हल्दी की पीली चमक में छिपा है 'जहर'! इंदौर की घटना के बाद कानपुर में हड़कंप, 36 में से 3 सैंपल फेल
इंदौर की घटना के बाद कानपुर में हल्दी में मिलावट का खुलासा हुआ है, जहां 36 नमूनों में से 3 में धूल और भूसी मिली। मेटानिल येलो और लेड क्रोमेट जैसे जहरी ...और पढ़ें
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HighLights
शुभता की हल्दी में मिलावट का खेल, चमक सेहत के लिए बन रही खतरा
हल्दी की पीली चमक में घुल रहा जहर, इंदौर की घटना ने बढ़ाई चिंता
मिलावटी हल्दी से कैंसर, किडनी रोग, तंत्रिका तंत्र प्रभावित।
दो साल में 36 नमूने खाद्य विभाग ने जांच को भेजे, तीन सैंपल में धूल और भूसी मिली
जागरण संवाददाता, कानपुर। शादी-विवाह में खुशियों, परंपराओं और शुभता का प्रतीक मानी जाने वाली हल्दी अब लोगों के मन में डर पैदा कर रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर में हल्दी की रस्म के दौरान एक दूल्हे की तबीयत बिगड़ने की घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। जिस हल्दी को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, उसी में मिलावट अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। बाजार में बिक रही चमकदार हल्दी के पीछे जहरीले रंग, धूल, भूसी और केमिकल का काला खेल छिपा हुआ है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े भी मिलावट की स्थिति बयां कर रहे हैं। कानपुर में बीते दो वर्षों में हल्दी के 36 नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनमें तीन नमूनों में धूल और भूसी की मिलावट की पुष्टि हुई। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी नमूने में मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक घातक तत्व की रिपोर्ट सामने नहीं आई, लेकिन विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिलावटी मसालों का सेवन धीरे-धीरे शरीर को बीमार बना सकता है।
हल्दी में सबसे ज्यादा मिलाया जाने वाला जहरीला रंग मेटानिल येलो है। यह सिंथेटिक रंग हल्दी को अधिक चमकीला और आकर्षक दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। देखने में सुनहरी और शुद्ध लगने वाली यही हल्दी शरीर के भीतर जाकर गंभीर नुकसान पहुंचाती है।
वजन बढ़ाने के लिए करते हैं मिलावट
मिलावटखोर हल्दी का वजन बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने के लिए उसमें धूल, भूसी, स्टार्च और लेड क्रोमेट जैसे खतरनाक रसायनों तक का इस्तेमाल करते हैं। लेड यानी सीसा शरीर के लिए बेहद जहरीला माना जाता है। डाक्टरों के अनुसार यह बच्चों के मानसिक विकास पर असर डाल सकता है, जबकि वयस्कों में तंत्रिका तंत्र और रक्त संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। इंदौर की घटना के बाद लोग अब घरों में इस्तेमाल होने वाले मसालों को लेकर सतर्क हो गए हैं। खासकर शादी-विवाह के मौसम में हल्दी की रस्म के लिए बड़ी मात्रा में हल्दी खरीदी जाती है। ऐसे में सस्ती और अत्यधिक चमकीली हल्दी खतरे का संकेत हो सकती है। खाद्य विभाग ने लोगों से खुली और बिना ब्रांड वाली हल्दी खरीदने से बचने की अपील की है।
एक साल में खाद्य पदार्थों के 395 नमूने हुए फेल
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन संजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2025-26 में विभाग ने 1237 छापे डाले और 1772 नमूने लिए। इनमें 633 नमूने अधोमानक, 80 असुरक्षित और 37 मिथ्याछाप पाए गए। दूध के 163 नमूनों में से 98 मानक के अनुरूप नहीं मिले, जबकि खोया, पनीर और मिठाइयों के 603 नमूनों में 395 फेल पाए गए। अन्य खाद्य पदार्थों के 1006 नमूनों में 257 नमूने मानक से कम निकले। इन मामलों में अब तक 584 वाद न्यायालय में दायर किए जा चुके हैं।
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हल्दी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
उपभोक्ता हल्दी खरीदते समय उसकी अत्यधिक चमक, बहुत तेज पीला रंग और असामान्य खुशबू से सावधान रहें। घर में पानी में हल्दी डालकर भी प्राथमिक जांच की जा सकती है। यदि रंग तुरंत पानी में घुलने लगे तो उसमें मिलावट की आशंका हो सकती है। लोगों थोड़ी सी सतर्कता दिखाएं तो मिलावटी हल्दी की पहचान संभव हैं।
खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए विभाग लगातार छापेमारी और जांच अभियान चला रहा है। इंदौर की घटना में हल्दी के साथ मिलाए गए तेल, दूध या अन्य पदार्थों में भी मिलावट की संभावना हो सकती है। जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। बीते दो साल में हल्दी के 36 से अधिक नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसमें केवल तीन नमूने अद्योमानक मिले हैं, जिसमें कोई भी नमूना मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं मिला हैं। इस घटना के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
संजय प्रताप सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
मिलावटी हल्दी (विशेषकर लेड क्रोमेट या मेटानिल येलो युक्त) का सेवन पेट की बीमारियों से लेकर कैंसर, किडनी रोग, तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चों के विकास को बाधित करने के साथ बीपी और ब्रेन के लिए हानिकारक हो सकता है। मिलावटी हल्दी खाने से पेट में जलन, अपच, दस्त और कब्ज जैसी शुरुआती समस्या हो सकती है। इसमें प्रयोग होने वाले हानिकारक केमिकल से किडनी की कार्य क्षमता पर असर पड़ता है। महिलाओं में खून की कमी और शरीर को पैरालिसिस के खतरे का कारण भी मिलावटी हल्दी बन सकती है।
डा. जेएस कुशवाहा, जीएसवीएम मेडिकल कालेज के वरिष्ठ प्रोफेसर
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