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    अब थाने में बैठकर नहीं होगा पुलिस वेरिफिकेशन, GPS ऑन किए बिना एक्सेप्ट नहीं करेगा सिस्टम

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:37 AM (IST)

    पुलिस विभाग ने संदिग्धों और आरोपितों के सत्यापन के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है, जिसमें पुलिसकर्मियों को मौके पर मोबाइल का जीपीएस ऑन करके ही सत्य ...और पढ़ें

    पहले किसी जांच के दौरान यह साबित करना मुश्किल होता था कि पुलिसकर्मी वास्तव में सत्यापन स्थल पर गए थे या नहीं। एआई इमेज

    पहले किसी जांच के दौरान यह साबित करना मुश्किल होता था कि पुलिसकर्मी वास्तव में सत्यापन स्थल पर गए थे या नहीं। एआई इमेज

    HighLights

    1. सत्यापन के लिए मौके पर जीपीएस ऑन करना अनिवार्य।

    2. फर्जी सत्यापन पर रोक, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

    3. संदिग्धों के फोटो, आवास की लोकेशन ऑनलाइन दर्ज।

    ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। संदिग्धों और आरोपितों के सत्यापन में अब पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी तय होगी। पुलिस विभाग की नई डिजिटल व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मियों को मौके पर पहुंचकर मोबाइल की लोकेशन ऑन करके ही सत्यापन करना होगा।

    कागजी खानापूर्ती पर प्रभावी रोक लगेगी

    सत्यापन के दौरान फोटो, आवास की लोकेशन और अन्य जरूरी विवरण आनलाइन दर्ज किए जाएंगे, जिससे थाने या चौकी पर बैठकर मनमाने ढंग से सत्यापन करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। इससे फर्जी सत्यापन की संभावना कम होगी, रिकाॅर्ड अधिक विश्वसनीय बनेगा और जांच व अपराध नियंत्रण में पुलिस को बेहतर सहायता मिलेगी। संदिग्धों और आरोपितों के सत्यापन की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी। सत्यापन के दौरान फोटो, आवास की लोकेशन और अन्य विवरण आनलाइन दर्ज किए जाएंगे, जिससे फर्जी सत्यापन और कागजी खानापूर्ती पर प्रभावी रोक लगेगी।

    सत्यापन का पुराना तरीका से परेशानी

    अब तक कई मामलों में सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानी जाती थी। आरोप लगते रहे कि कुछ मामलों में पुलिसकर्मी थाने या चौकी पर बैठकर ही कागजी औपचारिकताएं पूरी कर देते थे। मौके पर पहुंचे बिना रिपोर्ट तैयार होने से रिकाॅर्ड की प्रमाणिकता पर सवाल उठते थे। कई बार संदिग्ध का वास्तविक पता, निवास की स्थिति और पहचान का सही सत्यापन नहीं हो पाता था, जिससे जांच प्रभावित होती थी और अपराधियों को भी इसका लाभ मिल जाता था। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना भी मुश्किल होता था क्योंकि यह प्रमाण नहीं होता था कि पुलिसकर्मी वास्तव में मौके पर पहुंचे थे या नहीं।

    नए सत्यापन का तरीका और इससे होने वाले लाभ

    नई व्यवस्था में पुलिसकर्मियों को सत्यापन के समय मोबाइल की जीपीएस लोकेशन आन रखना अनिवार्य होगा। निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बाद ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी। मौके पर संदिग्ध या आरोपित का फोटो, आवास का फोटो, लोकेशन और अन्य आवश्यक जानकारी आनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।

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    पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकाॅर्ड के रूप में सुरक्षित रहेगी, जिससे प्रत्येक सत्यापन की निगरानी संभव होगी। इस व्यवस्था से फर्जी या मनमाने सत्यापन पर अंकुश लगेगा। पुलिस अधिकारियों को भी यह पता रहेगा कि सत्यापन वास्तव में मौके पर जाकर किया गया है।

    भविष्य में किसी भी जांच, अपराध की पड़ताल या संदिग्ध की गतिविधियों की निगरानी के दौरान यह डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम आएगा। साथ ही पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी और सत्यापन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बनेगी।

    क्यों थी इस बदलाव की जरूरत?

    • कई मामलों में बिना मौके पर पहुंचे सत्यापन पूरा किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं।
    • कागजी खानापूरी और फर्जी सत्यापन की संभावना बनी रहती थी, जिससे रिकाॅर्ड की विश्वसनीयता प्रभावित होती थी।
    • अपराधियों और संदिग्धों के सही पते व पहचान का प्रमाणिक रिकाॅर्ड तैयार करने में कठिनाई होती थी।
    • किसी जांच के दौरान यह साबित करना मुश्किल होता था कि पुलिसकर्मी वास्तव में सत्यापन स्थल पर गए थे या नहीं।
    • डिजिटल साक्ष्य और जीपीएस आधारित निगरानी से पुलिसकर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
    • अपराध नियंत्रण, जांच की गुणवत्ता और भविष्य में संदिग्धों की ट्रैकिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई।

    "नई प्रक्रिया से दोहरा लाभ होगा। एक ओर जहां पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचेंगे तथा हर हाल में सही सत्यापन होगा। वहीं पुलिसकर्मी संदिग्धों आरोपितों का फोटाे लेने के साथ ही उनके आवास की लोकेशन भी आ जाएगी। उसको पुलिस के डिजिटल रिकाॅर्ड में शामिल कर लिया जाएगा। इस नई प्रक्रिया पर कार्य आरंभ कर दिया गया है।"

    -कुंवर ज्ञानंजय सिंह, पुलिस अधीक्षक, हापुड़।

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