क्या ग्लोरी गार्डन कॉलोनी पर चलेगा बुलडोजर? मनोज यादव पर FIR के बाद हाथरस के 150 परिवारों में खलबली
हाथरस की ग्लोरी गार्डन कॉलोनी के डेवलपर मनोज यादव पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है, जिससे कॉलोनी के 150 परिवारों में अपने आशियाने को लेकर चिंता ...और पढ़ें

मथुरा रोड स्तित गलोरी गार्डन कॉलोनी। जागरण
HighLights
ग्लोरी गार्डन कॉलोनी डेवलपर पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप।
एफआईआर के बाद 150 परिवार अपने घरों को लेकर चिंतित।
प्रशासन की 10 साल की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठे।
अभिषेक तायल, हाथरस। करीब 150 बीघा में बसी ग्लोरी गार्डन कॉलोनी के कालोनाइजर मनोज यादव के खिलाफ सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद कालोनी में रहने वाले करीब 150 परिवारों में बेचैनी बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो क्या प्रशासन कालोनी पर बुलडोजर चलाएगा या केवल सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा। फिलहाल पुलिस विवेचना शुरू हो चुकी है, जबकि प्रशासन की ओर से किसी ध्वस्तीकरण की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नगर पालिका परिषद की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाला, पोखर और सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज सरकारी भूमि को ग्लोरी गार्डन कॉलोनी की सीमा में शामिल कर उसका स्वरूप बदल दिया गया। इसी आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

गलोरी गार्डन स्थित पोखर जिस पर कब्जे का आरोप है। जागरण
एफआईआर के बाद प्लॉट खरीदारों और रहवासियों में बढ़ी चिंता
रिपोर्ट की जानकारी सामने आने के बाद रविवार को कॉलोनी में पूरे दिन इसी मुद्दे पर चर्चा होती रही। नाम न छापने की शर्त पर कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां प्लाट और मकान खरीदे थे। अब उन्हें अपने आशियाने की चिंता सताने लगी है। लोगों का कहना है कि अगर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष खरीदारों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
10 साल तक सोता रहा सिस्टम, अब एफआईआर के बाद जागा प्रशासन
ग्लोरी गार्डन कॉलोनी में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो गया है। अगर नगर पालिका की शिकायत सही है और सरकारी नाला, पोखर व सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर कालोनी विकसित हुई, तो आखिर करीब 10 वर्षों तक प्रशासन क्या करता रहा। इतने लंबे समय में कॉलोनी में मकान बन गए, दुकानें खुल गईं, रेस्टोरेंट संचालित होने लगे, माल तैयार हो गया और सैकड़ों प्लाट बिक गए, लेकिन किसी विभाग ने निर्माण रुकवाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
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सरकारी जमीन पर बस गई कॉलोनी, बने मकान-दुकान, रेस्टोरेंट और मॉल
एफआईआर में नगर पालिका ने आरोप लगाया है कि सरकारी भूमि को कॉलोनी में शामिल कर उसका स्वरूप बदल दिया गया। यह शिकायत संयुक्त राजस्व एवं नियोजन अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज कराई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्लोरी गार्डन कोई रातोंरात बनी कॉलोनी नहीं है। पिछले करीब एक दशक में यहां चरणबद्ध तरीके से सड़कें बनीं, बिजली और पानी की सुविधाएं पहुंचीं, दर्जनों मकान तैयार हुए, व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुल गए और बड़ी संख्या में लोगों ने प्लाट खरीदे।
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तब किसी विभाग ने क्यों नहीं रोकी निर्माण गतिविधियां
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निर्माण कार्य लगातार चल रहा था तब नगर पालिका, राजस्व विभाग, नियोजन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। शहर में अब चर्चा इस बात की भी है कि आगर शुरुआती दौर में ही कथित अतिक्रमण रोक दिया जाता तो न तो सरकारी भूमि पर निर्माण होता और न ही सैकड़ों परिवारों की पूंजी दांव पर लगती। अब एफआईआर के बाद कार्रवाई शुरू होने से सबसे अधिक चिंता उन लोगों को है जिन्होंने वैध मानकर यहां मकान या प्लाट खरीदे।
ग्लोरी गार्डन कॉलोनी में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। जिसके बाद एक जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी द्वारा आरोप सही पाए गए। जिसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अतुल वत्स, डीएम
केवल एफआईआर दर्ज होने से किसी कॉलोनी पर तत्काल बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। पहले पुलिस विवेचना, राजस्व अभिलेखों का परीक्षण और सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। अगर सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण प्रमाणित होता है तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
एड. सुदर्शन शर्मा, पूर्व सचिव, राजस्व न्यायालय हाथरस