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    Kanwar Yatra 2026: कांवड़ियों के लिए गुड न्यूज, अब नहीं पूछना पड़ेगा रास्ता; QR कोड बताएगा सही राह

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 11:03 AM (IST)

    Kanwar Yatra 2026 : हापुड़ पुलिस कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। यह प्रणा ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

    सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated

    HighLights

    1. कांवड़ यात्रा के लिए हापुड़ पुलिस की नई डिजिटल पहल।

    2. क्यूआर कोड से मिलेगी रियल-टाइम मार्ग और डायवर्जन जानकारी।

    3. श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को यातायात में मिलेगी सुविधा।

    केशव त्यागी, हापुड़। Kanwar Yatra 2026 : कांवड़ यात्रा के दौरान अब श्रद्धालुओं को रास्ता पूछने के लिए पुलिस चौकी या पिकेट पर रुकना नहीं पड़ेगा। न ही डायवर्जन की जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना होगा।

    जेब से मोबाइल निकालिए, क्यूआर कोड स्कैन कीजिए और कुछ ही सेकंड में आपके सामने यह जानकारी होगी कि कौन-सा मार्ग खुला है, किस रास्ते पर डायवर्जन लागू है और गंतव्य तक पहुंचने के लिए कौन-सा वैकल्पिक मार्ग सबसे बेहतर रहेगा। हापुड़ पुलिस पहली बार कांवड़ यात्रा में यह डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है।

    Kanwar Yatra

    लाखों श्रद्धालुओं को होगा फायदा

    हर साल हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लेकर लाखों शिवभक्त हापुड़ होकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान जिले से करीब 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से आने वाले कांवड़ियों की वजह से हाईवे और शहर के प्रमुख मार्गों पर कई दिनों तक भारी दबाव बना रहता है।

    भीड़ बढ़ने पर पुलिस को समय-समय पर यातायात व्यवस्था में बदलाव और डायवर्जन लागू करना पड़ता है। ऐसे में बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु और स्थानीय वाहन चालक अक्सर सही मार्ग की जानकारी के अभाव में परेशान हो जाते हैं। इसी समस्या का समाधान करने के लिए इस बार तकनीक का सहारा लिया है।

    जिले के 35 प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। इनमें पुलिस पिकेट, हाइवे के महत्वपूर्ण कट, कांवड़ शिविर, प्रमुख शिवालय और ऐसे स्थान शामिल होंगे, जहां से श्रद्धालुओं और आम लोगों की अधिक आवाजाही रहती है। इन स्थानों पर लगे क्यूआर कोड को कोई भी स्मार्टफोन उपयोगकर्ता आसानी से स्कैन कर सकेगा।

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    रियल टाइम मिलेगी अपडेट

    यदि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी मार्ग पर अचानक भीड़ बढ़ने, सुरक्षा कारणों या किसी अन्य वजह से डायवर्जन लागू किया जाता है तो उसकी जानकारी तत्काल डिजिटल प्लेटफार्म पर अपडेट कर दी जाएगी। श्रद्धालुओं को रियल टाइम में यह पता चल जाएगा कि कौन-सा रास्ता बंद है, किस मार्ग से आवागमन जारी है और उन्हें किस वैकल्पिक मार्ग से आगे बढ़ना चाहिए। इससे बार-बार पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।

    स्थानीय लोगों को भी मिलेगा लाभ

    क्यूआर कोड की सुविधा केवल कांवड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी। शहर के स्थानीय नागरिक, व्यापारी और अन्य वाहन चालक भी इसका लाभ उठा सकेंगे। वह घर से निकलने से पहले या रास्ते में क्यूआर कोड स्कैन कर यह जान सकेंगे कि किस मार्ग पर यातायात सामान्य है और किन रास्तों पर डायवर्जन लागू है। इससे लोगों का समय बचेगा और अनावश्यक जाम में फंसने से राहत मिलेगी।

    ट्रैफिक प्रबंधन होगा अधिक प्रभावी

    अब तक पुलिसकर्मियों को हर चौराहे और पिकेट पर खड़े होकर लगातार लोगों को मार्ग की जानकारी देनी पड़ती थी। कई बार भीड़ के कारण सही जानकारी सभी तक समय पर नहीं पहुंच पाती थी। क्यूआर कोड व्यवस्था लागू होने से पुलिस बल पर भी दबाव कम होगा और वह सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था संभालने पर अधिक ध्यान दे सकेगा। डिजिटल माध्यम से सूचना उपलब्ध होने से ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।

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    कांवड़ यात्रा के दौरान पहली बार क्यूआर कोड आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे रूट डायवर्जन की रियल टाइम जानकारी मिलेगी और यातायात प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा।


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    - कुंवर ज्ञानंजय सिंह, पुलिस अधीक्षक