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    Income Tax Return भरसे से पहले रहें सतर्क, बैंक खातों और शेयर लाभ पर आयकर की नजर, डाटा मिलान कर भरें रिटर्न

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 09:34 PM (IST)

    आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें करदाताओं को बैंक खातों और निवेश लाभों की जानकारी का मिलान सावधानी से करना होगा। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। पिछले वित्तीय वर्ष के लिए आयकर रिटर्न की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। तकनीक का प्रयोग बढ़ने से इस बार आयकर रिटर्न में अधिक समझदारी की जरूरत महसूस की जा रही है। करदाताओं के बैंक खातों और अन्य निवेश लाभों की जानकारी भी विभाग के पास उपलब्ध होने के कारण आइटीआर में दी जाने वाली सूचनाओं की तथ्यात्मक पुष्टि अत्यंत जरूरी हो गई है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि तथ्यों की गड़बड़ी से नोटिस आने का खतरा बना हुआ है।


    आयकर विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर फार्म-1 से लेकर फार्म-5 तक सक्रिय हो गए हैं। इसके साथ ही आयकरदाताओं के बैंक खातों से मिलने वाले ब्याज, शेयर एवं म्युचुअल फंड के विवरण भी क्योंकि पहले से ही आयकर विभाग के पास हैं। इसलिए जब आयकर जमा का विवरण दिया जाता है तो इनकम टैक्स रिटर्न पोर्टल पर अन्य सूचनाएं भी दिखने लगती हैं। इसलिए डाटा मिलान बहुत जरूरी हो गया है।

    कर विशेषज्ञ एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता के अनुसार आडिट के दायरे से बाहर आने वाले वेतनभोगी और अन्य करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2026 निर्धारित है। जबकि व्यापार एवं पेशा (गैर-आडिट) वर्ग यानी ऐसे कारोबारी जो फार्म-3, फार्म-4 और फार्म-5 का प्रयोग करते हुए अपने रिटर्न भरते हैं, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त, 2026 तय की गई है। टैक्स आडिट मामले यानी ऐसे कारोबारी जिन्हें टैक्स जमा करना होता है और धारा 44ए.बी. के दायरे में आते हैं उन्हें 31 अक्टूबर, 2026 तक अपना आइटीआर जमा कराना है।

    कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी के अध्यक्ष एवं सीए अखिलेश तिवारी ने बताया कि करदाताओं को अपना रिटर्न दाखिल करने से पहले फार्म-26ए.एस., ए.आइ.एस. और टी.आइ.एस. में प्रदर्शित हो रहे आंकड़ों का मिलान अवश्य कर लेना चाहिए। इन फार्मों में बैंक खातों के ब्याज, शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर के लेन-देन और उच्च मूल्य के खर्चों की पूरी जानकारी उपलब्ध है और आयकर विभाग के पोर्टल पर अपने आप प्रदर्शित हो रही है। इसलिए अगर डाटा का सही मिलान नहीं किया गया तो विभाग की ओर से नोटिस जारी होने का खतरा बना रहेगा।

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