एमएमयूटी दीक्षा समारोह में विकास कौशल ने छात्रों को दिया मंत्र, बोले- डिग्री मंजिल नहीं, आजीवन सीखने का पासपोर्ट है
एमएमयूटी के दीक्षा समारोह में विकास कौशल ने छात्रों से कहा कि डिग्री शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि आजीवन सीखने का पासपोर्ट है। उन्होंने विद्यार्थि ...और पढ़ें

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल। जागरण
HighLights
डिग्री शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं, आजीवन सीखने का पासपोर्ट।
जिज्ञासा, ईमानदारी और बदलाव अपनाने का साहस सफलता की कुंजी।
सफलता का पैमाना समाज के प्रति योगदान होना चाहिए।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमयूटी) के 11वें दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री शिक्षा का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि जीवनभर सीखते रहने का पासपोर्ट है। तेजी से बदलती दुनिया में वही आगे बढ़ेगा, जो जिज्ञासु रहेगा, बदलाव को स्वीकार करेगा और अपनी सफलता को समाज के हित से जोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल सफल पेशेवर नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करते हैं। एमएमयूटी ने पिछले छह दशकों में हजारों इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और प्रबंधक तैयार कर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विकास कौशल ने कहा कि आज का दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसी तकनीकों के कारण अभूतपूर्व परिवर्तन का समय है। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक परिस्थितियां भी नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। ऐसे समय में युवा केवल परिवर्तन के साक्षी नहीं बनेंगे, बल्कि उसका नेतृत्व करेंगे।
भविष्य में कोई नई कंपनियां खड़ी करेगा, कोई नई तकनीकों का आविष्कार करेगा, कोई वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, उद्यमी, प्रशासक या उद्योग जगत का नेतृत्व करेगा। प्रत्येक भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया को प्रसिद्ध लोगों से अधिक जिम्मेदार लोगों की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों को सफल और सार्थक जीवन के लिए पांच महत्वपूर्ण सीख देते हुए कहा कि पहला, जिज्ञासा और सीखने का जुनून। उन्होंने कहा कि सीखना कभी नहीं रुकना चाहिए। जिस दिन सीखना बंद होगा, उसी दिन आगे बढ़ना भी रुक जाएगा।
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दूसरा, ईमानदारी और कार्य नैतिकता। उनके अनुसार ज्ञान अवसर दिला सकता है, प्रतिभा पहचान दिला सकती है, लेकिन विश्वास केवल ईमानदारी से अर्जित होता है और यही किसी भी सफल करियर की मजबूत नींव है।
तीसरा, बदलाव को अपनाने का साहस। उन्होंने कहा कि जीवन के बड़े अवसर अक्सर चुनौतियों के रूप में सामने आते हैं। अनिश्चितता से घबराने के बजाय उसका स्वागत करना चाहिए।
चौथा, मानवीय संवेदनाओं को कभी न खोना। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए, लेकिन करुणा, ईमानदारी, सहानुभूति और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत रहेगी।
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पांचवां, सफलता का पैमाना केवल उपलब्धियां नहीं, बल्कि समाज के प्रति योगदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंत में लोग यह याद नहीं रखते कि आपने कितने पद संभाले, बल्कि यह याद रखते हैं कि आपने कितने लोगों का जीवन बेहतर बनाया और समाज पर कितना सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।
उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, स्वतंत्र सोच विकसित करने, निर्भीक होकर प्रश्न पूछने, नैतिकता के साथ कार्य करने और विनम्र नेतृत्व अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा विशेषाधिकार केवल सफल होना नहीं, बल्कि अपनी सफलता को दूसरों की सेवा में लगाना है।