गंगा एक्सप्रेस-वे पर होंगे दो मेन टोल, 19 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट पर लगेगा चर्ज; 30 साल तक कंपनी लेगी Toll Tax
गंगा एक्सप्रेस-वे पर दो मुख्य टोल प्लाजा और 19 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनसे वाहनों से शुल्क वसूला जाएगा। निर्माण लागत की भरपाई के लिए टोल ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हरदोई। गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना में टोल व्यवस्था और प्रवेश-निकास मार्गों को खास महत्व दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेस-वे पर जहां दो मुख्य टोल प्लाजा होंगे, वहीं 12 जिलों में 19 स्थानों पर एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनसे गुजरने वाले वाहनों से भी टोल वसूला जाएगा।
गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण में अदानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड की अहम भूमिका रही है।
कंपनी ने बदायूं से प्रयागराज तक लगभग 464 किलोमीटर (करीब 80 प्रतिशत) हिस्से का निर्माण किया है, जिसे तीन खंडों बदायूं-हरदोई (151.7 किमी), हरदोई-उन्नाव (155.7 किमी) और उन्नाव-प्रयागराज (157 किमी) में विभाजित किया गया है। वहीं मेरठ से बदायूं तक का निर्माण आरबी इंफ्रा कंपनी द्वारा किया गया है।
कंपनी के प्रतिनिधि ने क्या बताया?
जैसा कि कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि यह एक्सप्रेस-वे डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण माडल पर आधारित है और भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। परियोजना के तहत बनाए गए टोल प्लाजा और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट से टोल वसूली की जाएगी।
यह भी पढ़ें- अब 130 KM/H की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेन, डेढ़ से 2 घंटे में पूरा हो सकेगा गोंडा से गोरखपुर का सफर
कंपनी के अनुसार, निर्माण पर आई लागत की भरपाई अगले 30 वर्षों तक टोल वसूली के माध्यम से की जाएगी। इसके बाद रखरखाव और टोल संचालन की जिम्मेदारी शासन के पास चली जाएगी। इस व्यवस्था से एक्सप्रेस-वे के संचालन और रखरखाव को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित किया गया है।