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    'मुझे बचा लो', मौत से पहले अबान के आखिरी शब्द; चश्मदीदों ने बताया कैसा था मंजर?

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 07:47 PM (IST)

    झांसी-कानपुर हाइवे पर बछड़े को बचाने के चक्कर में हुई कार दुर्घटना में अबान और सोनू अहमद सहित दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद अतीक अहमद के बेटे ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. बछड़े को बचाने के चक्कर में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हुई।

    2. हादसे में अबान और सोनू अहमद की मौके पर मौत।

    3. अतीक के बेटे ने भाइयों के जनाजे में शामिल होने की अनुमति मांगी।

    जागरण संवाददाता, झांसी। हाईवे पर हुए इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी पप्पू यादव और दीपक यादव ने बताया कि वे वहां से निकल रहे थे। दीपक रास्ते में रुक गया। उसने देखा कि एक बछड़ा अचानक हाईवे पर आ गया और उसी समय एक बाइक वहां से निकली। ठीक उसी समय कानपुर की ओर से तेज रफ्तार में आ रही कार बछड़े को बचाने के चक्कर में अनियंत्रित हो गई।

    बाइक तो बच गई, मगर बछड़े को बचाने में अनियंत्रित कार डिवाइडर से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई। दीपक, पप्पू व अन्य लोग भागकर कार के पास पहुंचे तो देखा अंदर बैठा एक युवक बुरी तरह घायल था। वह बोल रहा था- 'मुझे बचा लो।' लोगों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, मगर कार की खस्ता हालत के चलते उसे निकालने में दिक्कत आ रही थी।

    इसलिए ग्रामीणों ने दर्द से तड़पते उस युवक को बाहर निकालने के लिए टायर लीवर व सब्बल (लोहे की रॉड) मंगाई और कांच तोड़कर किसी प्रकार से उसे बाहर निकाला। उसे सड़क पर लिटाया और इसके बाद दूसरे घायल को निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस अफसर भी तुरंत मौके पर आ गए। थोड़ी देर में दोनों घायलों की मौत हो गई। ग्रामीणों व पुलिस ने कार में फंसे 3 अन्य घायलों को बाहर निकाल लिया।

    मौसी के दामाद जहद की थी कार

    कार को जहद चला था। यह कार उसे शादी में दहेज में मिली थी। जहद की सास अबान की मौसी हैं। उसके बगल वाली सीट पर अबान बैठा था। पीछे अन्य साथी बैठे थे। अबान के ठीक पीछे उसका दोस्त सोनू अहमद बैठा था।

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    एक साइड से डिवाइडर से टकराई कार और उसके बाद उसी साइड बैठे अबान व सोनू कार के मलबे में फंस गए, जबकि ड्राइवर साइड में बैठे जहद को भी गंभीर चोट आई। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। वहीं कार में पीछे बैठे दो दोस्त उमर व अहजाम को भी चोटें आई हैं, लेकिन वह खतरे से बाहर हैं।

    100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक थी कार की रफ्तार

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्रेटा कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक थी। ऐसे में जैसे ही कार चालक ने बछड़ा देखा और उसे बचाने का प्रयास किया तो गाड़ी अनियंत्रित हो गई और हादसा हो गया।

    सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, एयरबैग भी नहीं खुले

    ग्रामीणों ने घायलों को बाहर निकाला तो पाया कि कार सवारों में किसी ने भी सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। इसके साथ ही पाया गया कि कार में सुरक्षा के लिए कोई भी अन्य व्यवस्था नहीं थी, क्योंकि इस कंपनी की कार का यह मॉडल बेहद कम बजट का है। इसमें एयरबैग तो थे, मगर समय पर न खुलने के कारण हादसा और भी गंभीर हो गया।

    कार में मिली किताबें, अली को देने लाया था अबान

    क्रेटा कार की जब पुलिस ने तलाशी ली तो उसमें सिगरेट के पैकेट व लव स्टोरी पर आधारित दो किताबें पुलिस के हाथ लगीं। जानकारी के अनुसार कार में बैठा कोई शख्स इन किताबों को पढ़ने वाला नहीं था। किताबें नई थीं। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि अबान जेल में बंद अपने भाई अली को देने के लिए ये किताबें लाया था।

    अली व अन्य रिश्तेदारों को जनाजे में शामिल होने की मांगी अनुमति

    घटना की सूचना मिलने के बाद देर शाम अपने कुछ रिश्तेदारों व परिचितों के साथ झांसी पहुंचे अतीक अहमद के चौथे नंबर के बेटे अहजाम ने सबसे पहले घायलों का हालचाल लिया और उनसे घटना के बारे में बातचीत की।

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    इसके बाद उसने कहा कि भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए लखनऊ व झांसी जेल में बंद उसके दोनों बड़े भाई उमद व अली को इजाजत दी जाए। वकील पैरोल के लिए पैरवी करने में जुट गए हैं। मालूम हो कि असद के एनकाउंटर के बाद और अतीक की मौत के बाद जेल में बंद उसके भाइयों को उनके जनाजे में शामिल नहीं होने दिया गया था।

    हाईवे पर लगा जैम

    घटना के बाद झांसी-कानपुर हाईवे पर एक रास्ते को रोक दिया गया। इससे चंद मिनट में ही 2-3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस अधिकारियों ने वाहनों को दूसरे रास्ते से निकालने का प्रबंध किया, तब जाकर आधा घंटे बाद जाम खुला और आवागमन सुचारू हो पाया।