कालपी में 56 साल पुराने यमुना पुल की मरम्मत, आज से दो माह तक भारी वाहनों पर रोक, ये है वैकल्पिक रास्ता
कालपी में पुराने यमुना पुल की मरम्मत के कारण आज से दो महीने के लिए भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। एनएचएआई ने भोपाल की सेन फील्ड कंपनी को मरम्म ...और पढ़ें

मंगलवार को कालपी स्थित पुराने यमुना पुल से गुजरते भारी वाहन। जागरण
HighLights
एनएचएआइ ने भोपाल की सेन फील्ड कंपनी को दिया मरम्मत कराने का ठेका
उरई से कानपुर की ओर जाने वाले पुराने पुल से केवल हल्के वाहन निकलेंगे
संवाद सहयोगी, कालपी(जालौन)। झांसी-कानपुर हाईवे पर कालपी कस्बा में बने यमुना नदी के पुराने पुल की मरम्मत कराने के लिए इससे भारी वाहनों का आवागमन आज बुधवार से दो माह के लिए रोका जा रहा है। इस पुल से कानपुर की ओर जाने वाले वाहनों को अब नए पुल से होकर जाना होगा। जाम के हालात न बनें इसके लिए छोटे व हल्के वाहनों का आवागमन पुराने पुल से ही होता रहेगा।
पुराने यमुना पुल की जांच फरवरी माह में भोपाल की सेन फील्ड कंपनी की ओर से की गई थी। उस दौरान बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट में कमियां मिली थीं। उसके बाद से ही जांच टीम ने इस पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने के लिए कहा था लेकिन पुल से इस तरह के वाहनों का निकलना जारी रहा। एनएचएआइ प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि शासन और प्रशासन को इसके लिए पत्राचार किया गया है। डायवर्जन के लिए डिवाइडर के पास तोड़फोड़ कर वहां की रोड को सही करा दिया गया है।
कालपी के पुराने यमुना पुल में भारी वाहनों के गुजरने के दौरान कंपन तेज होने लगा है। इसी के चलते जनवरी माह में इस पुल की भोपाल की कंपनी सेन फील्ड की ओर से जांच की गई थी। रिपोर्ट में बेयरिंग और कुछ एक्सपेंशन ज्वाइंट में खराबी मिली थी। जांच टीम ने कहा था कि इस पुल से भारी वाहनों का आना जाना अधिक है, इस पर रोक लगानी होगी। उसके बाद भी भारी वाहनों पर रोक नहीं लग सकी। अब एनएचएआइ की ओर से इसी कंपनी से इस पुल की मरम्मत कराई जानी है।
इसके लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी लगभग तैयार की जा चुकी है। कस्बा में दुर्गा मंदिर के सामने डिवाइडर काटकर भारी वाहनों को नए यमुना पुल की ओर डायवर्ट किया गया है। इससे मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद अगले दो माह तक ट्रक और बस जैसे भारी वाहन पुराने पुल से नहीं गुजर सकेंगे, जबकि छोटे वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।
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कालपी का पुराना यमुना पुल ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। कानपुर और झांसी को जोड़ने वाले इस पुल की आधारशिला 1970 के करीब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा रखी गई थी। तब से यह पुल पूर्व और पश्चिम दिशा के यातायात का प्रमुख माध्यम है। प्रतिदिन करीब छोटे-बड़े दस हजार वाहनों का निकलना होता है। 2015 में ओवरलोडिंग के चलते पुल की एक बीम क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद करीब छह माह तक मरम्मत कार्य चला था।
उस समय मरम्मत करने वाली एजेंसी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को चेतावनी दी थी कि मानक से अधिक भार वाले वाहनों का संचालन रोका जाए, अन्यथा भविष्य में गंभीर खतरा हो सकता है। अब एक बार फिर तकनीकी खामियां सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
एनएचएआइ प्रोजेक्ट मैनेजर उत्तम सिंह ने कहाकि पत्राचार किया जा चुका है, आज बुधवार से भारी वाहनों को पुराने पुल से रोक कर डायवर्ट किया जा रहा है। हल्के वाहनों को निकलने की छूट रहेगी।
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