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    कस्तूरबा विद्यालयों में अब मशीन से बनेंगी रोटियां, एक घंटे में तैयार होगी 2000 रोटियां

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 05:34 PM (GMT+05:30)

    कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में अब रोटी बनाने की आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इससे हरदोई के 20 स्कूलों में रसोइयों का काम आसान हो गया है और ...और पढ़ें

    कस्तूरबा स्कूलों में अब मशीन से बनेंगी रोटियां।

    कस्तूरबा स्कूलों में अब मशीन से बनेंगी रोटियां।

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    जागरण संवाददाता, हरदोई। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में अब रसोई का काम पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। जहां पहले रसोइयों को घंटों रोटी सेंकने में समय लगाना पड़ता था, वहीं अब रोटी बनाने की आधुनिक मशीनों के लगने से यह काम तेजी और सरलता से पूरा हो रहा है। करीब चार लाख रुपये की कीमत वाली मशीन से छात्राओं को समय पर भोजन मिलने के साथ-साथ रसोइयों का कार्यभार भी काफी कम हो गया है।

    कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में अब रसोई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए बड़ा बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग की पहल पर सभी स्कूलों में रोटी बनाने की मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे रसोइयों का काम काफी आसान हो गया है। 19 ब्लॉकों में कुल 20 कस्तूरबा गांधी विद्यालय संचालित हैं।

    ये सभी विद्यालय आवासीय हैं, जहां कक्षा छह से आठ तक की छात्राएं अध्ययन करती हैं और वहीं रहती भी हैं। यहां भोजन तैयार करने के लिए रसोइयों की तैनाती की गई है, जो अब तक पारंपरिक तरीके से रोटियां बनाती थीं। पहले रसोइयों को भोजन तैयार करने में काफी कठिनाई होती थी।

    सब्जी तो जल्दी बन जाती थी, लेकिन बड़ी संख्या में छात्राओं और शिक्षिकाओं के लिए रोटियां सेंकना समय लेने वाला काम था। कई बार एक से तीन घंटे केवल रोटियां बनाने में ही लग जाते थे।

    शाम चार बजे से ही रसोइयों को रसोई में लगना पड़ता था, ताकि समय पर भोजन तैयार हो सके, लेकिन अब शिक्षा विभाग की ओर से लगाए जा रहे रोटी बनाने की मशीनों ने इस समस्या का समाधान कर दिया है।

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    यह मशीनें एक घंटे में लगभग 2000 रोटियां तैयार करने की क्षमता रखती हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि रसोइयों की मेहनत भी काफी कम हो गई है।

    रसोइयों का कहना है कि अब उन्हें रोटियां बेलने और सेंकने में घंटों समय नहीं लगाना पड़ेगा, जिससे वे अन्य भोजन तैयार करने के कार्य को भी बेहतर तरीके से कर सकेंगी। विद्यालय प्रशासन के अनुसार यह तकनीकी बदलाव छात्राओं के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि अब उन्हें समय पर गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध हो सकेगा।

    साथ ही रसोई व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन जाएगी। जिला समन्वयक बालिका शिक्षा संतोष कुमार का कहना है कि सभी विद्यालयों के लिए रोटी बनाने वाली मशीन आ गई हैं। उन्हें जल्द ही संचालित भी करा दिया जाएगा।

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