हमीरपुर में जांच के इंतजार में चार घंटे फंदे पर लटका रहा महिला का शव, पुलिस देती रही पहरा
हमीरपुर के हेलापुर गांव में एक महिला फंदे से लटकी मिली, लेकिन पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के इंतजार में शव को चार घंटे तक नहीं उतारा, जिससे परिजनों ने जान ब ...और पढ़ें

रोते बिलखते परिजन। जागरण
HighLights
हमीरपुर में महिला का शव चार घंटे तक फंदे पर लटका रहा।
पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के इंतजार में शव नहीं उतारा।
परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने से जान जाने का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, हमीरपुर। पुलिस की अमानवीयता कहें या लापरवाही। हेलापुर गांव में शनिवार को कमरे में महिला फंदे से लटक गई। पुलिस 15 मिनट में पहुंच गई, लेकिन फारेंसिक टीम के इंतजार में महिला को चार घंटे बाद फंदे से उतारा जा सका। अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने इसे आत्महत्या बताया है। महिला के पिता का कहना है कि पुलिस ने खुद से ही मान लिया कि मौत हो गई, जबकि उसे अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद जान बच जाती। परिवार के अन्य लोगों का आरोप है कि सिपाही किसी को कमरे में नहीं जाने दे रहे थे।
पुलिस की दलील है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रविधान के अनुसार सात साल से ज्यादा की सजा वाले मामलों में घटना के समय फारेंसिक जांच जरूरी है, जबकि फारेंसिक के जानकार बताते हैं कि आत्महत्या के मामलों में अगर हत्या का आरोप नहीं लग रहा तो शव फंदे से उतारा जा सकता है।
मामला हमीरपुर सदर क्षेत्र का है। नरेश कुशवाहा की पहली पत्नी की 2013 में मृत्यु हो चुकी है। नरेश ने 2015 में बांदा निवासी कल्लू की बेटी गुड़िया से दूसरी शादी की थी। नरेश काम पर गए थे तो छोटी बेटी व बेटा स्कूल। घर में पत्नी और बड़ी बेटी मोहिनी थी। दोपहर करीब पौने 12 बजे बेटी ने फोन कर बताया कि मां ने फंदा लगा लिया। उसने यूपी-112 को भी बताया। पुलिस करीब 12 बजे पहुंच गई।
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फारेंसिक टीम को बताया गया तो पता चला कि टीम जरिया क्षेत्र में दुष्कर्म के मामले की जांच करने जा रही है। दोनों घटनास्थल के बीच 150 किमी की दूरी है। टीम ने पहले वहां जांच की फिर हेलापुर पहुंची। चार बजे शव उतारा गया।
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एएसपी ने बताया कि एक ही फील्ड यूनिट की टीम है। इससे समस्या हो रही है। अधिवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि महिला को अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। डाक्टर की पुष्टि के बाद ही किसी को मृत माना जा सकता है।
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस प्रजापति ने बताया कि किसी व्यक्ति की मौत फंदे से तय होती है। फंदा ढीला होने की स्थिति में मृत्यु में पांच से सात मिनट लगते हैं। समय से अस्पताल पहुंचाने पर जान बचाई जा सकती है।