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    IIT Kanpur के साइबर प्रोग्राम में नहीं मिला एडमिशन, युवक ने वेबसाइट हैक कर डाली, छोड़ा ये संदेश

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 09:31 PM (IST)

    आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी बीटेक प्रोग्राम में प्रवेश न मिलने पर एक युवक ने संस्थान की वेबसाइट हैक कर ली। उसने प्रवेश की मांग करते हुए संदेश छो ...और पढ़ें

    कानपुर आईआईटी।

    कानपुर आईआईटी।

    HighLights

    1. युवक को आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी कोर्स में प्रवेश नहीं मिला

    2. साइट इज हैक, आल आइ नीड इज जस्ट ए फेयर चांस का मैसेज लिखकर किया पोस्ट 

    3. साइबर कोर्स के लिए किया था आवेदन, व्यावहारिक अनुभव के अभाव में नहीं हुआ था चयन

    जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी कानपुर के बी. साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलने पर एक छात्र ने आईआईटी के ही साइबर सुरक्षा सिस्टम में ही सेंध लगा दी। साइट हैक करने का दावा करते हुए छात्र ने आईआईटी के सिस्टम में साइट इज हैक, आल आइ नीड इज जस्ट ए फेयर चांस (साइट हैक हो चुकी है, मुझे केवल एक निष्पक्ष अवसर चाहिए) का मैसेज भी भेजा।

    छात्र की इस हरकत ने आईआईटी के साइबर सुरक्षा सिस्टम को ही हिला दिया है। छात्र के खिलाफ पुलिस में एफआइआर दर्ज करने का प्रस्ताव आने पर आईआईटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने स्थिति संभाली और हैकिंग करने वाले युवा को बुलाकर टेस्ट लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तविक प्रतिभा है तो उसे दबाने के बजाय आगे बढ़ने का मौका देते हुए अपने कोर्स में प्रवेश भी देंगे।

    कुछ कर दिखाने और अपना लक्ष्य पाने के जुनून की यह कहानी फिल्मी भी लग सकती है लेकिन इससे यह भी समझा जा सकता है कि युवाओं में आईआईटी के साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम में प्रवेश की दीवानगी का स्तर कितना ऊंचा है। जिस छात्र ने सिस्टम में सेंध लगाने का दावा किया है अब उसके समर्थन और विरोध में इंटरनेट मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है।

    छात्र ने भी एक्स और रेडिट पर अपने दावे से संबंधित स्क्रीनशाट को साझा किया है, जिसे कई लोग अपने मैसेज के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। छात्र ने हालांकि अपने संदेश में दावा किया कि उसका उद्देश्य आईआईटी को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाना नहीं था। वह केवल अपने प्रवेश आवेदन की योग्यता को सिद्ध करना चाहता था।

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    iit kanpur

    प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल निदेशक आइआइटी। संस्थान

    आईआईटी निदेशक ने भी कहा कि बी. साइबर सिक्योरिटी कोर्स में सभी को हैकाथान के माध्यम से प्रवेश का मौका दिया गया, जहां अपने व्यावहारिक अनुभव को साझा करना था। यह छात्र कोई ऐसा प्रमाण नहीं दे पाया था, जिससे इसकी हैकिंग प्रतिभा का आकलन हो सकता। अब अगर उसका यह दावा है तो एक बार संस्थान में बुलाकर परीक्षण करेंगे। योग्यता है तो प्रवेश भी दिया जाएगा। आईआईटी ने हाल ही में सीबीएसई आनलाइन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल की खामियों को उजागर करने वाले छात्र को भी नौकरी दी है।

    छात्र का दावा- फीस भी जमा की

    साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने का दावा करने वाले छात्र ने इंटरनेट मीडिया पर बताया है कि उसने कोर्स में प्रवेश के लिए शुल्क जमा किया, सभी आवश्यक कागजात भी अपलोड किए और अपने साइबर सुरक्षा कार्यों का प्रमाण भी प्रस्तुत किया। इसके बावजूद उसका चयन नहीं हुआ। चयन प्रक्रिया के हैकाथान में उसे भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। वह 13 वर्ष की उम्र से कोडिंग कर रहा है और पारंपरिक इंजीनियरिंग प्रवेश मार्ग छोड़कर इस क्षेत्र को चुना।

    इंटरनेट मीडिया पर हो रही बहस

    इंटरनेट मीडिया पर यह मामला चर्चा में आ गया है। लोगों का दावा है कि छात्र ने आईआईटी कानपुर और मद्रास दोनों के सुरक्षा सिस्टम में सेंध लगाई है। कुछ लोग इसे उसकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण मान रहे हैं तो कई इसका विरोध भी कर रहे हैं। इसे साइबर सुरक्षा से खिलवाड़ मानकर पुलिस कार्रवाई की वकालत भी कर रहे हैं।

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