विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में 52 जिलों की पंचायतों पर गिरी गाज: CSC कमाई के 44.84 लाख दबाए, निदेशक बोले- एक हफ्ते में दो हिसाब

Published: Sun, 06 Sep 2026 09:16 AM (IST)

उत्तर प्रदेश के 52 जिलों की ग्राम पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से अर्जित ₹44.84 लाख राजस्व OSR खातों ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. 52 जिलों में ₹44.84 लाख राजस्व बकाया।

  2. CSC से अर्जित आय OSR खातों में जमा नहीं।

  3. एक सप्ताह में बकाया जमा न करने पर कार्रवाई।

आशीष त्रिवेदी, हरदोई। सूबे की ग्राम पंचायतों में कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) द्वारा अर्जित राजस्व को ग्राम पंचायत के स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) खातों में जमा न कराने के मामले पर पंचायती राज विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशक पंचायतीराज अमित कुमार सिंह ने हरदोई, लखनऊ समेत प्रदेश के 52 जिलों की समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 और पूर्व वर्षों का 44 लाख 84 हजार रुपये का बकाया राजस्व एक सप्ताह के भीतर जमा कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्थानीय सेवाओं, करों और जनसेवा केंद्रों (सीएससी) से अर्जित राजस्व को सीधे ग्राम पंचायत के ओएसआर पोर्टल से जुड़े ओएसआर (स्वयं के राजस्व स्रोत) खातों में जमा किया जाना अनिवार्य किया गया है। ओएसआर में जमा राशि वह आय है जो पंचायतें बाहरी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर खुद जुटाती हैं।

उदाहरण के तौर पर संपत्ति कर (हाउस टैक्स), बाजार शुल्क, जल निकासी शुल्क, और पंचायत सचिवालय, जन सेवा केंद्र के माध्यम से जारी होने वाले प्रमाण पत्र (आय, जाति, निवास आदि) पर मिलने वाला सेवा शुल्क। सीएससी या अन्य डिजिटल पोर्टलों के जरिए मिलने वाले निर्धारित शुल्क को प्रधान और पंचायत सचिव के समन्वय से ओएसआर खाते में जमा किया जाता है।

इस राशि का उपयोग पंचायतें अपने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और स्थानीय विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए करती हैं। निदेशक के द्वारा की गई समीक्षा में पाया गया कि 52 जिलों में सीएससी के द्वारा एक करोड़ 47 लाख 10 हजार दो रुपये आय की गई, जबकि ओएसआर खाते में एक करोड़ दो लाख 25 हजार 534 रुपये ही जमा की गई। 44 लाख 84 हजार 468 रुपये अभी भी नहीं जमा किया गया। यानी सीएससी केंद्रों द्वारा कमाए गए राजस्व और ओएसआर खातों में जमा की गई राशि में भारी अंतर पाया गया है।

निदेशक पंचायतीराज ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जनपद की सर्वाधिक बकाया वाली 10 ग्राम पंचायतों की सूची के आधार पर तत्काल वसूली की जाए। तय समय सीमा के भीतर धन जमा न कराने वाली ग्राम पंचायतों और संबंधित दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पंचायतों को मिलने वाला अनुदान होता है प्रभावित
ग्राम पंचायतों में कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) से मिलने वाले राजस्व को स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) खाते में न जमा करने को वित्तीय अनियमितता मानी जाती है और संबंधित पंचायत सचिव या जिम्मेदार व्यक्ति पर प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। राशि समय पर जमा न करना वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना जाता है। पंचायत राज विभाग द्वारा संबंधित कर्मचारी या सचिव के खिलाफ जांच बैठाई जा सकती है।

दोषी पाए जाने पर स्पष्टीकरण, निलंबन या रिकवरी की कार्रवाई हो सकती है। ओएसआर खाते पंचायतों के स्वयं के स्राेत बढ़ाने के सरकार के लक्ष्यों में बाधा आने से पंचायत को मिलने वाले प्रोत्साहन या अनुदान प्रभावित हो सकते हैं। इससे पंचायतों को जो राज्य वित्त सहित अन्य अनुदान सरकार की ओर से प्राप्त होते हैं, वह लक्ष्य की पूर्ति न होने से नहीं मिल पाते।

जिलेवार अर्जित राशि व जमा राशि का अंतर

  • एटा: 61.87 प्रतिशत अंतर (83,010 अर्जित में से केवल 31,648 जमा)
  • बहराइच- 56.93 प्रतिशत अंतर (2,08,410 में से 89,763 जमा)
  • लखनऊ: 53.63 प्रतिशत अंतर (1,59,480 में से 73,950 जमा)
  • हाथरस: 53.46 प्रतिशत अंतर (94,290 में से 43,878 जमा)
  • हरदोई: 53.15 प्रतिशत अंतर (6,42,150 में से 3,00,853 जमा)
  • गोंडा: 49.31 प्रतिशत अंतर (2,11,230 में से 1,07,075 जमा)
  • सुल्तानपुर: 48.38 प्रतिशत अंतर (2,78,520 में से 1,43,775 जमा)
  • सीतापुर: 31.45 प्रतिशत अंतर (13,79,730 में से 9,45,773 जमा)
  • अयोध्या: 23.56 प्रतिशत अंतर (3,59,760 में से 2,75,000 जमा)
  • ललितपुर: 50.34 प्रतिशत अंतर (1,74,540 में से 86,677 जमा)
  • बांदा: 41.68 प्रतिशत अंतर (98,130 में से 57,234 जमा)
  • बरेली: 39.46 प्रतिशत अंतर (3,20,052 में से 1,93,775 जमा)

यह भी पढ़ें- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि बढ़ी, हरदोई में किसानों ने रिकॉर्ड संख्या में कराया बीमा

यह भी पढ़ें- हरदोई में फार्मर रजिस्ट्री न बनने से किसान परेशान, आधार-खतौनी नाम अंतर बड़ी बाधा

पंचायतों में राजस्व के प्राप्त होने के बाद उसे जमा करने की जो व्यवस्था है, उसका अक्षरश: पालन कराया जाएगा। लापरवाही करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई तय की जाएगी।

-

-अनुनय झा, डीएम, हरदोई