हर थाने पर 5 और आरटीओ को 20 हजार, आराम से पार हो रहीं डग्गामार बसें; हापुड़ में कैसे चल रहा 'खेल'
हापुड़ सहित पश्चिमी यूपी में डग्गामार बसों के वर्चस्व को लेकर हिंसक संघर्ष छिड़ गया है, जिसमें NH-9 पर फायरिंग और मारपीट हुई। इस घटना ने अवैध बसों के ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, हापुड़। हापुड़ सहित वेस्ट यूपी में डग्गामार बसों के कारोबार पर कब्जे की जंग अब खुले संघर्ष का रूप लेने लगी है। पुलिस और परिवहन विभाग की कथित मिलीभगत से बेखौफ दौड़ रही अवैध बसों के नेटवर्क ने सोमवार रात एनएच-9 पर जमकर हंगामा मचाया।
सवारी उठाने के वर्चस्व को लेकर दो बस संचालक गुट आमने-सामने आ गए। पहले पिलखुवा के निजामपुर और फिर देहात क्षेत्र में फायरिंग, मारपीट और बस में घुसकर हमला हुआ।
यात्रियों के सामने हुई इस वारदात ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उस संरक्षण तंत्र को भी कटघरे में ला दिया है, जिसके दम पर दिल्ली से मुरादाबाद, बरेली, मेरठ, अलीगढ़, आगरा और सहारनपुर तक डग्गामार बसों का कथित ''महीना सिस्टम'' वर्षों से बेधड़क चल रहा है।
छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई
सवाल यह है कि जब बिना परमिट बसें खुलेआम सवारियां भर रही हैं तो आखिर उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है? परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों का दावा है कि दिल्ली, मेरठ, हापुड़, गजरौला, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, आगरा और सहारनपुर तक चलने वाली डग्गामार बसों के संचालन के पीछे कथित तौर पर एक संगठित 'महीना सिस्टम' काम करता है।
आरोप है कि इस नेटवर्क में हर जिले के संबंधित थानों और परिवहन विभाग तक नियमित धनराशि पहुंचाई जाती है, जिसके बाद कार्रवाई का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।
बताया जाता है कि बिना वैध परमिट संचालित बसें राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख बस स्टैंडों के आसपास खुलेआम सवारियां भरती हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ वैध परमिट लेकर टैक्स जमा करने वाले बस संचालकों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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वहीं, कई परमिटधारी संचालकों का कहना है कि नियमों का पालन करने वालों की बसें खाली चलती हैं, जबकि अवैध बसें मनमाने ढंग से सवारियां उठाकर मोटी कमाई कर रही हैं।
फायरिंग जैसी घटनाएं सामने आ चुकीं
जानकारों का कहना है कि पिछले एक वर्ष में डग्गामार बसों के संचालन और सवारी उठाने को लेकर हापुड़ क्षेत्र में पांच से अधिक बार विवाद, मारपीट और फायरिंग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद अवैध संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। समय-समय पर परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बिना परमिट बसों की नियमित जांच, जब्ती और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
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वहीं, सोमवार की घटना के बाद यह मांग भी तेज हो गई है कि केवल हमलावरों पर कार्रवाई करने के बजाय उस पूरे तंत्र की भी निष्पक्ष जांच हो, जिसकी वजह से डग्गामार बसों का नेटवर्क वर्षों से बेखौफ संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों के लिए यह अब गंभीर चुनौती बन चुकी है।
कई राज्यों और जिलों से बसों का अवैध संचालन किया जा रहा है। यह बस हापुड़ से होकर आवागमन करती हैं। समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पुलिस और आरटीओ के नाम पर इनसे वसूली कौन कर रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। विभाग से इनको किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त नहीं है। हम रणनीति तैयार करके इनके खिलाफ अभियान चलाएंगे। - रमेश कुमार चौबे, एआरटीओ, प्रवर्तन