गोरखपुर रामगढ़ताल हादसा: हर हादसे के बाद जागती है व्यवस्था, फिर सब कुछ पहले जैसा
रामगढ़ताल में स्पीड बोट टक्कर से एक पर्यटक की मौत और नौ घायल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं। लगातार हादसों के बावजूद जल पुलिस, प्रशि ...और पढ़ें

रोते बिलखते परिजन। जागरण
HighLights
स्पीड बोट टक्कर में एक पर्यटक की मौत, नौ घायल।
रामगढ़ताल में सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी।
जल पुलिस और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम का अभाव।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रामगढ़ताल को पूर्वांचल का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने पर लगातार काम हुआ, लेकिन उसकी सुरक्षा व्यवस्था उसी रफ्तार से मजबूत नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि हर बड़े हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, कुछ दिन समीक्षा और सख्ती की बातें होती हैं, फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है। रविवार रात स्पीड बोट की टक्कर में कुशीनगर के पर्यटक की मौत और नौ लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर हजारों पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके भरोसे है।
रामगढ़ताल में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 10 से 20 हजार लोग पहुंचते हैं। सुबह मार्निंग वाक करने वालों की भीड़ रहती है, जबकि शाम को नौकायन, क्रूज, रेस्टोरेंट और फूड जोन पर पर्यटकों का जमावड़ा लग जाता है। केवल बोटिंग करने वालों की संख्या ही सामान्य दिनों में 700 से 1000 तक रहती है, जबकि रविवार और छुट्टियों में यह आंकड़ा 1500 से 2000 तक पहुंच जाता है।
इसके बावजूद पांच किलोमीटर से अधिक जलक्षेत्र में न जल पुलिस की नियमित तैनाती है, न प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और न ही मोटरबोट से लगातार निगरानी की व्यवस्था। इससे पहले 22 जुलाई 2025 को दो स्पीड बोटों की टक्कर में एक ही परिवार के तीन लोगों समेत छह लोग घायल हुए थे।
जांच में एक चालक के शराब के नशे में होने की बात सामने आई थी। इसी वर्ष नौ फरवरी को दिग्विजयनाथ पार्क के सामने 36 वर्षीय वंदना पांडेय का शव मिला, जबकि 18 फरवरी को 23 वर्षीय श्रद्धा त्रिपाठी का शव ताल में मिला था। फरवरी 2024 में भी एक अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ था।
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लगातार घटनाओं के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। लंबे समय से चल रही कवायद के बावजूद स्थायी जल पुलिस की तैनाती नहीं हो सकी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और चेतावनी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।
बोट संचालन के लिए स्पीड नियंत्रण, नियमित जांच और चालक की क्षमता की निगरानी कैसे हो रही है? आपात स्थिति में तत्काल बचाव के लिए प्रशिक्षित जल रेस्क्यू टीम और आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था कब होगी? रविवार का हादसा इन सभी सवालों को फिर से सामने ले आया है।