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    पनीर नहीं जहर! खतरनाक केमिकल से हो रहा तैयार, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी; ढाबों से बड़े होटलों तक सप्लाई

    Updated: Sun, 24 May 2026 12:24 PM (IST)

    हापुड़ और आसपास के जिलों में मिलावटी पनीर का कारोबार तेजी से फैल रहा है, जो गलियों से लेकर फाइव स्टार होटलों तक पहुंच रहा है। ...और पढ़ें

    खतरनाक रसायनों से नकली पनीर तैयार किया जा रहा है। प्रतीकात्मक तस्वीर

    खतरनाक रसायनों से नकली पनीर तैयार किया जा रहा है। प्रतीकात्मक तस्वीर

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    ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। हापुड़ और आसपास के जिलों में मिलावटी पनीर का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। स्थिति यह है कि गलियों, छोटे मकानों और बंद कमरों में तैयार हो रहा नकली पनीर अब छोटे ढाबों से लेकर बड़े होटलों और फाइव स्टार प्रतिष्ठानों तक पहुंच रहा है।

    मेरठ में हाल ही में पकड़े गए मिलावटी पनीर के मामले के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। जांच में इस पूरे नेटवर्क का हापुड़ कनेक्शन सामने आने के बाद विभाग ने निगरानी और जांच तेज कर दी है।

    खूब हो रही मिलावटी पनीर की सप्लाई

    शुरुआती जांच में सामने आया कि नकली पनीर तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कई केमिकल और अन्य सामग्री की सप्लाई हापुड़ से की जा रही थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, हाईवे किनारे संचालित ढाबों, छोटे होटलों और बड़े कैटरिंग नेटवर्क तक इस मिलावटी पनीर की सप्लाई हो रही है।

    बरेली से पानीपत तक और दिल्ली से कानपुर तक कई स्थानों पर हापुड़ व अमरोहा क्षेत्र से पनीर भेजे जाने की जानकारी मिली है। छह महीने में मिलावटी व नकली पनीर के 29 बड़े वाहन पकड़े गए हैं। जिनमें से ज्यादातर का पनीर नष्ट कराना पड़ा है।

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    खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा

    खाद्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि नकली पनीर को असली जैसा रंग, स्वाद और वजन देने के लिए कई खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें कास्टिक सोड़ा फ्लैक्स, रिफाइंड सोया आयल, विंगर एसिड, स्टार्च पावडर, रानीपाल लिक्विड और हाईड्रोजन-पर-आक्साइड जैसे केमिकल शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी चेतावनी 

    विशेषज्ञों का कहना है कि इन पदार्थों के प्रयोग से पनीर देखने में ताजा और मुलायम लगता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ऐसे मिलावटी पनीर का सेवन करने से पेट संबंधी संक्रमण, लीवर और किडनी की बीमारी, फूड प्वाइजनिंग और पाचन तंत्र की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक खतरनाक माना जा रहा है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग अब हापुड़ के गोदामों, डेयरियों और केमिकल कारोबारियों के रिकार्ड खंगाल रहा है। कई सप्लायरों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बड़े स्तर पर सैंपलिंग अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    कास्टिक सोडा - यह पनीर को असली जैसा गाढ़ा, सफेद और सख्त बनावट (texture) देने में मदद करता है। इसके अलावा, यह सिंथेटिक सामग्री को आपस में जोड़ने और पनीर की शेल्फ लाइफ (सड़ने से बचाने) को बढ़ाने के लिए भी मिलाया जाता है।

    रिफाइंड सोया आयल - स्किम्ड मिल्क (कम फैट वाले दूध) में जब तेल मिलाया जाता है, तो उससे सामान्य से अधिक मात्रा में पनीर तैयार होता है, जिससे मुनाफा बढ़ता है।

    विंगर एसिड - विनेगर से बना पनीर सख्त (Firm) होता है, जिसे आसानी से काटा या तला जा सकता है, जो अक्सर बाजार में मिलने वाले पनीर की विशेषता है।

    स्टार्च पावडर - नकली पनीर बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है। इससे पनीर का वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।

    रानीपाल लिक्विड - रानीपाल का प्रयोग नकली पनीर को असली जैसा सफेद और चमकदार दिखाने के लिए किया जाता है ताकि वह ग्राहकों को फ्रेश लगे।

    हाईड्रोजन परआक्साइड - इससे रानीपाल पूरे पनीर में एकसमान रूप से फैल जाता है। जिससे धब्बे दिखाई नहीं देते । वहीं इसके कारण पनीर लंबे समय तक खराब नहीं होता है।

    यह भी पढ़ें- मेरठ के नकली पनीर का हापुड़ कनेक्शन, यहीं से भेजे जाते थे केमिकल; दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में थी सप्लाई

    मिलावटी पनीर बनाने का धंधा बड़े जाेरों से चल रहा है। इनके लिए केमिकल की सप्लाई भी आसपास के राज्यों-जिलों में हापुड़ से की जा रही है। इसके लिए टीम छापामारी कर रही हैं। हमने तारा मार्केट की हरीश कुमार-रविंद्र कुमार केमिकल फर्म से सेल-परचेज का रिकार्ड तलब किया है। वह हमारे शक के दायरे में हैं।
    - सुनील कुमार - उउपायुक्त - खाद्य सुरक्षा