दिवंगत परिजनों का भी दाखिल करना होगा इनकम टैक्स रिटर्न? देखें क्या हैं नियम
मृतक परिजनों का आयकर रिटर्न दाखिल करने की जिम्मेदारी कानूनी उत्तराधिकारी की होती है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
कानूनी उत्तराधिकारी को ई-फाइलिंग पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
मृतक की मृत्यु तिथि तक की आय का रिटर्न दाखिल करें।
टीडीएस रिफंड के लिए आवेदन करें, सत्यापित खाते में पाएं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। कई बार किसी व्यक्ति के निधन के बाद पता चलता है कि उसका आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल होना बाकी है या उसकी आय पर टीडीएस कट चुका है, जिसका रिफंड मिलना है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अब यह प्रक्रिया कौन पूरी करेगा।
आयकर कानून के अनुसार, यह जिम्मेदारी मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी (लीगल हेयर) की होती है। निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर वह मृतक की ओर से आयकर रिटर्न दाखिल कर सकता है और यदि रिफंड बनता है तो उसका दावा भी कर सकता है।
आयकर विशेषज्ञ सीए आयुष गुप्ता के अनुसार दिवंगत परिजनों के आयकर रिटर्न जमा करने के लिए सबसे पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर स्वयं को कानूनी उत्तराधिकारी (लीगल हेयर) के रूप में पंजीकृत कराना होगा। इसके लिए मृतक का पैन, मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या उत्तराधिकार साबित करने वाले अन्य दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन की जांच के बाद आयकर विभाग इसे स्वीकृत करता है।
पंजीकरण स्वीकृत होने के बाद कानूनी उत्तराधिकारी, प्रतिनिधि करदाता (रिप्रेजेंटेटिव असेसी) के रूप में मृतक का आयकर रिटर्न दाखिल कर सकता है। रिटर्न में केवल उसी अवधि की आय दिखाई जाती है, जो वित्त वर्ष की एक अप्रैल से लेकर मृत्यु की तिथि तक अर्जित हुई हो।
यदि मृत्यु के बाद बैंक जमा, एफडी या अन्य निवेश से कोई आय होती है, तो उसका कर निर्धारण अलग नियमों के अनुसार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मृत करदाता की आय पर बैंक, नियोक्ता या किसी अन्य संस्था ने टीडीएस काटा है और वास्तविक कर देयता उससे कम है, तो अतिरिक्त राशि का रिफंड आयकर रिटर्न के माध्यम से लिया जा सकता है।
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कई मामलों में मृत्यु के बाद बैंक खाता बंद कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में भी रिफंड प्राप्त करने के लिए आयकर पोर्टल पर रिफंड पुनः जारी करने का अनुरोध करना होता है। इसके बाद रिफंड कानूनी उत्तराधिकारी के सत्यापित बैंक खाते में भेजा जा सकता है।