLights
नेपाल से अवैध घुसपैठ भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती।
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर, निगरानी बढ़ी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नेपाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा अब केवल वहां की आंतरिक राजनीति या सामाजिक बहस तक सीमित नहीं रह गया है। भारत-नेपाल की खुली सीमा के कारण इसकी आंच अब भारतीय सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंचने लगी है।
नेपाल में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती मौजूदगी, संदिग्ध गतिविधियों के खुफिया इनपुट और सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश से सटी भारत-नेपाल सीमा पर पहले की तुलना में कहीं अधिक सतर्कता बरती जा रही है।
दिसंबर 2025 में नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा से मिले खुफिया इनपुट ने एजेंसियों को विशेष रूप से अलर्ट किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि काठमांडू के बुढानीलकंठ और लसुनटार क्षेत्रों में करीब 600 से 700 रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने अस्थायी ठिकाने बना रखे हैं।
आशंका जताई गई थी कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक संदिग्ध वहीं छिपे रहेंगे और बाद में नई पहचान व फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में प्रवेश की कोशिश कर सकते हैं। नेपाल में अवैध घुसपैठ को लेकर स्थानीय संगठनों और राजनीतिक दलों का विरोध लगातार बढ़ रहा है।
खबरें और भी
उनका आरोप है कि अनियंत्रित घुसपैठ से वहां की जनसंख्या संरचना, रोजगार, संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर इसे लेकर आंदोलन और प्रदर्शन भी हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नेपाल में पनप रहे ऐसे नेटवर्क का लाभ भारत में घुसपैठ के लिए भी उठाया जा सकता है।
खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। सीमावर्ती जिलों में एसएसबी, स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त निगरानी बढ़ाई है। पैदल गश्त, नाइट पेट्रोलिंग, तकनीकी निगरानी, स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने और सीमा पार आने-जाने वाले लोगों के दस्तावेजों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जंगलों, ग्रामीण रास्तों और कम निगरानी वाले इलाकों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। वर्ष 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को बिना पासपोर्ट और वीजा के आवागमन की सुविधा मिली है।
यही खुली सीमा दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक है, लेकिन इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर मानव तस्करी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और अन्य आपराधिक नेटवर्क भी सक्रिय रहते हैं। ऐसे में नेपाल में बढ़ती अवैध घुसपैठ अब केवल पड़ोसी देश का विषय नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
गिरफ्तारियां बता रहीं खतरा केवल आशंका नहीं
खतरे के संकेत केवल खुफिया रिपोर्ट तक सीमित नहीं हैं। 11 मार्च 2025 को महराजगंज के निचलौल में बांग्लादेशी नागरिक सैफुल इस्लाम पकड़ा गया था। इससे पहले पांच सितंबर 2024 को गोरखपुर के बरगदवां क्षेत्र से मोहम्मद खुकन मियां और रुबेल अहमद गिरफ्तार किए गए थे।
बीते दो वर्षों में नेपाल सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करते समय बांग्लादेश के अलावा नीदरलैंड, चीन, ईरान, ब्राजील, श्रीलंका, जर्मनी, ब्रिटेन और उज्बेकिस्तान के दो दर्जन से अधिक विदेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं। कुछ मामलों में जासूसी और संदिग्ध गतिविधियों की आशंका भी सामने आई है।