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    चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ, डोली में सवार होकर आ रही माता; जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 04:25 PM (GMT+05:30)

    गढ़मुक्तेश्वर में पंडितों ने चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होने की घोषणा की है। इस वर्ष माता डोली में सवार होकर आ रही हैं। घटस्थापना के शुभ मुहूर्त प ...और पढ़ें

    पंडितों ने चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होने की घोषणा की।

    पंडितों ने चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होने की घोषणा की।

    HighLights

    1. नवरात्र 19 मार्च से शुरू, माता डोली में आएंगी।

    2. घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 06:54 से 08:05 तक।

    3. प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा, स्थिरता का प्रतीक।

    संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर। नवरात्र को लेकर पंडितों ने शुभ मुहूर्त तिथि, वार एवं घट स्थापना का समय जारी किया है। पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 दिन बृहस्पतिवार को प्रातः 06:54 मिनट से अंतरात्रि 04:52 मिनट तक हैं। ज्योतिष एवं शास्त्रानुसार वसंत नवरात्र का प्रारंभ व घटस्थापना इसी दिन होगी।

    पंड़ित सुबोध पांडेय ने बताया कि घटस्थापना हेतु शुभ (मीन लग्न )का चौघड़िया प्रातः 06:54 मिनट से प्रातः 08:05 मिनट तक चर- लाभ अमृत का चौघड़िया प्रातः 11:05 मिनट से दोपहर 03:34 मिनट तक एवं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 मिनट से 12: 59 मिनट तक रहेगा। मां दुर्गा का वाहन सिंह हैं, लेकिन प्रत्येक वर्ष नवरात्र के समय माता अलग -अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। इस बार माता डोली में सवार होकर आ रही है।

    नवरात्रि के प्रथम दिन दुर्गा जी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति व स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ पूजा का आरंभ होता है, जिसमें माता को श्वेत रंग के वस्त्र और फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है। शैल का अर्थ होता है पर्वत, अर्थात माता का यह स्वरुप पर्वत की पुत्री का है। स्वरूप माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है, और वह नंदी (वृषभ) की सवारी करती हैं। यह पूजा मूलाधार चक्र को जागृत करने, जीवन में स्थिरता, धैर्य और सकारात्मकता पाने के लिए की जाती है।

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    पूजा विधि और मंत्र

    पूजा सुबह स्नान के बाद कलश स्थापना करें। मां शैलपुत्री को कुमकुम, सफेद फूल, और फल चढ़ाएं। मंत्र ''ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे शैलपुत्री देव्यै नमः'' का जाप करें। माता को गाय के घी या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना श्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन साधक को अडिग रहने और दृढ़ता से जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।

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