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    साहब! मौत बनकर मंडरा रहे 50 से अधिक जर्जर मकान, हापुड़ में मानसून की बारिश में बड़ी लापरवाही उजागर

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 04:35 PM (IST)

    हापुड़ में 50 से अधिक जर्जर मकान मानसून में बड़े खतरे का सबब बन गए हैं, क्योंकि नगर पालिका ने इन्हें खतरनाक घोषित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। ...और पढ़ें

    हापुड़ में जर्जर मकान। जागरण

    हापुड़ में जर्जर मकान। जागरण

    HighLights

    1. हापुड़ में 50 से अधिक जर्जर मकान खतरनाक घोषित।

    2. नगर पालिका ने कार्रवाई में दिखाई घोर लापरवाही।

    3. मानसून में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।

    केशव त्यागी, हापुड़। मानसून की वर्षा ने हापुड़ शहर की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। नगर पालिका ने कुछ माह पहले शहर के 50 से अधिक भवनों को जर्जर और खतरनाक घोषित कर अपनी फाइलों में दर्ज तो कर लिया, लेकिन इसके बाद जिम्मेदार अधिकारी मानो सब कुछ भूल गए।

    अब जब वर्षा का दौर शुरू हो चुका है तो शहर के हजारों लोग हर दिन मौत के मकानों के साये में गुजरने को मजबूर हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यह जर्जर भवन शहर के ऐसे इलाकों में हैं, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। कई भवन बाजारों, संकरी गलियों और घनी आबादी के बीच स्थित हैं।

    बड़ा हादसा होने की आशंका

    तेज वर्षा के दौरान इन भवनों की दीवारें पानी सोख रही हैं, छतें कमजोर हो रही हैं और छज्जे कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    नगर पालिका ने करीब दो माह पहले विशेष सर्वे कराया था। सर्वे में 50 भवन ऐसे मिले, जिन्हें खतरनाक श्रेणी में रखा गया। अधिकारियों ने उनकी सूची तैयार की, रिपोर्ट बनाई और फाइलें भी तैयार हो गईं, लेकिन कार्रवाई का पहिया वहीं थम गया।

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    छतों का प्लास्टर गिरा

    मानसून सिर पर आ गया, मगर भवन स्वामियों को चेतावनी तक नहीं दी गई। इन भवनों में अधिकांश 50 से 60 वर्ष से अधिक पुराने हैं। वर्षों से मरम्मत न होने, नमी और मौसम की मार के कारण उनकी दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। कई मकानों के छज्जे झुक गए हैं तो कहीं छतों का प्लास्टर गिर रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की वर्षा में भी मलबा गिरने लगता है। ऐसे में लगातार हो रही वर्षा के बीच पूरा भवन गिरने का खतरा बना हुआ है। शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर नगर पालिका किस बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

    यदि सर्वे में भवन खतरनाक मिले थे तो अब तक नोटिस क्यों नहीं दिए गए? यदि कोई भवन गिरकर जनहानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? केवल सर्वे कर लेना क्या प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी करना है?

    घटनाओं से नहीं ले रहे सबब

    हर साल वर्षा के मौसम में जर्जर भवनों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में हुई वर्षा के दौरान कई मकान भरभरकाकर गिर गए। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने इस बार भी कोई सबक नहीं लिया। वर्षा का दौर अभी लंबा चलना है।

    मौसम विभाग लगातार तेज वर्षा की संभावना जता रहा है। यदि समय रहते इन भवनों को खाली नहीं कराया गया और भवन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी दिन एक बड़ी दुर्घटना पूरे शहर को झकझोर सकती है।

    कार्रवाई में लापरवाही

    नगर पालिका क्षेत्र में करीब हजार 47 हजार मकान व 2600 व्यवसायिक भवन हैं। पालिका द्वारा वर्षा से पहले शहर के सभी मकानों को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद स्वामियों को नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बाद भी स्वामी अगर मरम्मत कार्य नहीं कराते हैं तो पालिका मकान के ध्वस्तिकरण की कार्रवाई करती हैं।

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    शहर में दोबारा जर्जर मकानों व व्यवसायिक भवनों का सर्वे कराया जाएगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हम लोगों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं। - संजय मिश्रा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका हापुड़