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कुकुर तिहार पर नेपाल से बढ़ी पालतू जानवरों की मांग, गोरखपुर के पेट्स कारोबार को मिली नई रफ्तार

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:20 AM (IST)

गोरखपुर के पेट्स शॉप संचालकों को तिहार पर्व के लिए नेपाल से 900 से अधिक पालतू जानवरों के ऑर्डर मिले ...और पढ़ें

बाएं से पादरी बाजार में डॉग हॉस्टल में रखे हुए श्वान के बच्चे व नेपाल में पहुंचा गोरखपुर से ले जय गया श्वान। जागरण

बाएं से पादरी बाजार में डॉग हॉस्टल में रखे हुए श्वान के बच्चे व नेपाल में पहुंचा गोरखपुर से ले जय गया श्वान। जागरण

HighLights

  1. नेपाल से गोरखपुर को 900 से अधिक पेट्स ऑर्डर मिले।

  2. कुकुर तिहार के लिए कुत्तों-बिल्लियों की विशेष मांग बढ़ी।

  3. चाउ-चाउ, शिटजू, पर्शियन नस्लों की सर्वाधिक डिमांड है।

जितेन्द्र पाण्डेय, गोरखपुर। नेपाल में दीपावली के दूसरे दिन से शुरू होने वाले पांच दिवसीय तिहार पर्व को लेकर गोरखपुर के पेट्स शाप संचालकों का कारोबार बढ़ गया है। नेपाल में कुत्तों की विशेष पूजा के पर्व कुकुर तिहार को देखते हुए वहां से पालतू जानवरों की मांग बढ़ी है। गोरखपुर की एक दर्जन से अधिक पेट्स शाप पर अब तक 400 से अधिक कुत्तों और करीब 500 बिल्लियों के आर्डर मिल चुके हैं। इनमें खासतौर पर विदेशी नस्ल के कुत्तों चाउ-चाउ, शिटजू और बिल्लियों में पर्शियन नस्ल की मांग की जा रही है।

गोल्डेन पेट्स शाप के संचालक मनीष शाह ने बताया कि उन्हें नेपाल से 35 कुत्तों और 60 बिल्लियों का आर्डर मिला है। कुत्तों में चाउ-चाउ, शिटजू, जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर की मांग है। वहीं, बिल्लियों में पर्शियन और हिमालयन नस्ल को पसंद किया जा रहा है।

शाह पेट्स शाप के संचालक मुस्ताक के मुताबिक, उनके यहां 25 कुत्तों और 30 बिल्लियों का आर्डर आया है। पेट्स शाप संचालकों के अनुसार, भुगतान मिलने के बाद पालतू जानवरों को नेपाल सीमा तक पहुंचाया जाता है। वहां खरीदार आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्हें नेपाल ले जाते हैं।

नेपाल में इनकी कीमत अधिक होने के कारण गोरखपुर और देवरिया के जिलों से खरीदारी की जा रही है। जबकि नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर और महराजगंज में चार से पांच पेट्सशाप है, लेकिन उन दुकानों से कुत्तों और बिल्लियों की बिक्री नहीं होती है। नेपाल में तिहार पर्व के दौरान कुकुर तिहार का विशेष महत्व है।

इस दिन कुत्तों को नहलाकर उनके माथे पर टीका लगाया जाता है और फूलों की माला पहनाई जाती है। उन्हें पसंदीदा भोजन भी कराया जाता है। हिंदू मान्यताओं में कुत्तों को यमराज का दूत और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। यही परंपरा इस समय गोरखपुर के पेट्स कारोबार को नई रफ्तार दे रही है।

पंजाब, राजस्थान, हरियाणा से मंगाए जाते है कुत्ते
गोल्डेन पेट्स शाप के संचालक मनीष शाह बताते हैं कि नेपाल से पूरे वर्ष कुत्तों और बिल्लियों की मांग रहती है, लेकिन सामान्य दिनों में महीने में चार से पांच आर्डर ही मिलते हैं। कुकुर तिहार पर मांग कई गुना बढ़ जाती है। कुत्तों में चाउ-चाउ, शिट्जू, जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर, जबकि बिल्लियों में पार्शियन और हिमालयन नस्ल की अधिक मांग है। मांग के अनुसार पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, लखनऊ और पंजाब के लाइसेंसी पेट्स शाप से आर्डर दिया जाता है। वहां से बस और ट्रेन के जरिए दो से तीन दिन में पालतू जानवर गोरखपुर पहुंचते हैं। इसके बाद उन्हें नेपाल सीमा तक पहुंचाया जाता है।

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हास्टल में रखकर होती है देखभाल
बाहर से मंगाए जाने वाले कुत्तों और बिल्लियों को हास्टल में रखकर उनकी देखभाल की जाती है। मांग के अनुसार उन्हें नेपाल भेजा जाता है। हास्टल का प्रतिदिन का खर्च 300 से 500 रुपये आता है। यात्रा और हास्टल का खर्च जोड़ने के बाद चाउ-चाउ की कीमत 30 से 40 हजार, शिट्जू की 15 से 20 हजार, जर्मन शेफर्ड की 15 से 50 हजार और लैब्राडोर की करीब 20 हजार रुपये होती है। वहीं, पर्शियन बिल्ली आठ से 10 हजार और हिमालयन बिल्ली 10 से 15 हजार रुपये में बिकती है।

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