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    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एमएमयूटी दीक्षा समारोह में कहा, डिग्री के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 02:00 PM (IST)

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एमएमयूटी के दीक्षा समारोह में कहा कि विद्यार्थियों को डिग्री के साथ चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ज्ञान तभी ...और पढ़ें

    राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल। जागरण

     राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल। जागरण

    HighLights

    1. विद्यार्थियों को डिग्री के साथ चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए।

    2. विकसित भारत में बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी: राज्यपाल।

    3. विश्वविद्यालयों को जल संरक्षण और सौर ऊर्जा पर कार्य करना चाहिए।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने चरित्र का निर्माण करना भी होना चाहिए। ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग हो। उन्होंने कहा कि आज के युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत हैं और इसमें बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

    एमएमयूटी के 11वें दीक्षा समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष 60 प्रतिशत छात्राओं और 40 प्रतिशत छात्रों ने उपाधियां प्राप्त की हैं। यह आंकड़ा महिला सशक्तीकरण का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एक ओर बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश का भविष्य संवार रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ महिलाएं अपराधों के कारण जेलों में भी हैं। इस विषय पर विश्वविद्यालयों में गंभीर चर्चा होनी चाहिए, ताकि युवाओं में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़े।

    उन्होंने कहा कि बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी आवश्यक कौशल सीखने चाहिए, जिससे वे विकसित भारत के निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी से छोटा कार्य भी करता है तो उसकी सराहना होनी चाहिए।

    राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और सौर ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग की दिशा में ठोस कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह सभी विश्वविद्यालयों से इस संबंध में किए गए कार्यों की जानकारी लेंगी और अपेक्षा करेंगी कि परिसर पर्यावरण संरक्षण के मॉडल बनें।

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    उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां विशेष अभियान चलाकर उन्हें नशामुक्त गांव बनाया जाए। यदि गांव नशामुक्त होंगे तो आने वाली कई पीढ़ियां सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सकेंगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

    राज्यपाल ने समारोह में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन विद्यालयों के शिक्षकों ने ऐसी प्रेरक कहानियां खोजकर प्रस्तुत की हैं, जिनमें से कई उन्होंने स्वयं भी पहली बार सुनीं। उन्होंने घोषणा की कि इन कहानियों को संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया जाएगा और सभी विद्यालयों में वितरित किया जाएगा।

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    उन्होंने कहा कि आज जितनी प्रतिभा प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों में दिखाई दे रही है, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। यदि इन बच्चों को समय पर उचित मंच और अवसर मिलता रहा तो भविष्य में यही बच्चे वैज्ञानिक, शिक्षक, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के सफल नेतृत्वकर्ता बनकर विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।