हमीरपुर पुल हादसे का रूह कंपाने वाला खौफनाक मंजर, भारी भरकम स्लैब में दबे रहे शव, उजड़ गए 6 हंसते-खेलते परिवार
Hamirpur Bridge Collapse: हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल गिरने से छह मजदूरों की मौत हो गई, जिससे उनके परिवार उजड़ गए। हादसा रात 12:30 बजे हु ...और पढ़ें
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पोस्टमार्टम हाउस में रोती बिलखती मृतक गार्ड राजेश पाल की पत्नी अनीता व अन्य स्वजन। जागरण
HighLights
हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल गिरने से छह मजदूरों की मौत
रात में हुए हादसे में कई परिवार हुए तबाह, चीख-पुकार
पुल की गुणवत्ता और निर्माण मानकों पर उठे गंभीर सवाल
जागरण संवाददाता, हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में गिरे निर्माणाधीन पुल का खौफनाक मंजर रूह कंपा देने वाला है। रात साढ़े 12 बजे गिरे पुल के मलबे में सुबह तक दो गार्डों समेत छह लोगों के शव दबे रहे। हंसते खेलते छह परिवार उजड़ गए। परिवारवालों की चीख पुकार से घटनास्थल पर मौजूद हर किसी का कलेजा कांप उठा।
मोराकांदर गांव के पास बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल गुरूवार की रात साढ़े 12 बजे गिर गया। पुल की सटरिंग, स्लैब और कोठी भरभराकर गिर गई, जिसके नीचे काम कर रहे मजदूर जिंदा दफन हो गए। हादसे में अब तक छह मजदूरों की मौत की मौत हुई जबकि तीन मजदूर बाल बाल बचे।
घर में सबसे छोटा व अविवाहित था लोकेंद्र
बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल हादसे में जनपद बांदा के चिल्ला गांव निवासी राधेश्याम निषाद का 22 वर्षीय पुत्र लोकेंद्र परिवार में तीन भाइयों में सबसे छोटा था। पिता राधेश्याम ने बताया कि उसके तीनों बेटे मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जिसमें बड़े बेटे पुष्पेंद्र व पुष्पराज गांव में ही मजदूरी करते हैं। लोकेंद्र की शादी नहीं हुई थी। वह बीते फरवरी माह में मजदूरी करने यहां आया था। सूचना पर हमीरपुर पहुंचे स्वजन बेहाल है।
पांच भाइयों में चौथे नंबर का था कुलदीप
बांदा जिले के चिल्ला गांव निवासी 20 वर्षीय कुलदीप निषाद पुत्र प्रेमचंद्र निषाद नौ फरवरी को मोराकांदर परसनी में बेतवा नदी में बन रहे पुल में मजदूरी करने के लिए भूरागढ़ निवासी सुपरवाइजर जय सिंह के कहने पर आया था। मृतक कुलदीप पांच भाइयों में चौथे नंबर का था। वह अविवाहित था सुपरवाइजर जय सिंह ने बताया कि कुलदीप के गांव से सात आठ लोग काम करने आये थे। कुलदीप के भाई दिलीप, छोटे, संदीप व पंकज भी परिवार की स्थिति अच्छी न होने के कारण मजदूरी कर भरण पोषण करते हैं।
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दो भाई व सात बहन थे सावंत यादव
बांदा के थाना मटौंध क्षेत्र के भूरागढ़ गांव निवासी सोबरन सिंह यादव का 30 वर्षीय पुत्र गंगाचरण उर्फ सावंत यादव मजदूरी करने के लिये बांदा से हमीरपुर आया था। दूसरा भाई राजीव यादव भी बाहर रहकर मजदूरी करता है। सात बहनों की शादी होने के कारण घर पर मां विमला व पिता सोबरन अकेले रहते हैं। घटना की सूचना पर मां व पिता रो रोककर बेहाल है।
तीन दिन पूर्व काम पर आया था सभाजीत यादव
बांदा के थाना मटौंध क्षेत्र के भूरागढ़ गांव 20 वर्षीय सभाजीत यादव पुत्र नीलकंठ यादव अपने घर से बीती 26 मई को ही काम पर आया था। बीती रात उसकी यह तीसरी ड्यूटी थी। वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। जो परिवार की स्थिति को देखते हुये अपने पिता का हांथ बंटाने के लिये मजदूरी करता था। पिता ने बताया कि उसके दो छोटे भाई अमन व अमित व मां शोभा सहित हादसे की जानकारी मिली तो स्वजन रो रोककर बेहाल है।
अकेला कमाने वाला था राजेश,चार बेटियों की थी जिम्मेदारी
ललपुरा थाना क्षेत्र के बहदीना अछपुरा गांव निवासी 42 वर्षीय राजेश पाल पुत्र सभाजीत पाल मोराकांदर गांव में बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल में करीब एक वर्ष से गार्ड की नौकरी कर रहा था। गुरुवार की रात भी वह ड्यूटी पर था। मृतक दो भाई थे छोटे भाई अवधेश ने बताया कि राजेश की चार बेटी 18 वर्षीय शिवानी, 16 वर्षीय रेखा, 14 वर्षीय पिंकी व 12 वर्षीय प्रियांशी है। जो अभी पढ़ रही है उसके पास जमीन न होने से मजदूरी करके ही परिवार का भरण पोषण करता था। उसकी पत्नी अनीता, मां कल्ली व बेटियों का रो रोकर बेहाल है।
भाई के साथ गनमैन था पुष्पेंद्र
ललपुरा थाना क्षेत्र के स्वासा खुर्द गांव निवासी 34 वर्षीय पुष्पेंद्र पुत्र राजेंद्र सिंह गार्ड की ड्यूटी करता थे। मृतक के पिता ने वह दोनों बेटे बालेंद्र व पुष्पेंद्र के साथ गार्ड की ड्यूटी करते थे। पिता राजेंद्र ने बताया कि गुरुवार की रात पुष्पेंद्र बंदूक के साथ गार्ड की ड्यूटी पर था। और इस दुर्घटना में उसकी जान चली गयी। छोटा बेटा रावेंद्र दिल्ली में काम करता है। तथा बड़े व छोटे बेटे की शादी हो गयी थी। तथा छोटे बेटे रावेंद्र ने ही मंझले भाई पुष्पेंद्र की शादी तय करा दी थी। लेकिन शादी की तिथि तय नहीं हुई थी।