पूर्व छात्रों ने IIT कानपुर को दिया 576 कराेड़ रुपए का दान, बनेंगे नए हॉस्टल और रिसर्च सेंटर
आईआईटी कानपुर को पूर्व छात्रों और दानदाताओं से 576 करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग मिला है, जिसमें से 187 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। ...और पढ़ें
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आईआईटी कानपुर
HighLights
आईआईटी कानपुर को पूर्व छात्रों से 576 करोड़ रुपये का दान।
नए छात्रावास, अत्याधुनिक शोध प्रयोगशालाएं और इनोवेशन सेंटर बनेंगे।
कोटक, गूगल, आईसीआईसीआई जैसे प्रमुख दानदाताओं ने किया सहयोग।
जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने में अब उसके पूर्व छात्रों की दानदाता भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। संस्थान को पूर्व छात्रों, कारर्पोरेट संस्थानों और विदेशी दानदाताओं से पिछले साल के दौरान 576 करोड़ रुपये के आर्थिक सहयोग मिला है जिसमें अब तक करीब 187 करोड़ रुपये की राशि संस्थान को प्राप्त भी हो चुकी है, जबकि शेष राशि आनी बाकी है।
संस्थान की डीन ऑफ रिसोर्सेज एंड एल्युमिनाई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस धनराशि का उपयोग नए छात्रावासों, अत्याधुनिक शोध प्रयोगशालाओं, इनोवेशन सेंटर, छात्रवृत्ति कार्यक्रम और अन्य शैक्षणिक एवं अनुसंधान सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
इसका उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध कराना है। संस्थान को सबसे बड़ा सहयोग कोटक महिंद्रा बैंक की ओर से 'कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी' की स्थापना के लिए करीब 26.29 करोड़ रुपये का मिला है। 'गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी' के विकास के लिए अनिल बंसल, जेके सीमेंट और पहल फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से लगभग 24.73 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
'सस्टेनेबल सिटीज' के लिए स्थापित किए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को गूगल डॉट ओआरजी से करीब 17.89 करोड़ रुपये का सहयोग मिला है। इसके अलावा आईसीआईसीआई फाउंडेशन ने डिजिटल हेल्थ स्टैक परियोजना के लिए 11.96 करोड़ रुपये दिए हैं, जबकि छात्रों के लिए नए छात्रावास के निर्माण हेतु करीब 9.75 करोड़ रुपये का सहयोग प्राप्त हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल उपकरण विकास और अत्याधुनिक शोध परियोजनाओं के लिए भी बड़ी संख्या में पूर्व छात्रों ने व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर आर्थिक सहयोग दिया है।
कंप्यूटर साइंस विभाग में ट्रांसलेशनल रिसर्च लैब की स्थापना के लिए सिटाडेल सिक्योरिटीज इंडिया मार्केट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 6.61 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। वहीं, श्मिट साइंसेज एलएलसी ने 4.86 करोड़ रुपये, वाधवानी चैरिटेबल फाउंडेशन ने 4.48 करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 4.21 करोड़ रुपये का सहयोग किया है।
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इसके अलावा एनएमट्रानिक्स इंडिया, जगजीत एस. बिंद्रा, वाधवानी फाउंडेशन, आशीष भाटिया, गेट्स फाउंडेशन, एनपीटीईएल, एप्टिव कंपोनेंट्स, बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स और प्रो. संदीप तिवारी सहित कई दानदाताओं ने एक से दो करोड़ रुपये तक की राशि देकर संस्थान के विकास में योगदान दिया है।
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प्रमुख योगदान एक नजर में
परियोजना सहयोग राशि
- कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी 26.29 करोड़
- गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी 24.73 करोड़
- एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सस्टेनेबल सिटीज) 17.89 करोड़
- आईसीआईसीआई डिजिटल हेल्थ स्टैक 11.96 करोड़
- नया छात्रावास 9.75 करोड़
- ट्रांसलेशनल रिसर्च लैब 6.61 करोड़
पूर्व छात्र अब केवल संस्थान का नाम रोशन ही नहीं कर रहे, बल्कि उसके भविष्य को भी आकार दे रहे हैं। देश-विदेश में स्थापित पूर्व छात्रों और संस्थागत दानदाताओं के सहयोग से कैंपस में नई शोध प्रयोगशालाएं, छात्रावास, मेडिकल और एआई से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। पूर्व छात्रों ने दान की मजबूत परंपरा विकसित की है।
प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी