रास्ता भटकने और मेडिकल इमरजेंसी से हर सुविधा तक, कांवड़ियों को पहली बार एक स्कैन पर मिलेगी मदद
UP Kanwar Yatra QR Code: हापुड़ पुलिस ने कांवड़ यात्रा के लिए एक डिजिटल क्यूआर कोड प्रणाली शुरू की है, जो प्रदेश में पहली बार लागू की जा रही है। इससे ...और पढ़ें
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HighLights
हापुड़ पुलिस ने कांवड़ यात्रा के लिए क्यूआर कोड प्रणाली शुरू की।
श्रद्धालुओं को चिकित्सा, पुलिस, आपातकालीन सेवाओं की त्वरित जानकारी मिलेगी।
यह डिजिटल पहल यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में सहायक होगी।
केशव त्यागी, हापुड़। UP Kanwar Yatra QR Code: इस बार सावन की कांवड़ यात्रा में यदि कोई श्रद्धालु रास्ता भटक जाए, अचानक तबीयत बिगड़ जाए, किसी हादसे का शिकार हो जाए या पुलिस और प्रशासन से तुरंत संपर्क करना हो तो उसे इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बस मोबाइल निकालिए, सामने लगे क्यूआर कोड को स्कैन कीजिए और पल भर में पूरी व्यवस्था आपकी स्क्रीन पर होगी। हापुड़ जिला पुलिस ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम और तकनीक से जोड़ने के लिए प्रदेश में पहली बार ऐसी डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।
पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान करीब 20 से 25 लाख श्रद्धालु दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और आसपास के जिलों से होकर हापुड़ के विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं।
कांवड़ियों को हर मदद मिलेगी
भीड़ बढ़ने के साथ कई बार कांवड़ियों को अस्पताल, एंबुलेंस, पुलिस अधिकारियों या सेवा शिविरों की जानकारी नहीं मिल पाती। इसी समस्या को देखते हुए पुलिस ने एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया है, जहां यात्रा से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी एक ही क्यूआर कोड में उपलब्ध होगी।
इस योजना के तहत जिले के सभी प्रमुख चार कांवड़ मार्गों, सेवा शिविरों, आठ मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख चौराहों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। श्रद्धालु अपने मोबाइल से कोड स्कैन करते ही संबंधित वेबसाइट या डिजिटल पेज पर पहुंच जाएंगे, जहां उन्हें प्रशासन और पुलिस की सभी जरूरी सेवाओं की जानकारी मिलेगी।
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इस क्यूआर कोड में केवल हेल्पलाइन नंबर ही नहीं, बल्कि पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध होंगे। किसी भी समस्या की स्थिति में श्रद्धालु सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क कर सकेंगे।
आपात स्थिति में तत्काल मिलेगी मदद
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति को देखते हुए सरकारी और निजी अस्पतालों, चिकित्सकों, एंबुलेंस सेवाओं तथा फायर सर्विस के नंबर भी इसमें शामिल किए गए हैं। यदि कहीं मार्ग पर पेड़ गिर जाए, सड़क अवरुद्ध हो जाए या किसी भारी वाहन को हटाने की जरूरत पड़े तो बुलडोजर संचालकों के संपर्क नंबर भी आसानी से मिल जाएंगे।
इतना ही नहीं, जिले के प्रमुख मंदिरों की जानकारी, कांवड़ सेवा शिविरों के संचालकों, प्रबंधकों और पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर भी क्यूआर कोड में उपलब्ध रहेंगे। इससे श्रद्धालु भोजन, विश्राम, चिकित्सा या अन्य सुविधाओं के लिए सीधे संबंधित सेवा शिविर से संपर्क कर सकेंगे।
यह व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराएगी, बल्कि अफवाहों पर रोक लगाने, सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज करने और आपातकालीन स्थिति में रिस्पांस टाइम कम करने में भी मददगार साबित होगी।
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मिलेगी ये सुविधाएं
- मुख्य चार कांवड़ मार्गों का पूरा रूट मैप।
- कंट्रोल रूम, एसपी, सेक्टर, सब-सेक्टर, थानेदार और अन्य अधिकारियों के नंबर।
- सीएचसी, पीएचसी व निजी अस्पतालों की जानकारी।
- एंबुलेंस, चिकित्सकों और फायर सर्विस के नंबर।
- बुलडोजर संचालकों के संपर्क नंबर।
- आठ प्रमुख मंदिरों और सेवा शिविरों का विवरण व नंबर।
- अन्य आवश्यक हेल्पलाइन और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी।