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    हरदोई में सावन भर नंगे पैर रहकर शिवभक्ति करते हैं श्रद्धालु, रक्षाबंधन के बाद ही पहनते हैं चप्पल

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 05:23 PM (IST)

    पिहानी, हरदोई में श्रद्धालु सावन माह में भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था के चलते पूरे महीने नंगे पैर रहते हैं। यह संकल्प मन्नत पूरी होने और आत्म-अन ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. पिहानी में श्रद्धालु सावन माह में नंगे पैर शिव आराधना करते हैं।

    2. यह संकल्प मन्नत पूरी होने और आत्म-अनुशासन का प्रतीक है।

    3. रक्षाबंधन के बाद ही श्रद्धालु दोबारा जूते-चप्पल धारण करते हैं।

    संवाद सूत्र, पिहानी(हरदोई)। भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था का अनोखा उदाहरण पिहानी कस्बे में देखने को मिल रहा है। यहां कई श्रद्धालु सावन माह शुरू होते ही जूते-चप्पल का त्याग कर पूरे महीने नंगे पैर रहते हैं और शिव आराधना में लीन रहते हैं। रक्षाबंधन के बाद ही वह दोबारा चप्पल धारण करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह संकल्प उनकी श्रद्धा, विश्वास और आत्म अनुशासन का प्रतीक है।

    कस्बा निवासी सुनीता देवी ने बताया कि करीब सात वर्ष पहले उनके बेटे की तबीयत अक्सर खराब रहती थी। उन्होंने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि यदि उनका बेटा स्वस्थ हो गया तो वह हर वर्ष पूरे सावन माह नंगे पैर रहेंगी। मन्नत पूरी होने के बाद से वह लगातार इस संकल्प का पालन कर रही हैं। बाजार जाना हो, रिश्तेदारी में जाना हो या किसी अन्य कार्य से बाहर निकलना हो, पूरे सावन माह वह चप्पल नहीं पहनतीं।

    सुनीता देवी की आस्था से प्रेरित होकर करीब पांच वर्ष पहले जितेंद्र यज्ञसैनी ने भी सावन में नंगे पैर रहने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह उनका व्यक्तिगत संकल्प था, लेकिन धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते चले गए। अब करीब एक दर्जन श्रद्धालु इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। इनमें ज्ञान देवी, कशिश गुप्ता, दीपांशी चौधरी, धर्मेंद्र हलवाई, कृष्ण रस्तोगी, शिवम चौधरी, सूरज चौधरी, जतिन, विकास, प्राशु और अभिनय कश्यप सहित कई श्रद्धालु शामिल हैं।

    कपड़े की दुकान पर कार्यरत सूरज चौधरी ने बताया कि रोज काम के सिलसिले में बाहर आना-जाना पड़ता है, लेकिन पूरे सावन माह वह नंगे पैर ही रहते हैं। वहीं चाट का ठेला लगाने वाले अभिनय कश्यप ने कहा कि दिन भर सड़क पर काम करने के बावजूद उन्होंने कभी अपना संकल्प नहीं तोड़ा। श्रद्धालुओं ने बताया कि सावन शुरू होते ही वह जूते-चप्पल त्याग देते हैं और रक्षाबंधन के बाद ही उन्हें दोबारा धारण करते हैं।

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