शासन की बड़ी कार्रवाई: हाथरस नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी के अधिकार सीज, कूड़ा टेंडर में मिली अनियमितताएं
हाथरस नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर में वित्तीय और प्रक ...और पढ़ें

नगर पालिका हाथरस चेयरमैन स्वेता चौधरी
HighLights
अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय, प्रशासनिक अधिकार सीज
कूड़ा कलेक्शन टेंडर में मिलीं गंभीर अनियमितताएं
डीएम नामित अधिकारी अब पालिका कार्य संभालेंगे
जागरण, संवाददाता, हाथरस। नगर पालिका परिषद हाथरस की अध्यक्ष श्वेता चौधरी के खिलाफ शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के टेंडर में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं मिलने पर शासन ने उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। डीएम की जांच रिपोर्ट, जांच समिति के निष्कर्ष और हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण के परीक्षण के बाद यह कार्रवाई की गई।
उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास अनुभाग-2 द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2024 में नगर पालिका परिषद हाथरस के 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए निकाली गई निविदा में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद डीएम ने जांच समिति गठित की थी।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर में अनियमितता पर अधिकार सीज
जांच में पाया गया कि निविदा की शर्त संख्या 19.1 के अनुसार पहले तकनीकी मूल्यांकन होना था और तकनीकी रूप से सफल फर्मों का ही वित्तीय मूल्यांकन किया जाना चाहिए था। लेकिन समिति के अनुसार इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। 14 अगस्त 2024 को वित्तीय मूल्यांकन का तुलनात्मक चार्ट तैयार कर लिया गया। जबकि एल-1 फर्म की बैंक स्वीकृति 12 अगस्त 2024 तक ही मान्य थी।
जांच में टेंडर शर्तों के उल्लंघन
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संबंधित फर्म द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए आवश्यक कुछ अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसके बावजूद उसे वित्तीय मूल्यांकन में सफल घोषित कर कार्यादेश जारी कर दिया गया। सितंबर 2024 के लिए लगभग 22.45 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
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वित्तीय नियमों की अनदेखी और एल-1 फर्म को लाभ पहुंचाने के आरोप सही पाए गए
शासन ने अपने आदेश में कहा है कि अध्यक्ष को 22 अगस्त 2025 को कारण बताओ नोटिस दिया गया था। इसके बाद 19 फरवरी 2026 को अंतिम अवसर भी दिया गया, लेकिन जांच समिति के आरोपों का कोई तथ्यात्मक खंडन प्रस्तुत नहीं किया गया। अध्यक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन शासन ने स्पष्ट किया कि केवल रिट लंबित होने या स्थगन आदेश नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर रोक नहीं लगती।
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अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज
शासन ने माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। डीएम और जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर अध्यक्ष को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48(2) के तहत कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर अवचार, पालिका निधि को नुकसान पहुंचाने और पालिका हित के प्रतिकूल कार्य करने का दोषी माना गया। इसी आधार पर राज्यपाल की स्वीकृति से अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए हैं।
आदेश दिया गया है कि अध्यक्ष की शक्तियों, कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन जिलाधिकारी द्वारा नामित ऐसे अधिकारी करेंगे, जो जिला कलेक्टर से निम्न पंक्ति के न हों। श्वेता चौधरी पूर्व सांसद राजेश दिवाकर की पत्नी भी हैं। इस संबंध में जब उनसे संपर्क साधने की कोशिश की गई। लेकिन, बात नहीं हो सकी।
जांच में प्रमुख बिंदु
- टेंडर की शर्त 19.1 का पालन नहीं किया गया
- तकनीकी मूल्यांकन से पहले वित्तीय मूल्यांकन किया गया
- एल-1 फर्म को नियमों के विपरीत चयनित करने का आरोप
- आवश्यक दस्तावेज अधूरे होने के बावजूद कार्यादेश जारी
- सितंबर 2024 का 22.45 लाख रुपये से अधिक का भुगतान
- कारण बताओ नोटिस और अंतिम अवसर के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला
- हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद शासन ने विभागीय कार्रवाई जारी रखी
अब आगे क्या होगा
- पालिका अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रभावी नहीं रहेंगे
- डीएम द्वारा नामित अधिकारी इन अधिकारों का प्रयोग करेंगे
- अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय नहीं ले सकेंगी
- आगे की कार्रवाई नगर पालिका अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत जारी रह सकती है।
शासन के निर्देश अनुसार नगर पालिका अध्यक्ष के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज किये गये हैं। इनके स्थान पर किसी दूसरे अधिकारी को ये अधिकार दिए जाएंगे।
अतुल वत्स, डीएम हाथरस
करोड़ों रुपया खर्च करने के बाद भी शहर में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे थे। हमने तीन साल जनता के हित की लड़ाई लड़ी। जनता को आज न्याय मिला है।
सभासद सुनील अग्निहोत्री, शिकायतकर्ता