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    झांसी के तीन गांवों में मिनी जामताड़ा, पुलिस ने 60 से अधिक को हिरासत में लिया तो सियासत तेज

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 08:14 PM (IST)

    Mini Jamtada: अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान के अनुसार मौरयाना, खौरयाना व काड़ौर को साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया था। पुलिस लगभग ...और पढ़ें

    पुलिस लाइन में एएसपी अरीबा नोमान से वार्ता करते पूर्व सपा सांसद डॉ. चन्द्रपाल सिंह यादव

    पुलिस लाइन में एएसपी अरीबा नोमान से वार्ता करते पूर्व सपा सांसद डॉ. चन्द्रपाल सिंह यादव

    HighLights

    1. पुलिस अफसर बनकर करते थे डिजिटल अरेस्ट, थाने से मुख्यालय तक के बनाए थे फर्जी सेटअप

    2. सायरन, वर्दी, कैप के साथ पुलिस का लोगो और बड़ी संख्या में मोबाइल-राउटर बरामद

    3. आरोपितों के पक्ष में पूर्व सपा सांसद, पूर्व मंत्री ने भी दी धमकी

    जागरण संवाददाता, झांसी। पुलिस की अति गोपनीय कार्रवाई में शनिवार को मिनी जामताड़ा नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने कटेरा थाना क्षेत्र के तीन गांवों में तड़के साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क पर धावा बोलकर खलबली मचा दी।

    पुलिस ने 60 लोगों को हिरासत में लिया तो सियासत तेज हो गई। समाजवादी पार्टी से पूर्व सांसद डॉ.चन्द्रपाल सिंह यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस नेता प्रदीप जैन आदित्य ने आरोपित के पक्ष में मोर्चा खोल दिया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।

    मौरयाना, खौरयाना और काड़ौर गांव में हुई गोपनीय कार्रवाई में पुलिस ने 60 से अधिक महिला-पुरुषों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार इन गांवों से साइबर ठगी का ऐसा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसमें आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते और रुपये ऐंठते थे। इसके खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस सायरन, नकली पुलिस वर्दी, कैप और पुलिस के लोगो समेत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है।

    पुलिस के अनुसार ठगों ने लोगों को प्रभावित करने के लिए थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक का फर्जी सेटअप तैयार कर रखा था। वीडियो कॉल के दौरान इसी सेटअप और पुलिस की वर्दी-सामान का इस्तेमाल कर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि सामने वास्तविक पुलिस अधिकारी या जाँच एजेंसी के लोग हैं।

    हिरासत पर सियासत, पुलिस लाइन पहुंचे नेता

    साइबर ठगी के शक में ग्रामीणों को हिरासत में लेने का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया। सपा के पूर्व सांसद डॉ. चन्द्रपाल सिंह यादव कटेरा थाने पहुंचे और हिरासत में लिए गए लोगों के बारे में पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष ग्रामीणों को परेशान न करें। एएसपी अरीबा नोमान ने उन्हें भरोसा दिलाया कि किसी निर्दोष को आरोपी नहीं बनाया जाएगा।

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    उन्होंने बताया कि लगभग 60 लोगों को पूछताछ के लिए लाया गया है और उनसे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। डॉ. चन्द्रपाल सिंह यादव ने बताया कि उन्हें शुरूआत में 150-200 लोगों को उठाए जाने की सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर लगभग 60 लोग पूछताछ के लिए मिले। उन्होंने कहा कि इस बारे में आइजी जोन और एसएसपी झांसी से भी बात की गई है। हमारी मांग है कि दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना जांच किसी को अपराधी न माना जाए। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने पुलिस लाइन पहुंचकर निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ किसी भी गलत कार्रवाई पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

    केंद्रीय एजेंसियों से भी मिले इनपुट

    अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान के अनुसार मौरयाना, खौरयाना व काड़ौर को साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया था। पुलिस लगभग एक महीने से इन गांवों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसी से भी इनपुट मिले। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने रणनीति तैयार की। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। अलग-अलग थानों से पुलिस बल बुलाया गया और शनिवार को तड़के तीनों गांवों की घेराबंदी की गई। एक साथ तलाशी अभियान शुरू होने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गयी।

    एफआईआर की जानकारी जुटाकर बनाते थे निशाना

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि साइबर ठग एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों के मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां जुटाते थे। इसके बाद उन्हें पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बनकर फोन किया जाता था। बातचीत के दौरान केस में फंसाने, गिरफ्तारी या जांच का डर दिखाया जाता। इसके बाद समझौते, केस से बचाने या कार्यवाही रोकने के नाम पर रकम की मांग की जाती थी।

    वीडियो कॉल पर दिखता था पुलिस अफसर

    वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी, कैप, सायरन और लोगो दिखाकर पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता था। कई मामलों में विश्वास दिलाया जाता कि वह पुलिस की निगरानी में है और डिजिटल तरीके से गिरफ्तार किया जा चुका है।

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    कटेरा थाने व पुलिस लाइन में चल रही पूछताछ

    पुलिस हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ कर रही है। बरामद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस सम्पर्क में रहने वाले लोगों, ठगी के खातों और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हिरासत में लिए गए लोगों में किसकी क्या भूमिका थी। पुलिस को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा के आधार पर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और ठगी के मामलों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी।