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    कानपुर ज्योति हत्याकांड: वह चीखती रही, मौत तक चाकुओं से गोदते रहे दरिंदे...फिर पति ने गढ़ी थी ये झूठी कहानी

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 04:57 PM (IST)

    कानपुर ज्योति हत्याकांड में पति पीयूष ने अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर पत्नी की निर्मम हत्या की साजिश रची, जिसे चाकुओं से गोदकर अंजाम दिया गया। पुलिस ने ...और पढ़ें

    दोषी पीयूष और ज्योति की फाइल फोटो। इंटरनेट मीडिया

    दोषी पीयूष और ज्योति की फाइल फोटो। इंटरनेट मीडिया

    HighLights

    1. 22 सुबूत, 37 गवाह और 175 दस्तावेजों ने अंजाम पर पहुंचाई इंसाफ की कहानी 

    2. हत्या के बाद पीयूष ने गढ़ी थी झूठी कहानी, मोबाइल नंबर की पड़ताल से सामने आई सच्चाई 

    3. बेटी के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी

    जागरण संवाददाता, कानपुर। ज्योति हत्याकांड शहर के उन प्रमुख हत्याकांडों में शामिल है, जिसे लेकर आम लोगों में गुस्सा देखने को मिला। दरिंदों ने ज्योति को तब तक चाकुओं से गोदा, जब तक कि उन्हें यकीन नहीं हुआ कि वह मर चुकी है। इस बीच ज्योति चिल्लाती रही और पीयूष फोन पर उसकी चीखें सुनता रहा।

    हत्याकांड वाले दिन पीयूष योजना के अनुसार ज्योति को रैना मार्केट स्थित वरांडा रेस्टोरेंट लेकर गया। यहां से पीयूष ने अवधेश को फोन किया, जिसके बाद वह ज्योति को लेकर निकला। जैसे ही केस्को कार्यालय से थोड़ा आगे बढ़ा पहले से तैयार अवधेश, रेनू, सोनू और आशीष सामने आ गए। पीयूष ने गाड़ी उन्हें सौंप दी और पीछे जाकर बैठ गया।

    kanpur jyoti murder case

    ज्योति हत्याकांड में 20 अक्टूबर 2022 को न्यायालय द्वारा दोषी करार देने के बाद आरोपित रेनू को जेल ले जाती पुलिस। जागरण आर्काइव

    अवधेश ड्राइविंग सीट पर बैठकर गाड़ी चलाने लगा। ज्योति आगे की सीट पर बैठी थी। रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया ओर सोनू कश्यप पीछे की सीट पर बैठ गए। आशीष कार के पीछे मोटर साइकिल से चलने लगा। रेनू और सोनू ने ज्योति को आगे की सीट से पीछे खींच लिया तभी पीयूष पीछे के गेट से नीचे उतर गया। इसके बाद दोनों ने चाकुओं से गोदकर ज्योति की हत्या कर दी।

    तेज गति से गाड़ी को पनकी रोड के ग्रीन बेल्ट तक ले गए और गाड़ी के अंदर शव को छोड़कर लाक लगा दिया। चाकू और सफेद काला चेकदार रुमाल वहीं झाड़ियों में फेंक दिया और ज्योति के जेवरात वहीं एक पोल में छिपा दिए और पीछे से आ रहे आशीष के साथ बाइक से फरार हो गए।

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    पुलिस की जांच में ही यह बात सामने आ गई थी कि ज्योति चीखती रही और दरिंदे उसके पेट में चाकू घोंपते रहे। हत्यारों ने पेट के साथ ही गर्दन पर भी चाकू से वार किया था क्योंकि गर्दन में ट्रैकिया (श्वांस ग्रंथि) कटी हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 14 चोटें आई थीं, जिसमें चाकू से सात वार किए गए थे। ज्योति की मृत्यु का कारण अधिक रक्तस्त्राव और सदमा बताया गया। ज्योति के शरीर में आधा लीटर खून मिला था।

    kanpur jyoti murder case

    ज्योति हत्याकांड में 20 अक्टूबर 2022 को न्यायालय द्वारा दोषी करार देने के बाद आरोपित मनीषा मखीजा को जेल ले जाती पुलिस। जागरण आर्काइव

    इस बीच थाने पहुंचे पियूष ने ज्योति के अपहरण की झूठी कहानी स्वरूप नगर थाने में सुनाई थी। लगभग दो घंटे बाद पनकी में ज्योति का खून से लथपथ शव पीयूष की ही कार में मिला था। पुलिस ने शक होने पर शिकंजा कसा तो असलियत सामने आ गई। इसल में पीयूष के मोबाइल नंबर 9956353535 की काल डिटेल से पुलिस पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा तक पहुंची। साथ ही एक महिला कर्मचारी की भी जानकारी पुलिस को हुई।

    kanpur jyoti murder case

    ज्योति हत्याकांड का दोषी मनीषा मखीजा। इंटरनेट मीडिया 

    दोनों से पूछताछ में पुलिस को पीयूष के दूसरे मोबाइल नंबर 8090766853 की जानकारी हुई। पुलिस ने इसकी काल डिटेल निकाली तो हत्या की साजिश का राजफाश हो गया। मनीषा पांच मोबाइल नंबर प्रयोग करती थी, जिसमें एक नंबर 8090766837 का सिम पीयूष ने उसे दिया था जो फर्जी - आइडी से लिया गया था। इन्हीं दोनों नंबरों से वह बात करते थे। हत्या और उसकी साजिश की बात इन्हीं नंबरों से होने की बात पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कही थी।

    चार्जशीट के मुताबिक पीयूष का दूसरा मोबाइल वारदात के दिन सुबह 10:11 बजे से रात 10.56 बजे तक आन रहा था। पीयूष ने शाम को 7.49 बजे अवधेश से बात की थी। इसके तुरंत बाद उसने शाम 7.50 बजे मनीषा से 1236 सेकेंड बात की। पीयूष ने रात 9.05 बजे अवधेश से बात की और इसके बाद 9.09 पर फिर मनीषा से बात की। रात 9.55 बजे फिर अवधेश से 16 सेकेंड बात की। 9.56 बजे मनीषा से 776 सेकेंड बात की।

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    ज्योति हत्याकांड में 20 अक्टूबर 2022 को न्यायालय द्वारा दोषी करार देने के बाद आरोपित सोनू और अवधेश को जेल ले जाती पुलिस। जागरण आर्काइव

    अवधेश से रात 9.05 बजे बात करने के बाद पीयूष, ज्योति को लेकर घर से निकला था। घटना से कुछ देर पहले रेनू के मोबाइल नंबर से आशीष को फोन किया था। दोनों की लोकेशन वीआइपी रोड पर मिली थी। इसी दौरान सोनू ने आशीष को काल किया। सोनू की लोकेशन कंपनी बाग से रावतपुर रोड पर मिली थी।

    खास बात यह है कि पुलिस के पास कोई विशेष सबूत नहीं था, मगर यहां तक पहुंचने के लिए पुलिस ने 13 हजार काल डिटेल छानीं। 22 सीसी कैमरों की घंटों की फुटेज खंगालीं। 12 सिम के अलाट होने से इस्तेमाल होने तक का सफर पकड़ा और डिलीट हो चुके 2200 मैसेज पुनर्जीवित कराए।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट

    • शरीर पर थे चाकू के सात जख्म
    • दाहिने गाल से गर्दन की ओर डेढ़ सेमी जख्म
    • गर्दन के बीचोंबीच चार सेमी अंदर तक जख्म
    • छाती के बीच में चार सेमी तक जख्म
    • पीठ के दाहिनी तरह मांसपेशी में दस सेमी गहरा जख्म
    • रिंग फिंगर में दो सेमी जख्म (बचने के लिए हाथ बढ़ाया तो चाकू मारा)
    • बाए हाथ की रिंग फिंगर के ऊपर एक सेमी का जख्म
    • स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) के दाहिने तरफ 2.5 सेमी हड्डी तक जख्म


    हत्याकांड से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

    • हत्या वाले दिन से पहले ज्योति की दो बार हत्या की कोशिश हुई लेकिन, हर बार वह बच गई। पहला प्रयास 13 जुलाई 2014 को तब हुआ जब पीयूष उसे लेकर सचेंडी स्थित ओरियंट रिसार्ट गया था। दूसरा प्रयास 20 जुलाई को गंगा बैराज पर हुआ। अगर 27 जुलाई को भी ज्योति बच जाती तो उस पर अगला हमला एक अगस्त को होता।
    • पीयूष की प्रेमिका मनीषा की शादी होने वाली थी। लड़के वाले उसे देखने आ रहे हैं। यह बताने के लिए मनीषा ने पीयूष को फोन मिलाया। जल्दबाजी में मनीषा अपनी बात कह गई लेकिन, दूसरी ओर फोन पीयूष ने नहीं बल्कि ज्योति ने उठाया। ज्योति ने सब जान लिया था और इसी वजह से हत्या की साजिश शुरू हो गई।
    • हत्यारों ने पीयूष को मोबाइल पर ज्योति की चीखें सुनाई थीं। यह भी कहा कि काम हो गया। इसके बाद ही वह शिकायत करने थाने पहुंचा।
    • मनीषा को जब गिरफ्तार किया गया तो उसके दाहिने पैर में प्लास्टर बंधा था। बाद में जांच हुई तो सामने आया कि कानून से बचने के लिए उसने फर्जी तरीके से पैर में प्लास्टर बंधवा लिया था।
    • हत्या वाले दिन पीयूष ने सात घंटे में मनीषा को 150 एसएमएस भेजे थे। उसके कई अन्य लड़कियों से भी संबंध जांच में सामने आए थे।

    ये भी जानें

    • 27 जुलाई 2014 को ज्योति की चाकू से गोदकर हत्या
    • 30 जुलाई 2014 को पीयूष को जेल भेजा गया
    • 7 सितंबर 2017 को पीयूष की पहली जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज हुई
    • 31 जुलाई 2019 को पीयूष की दूसरी जमानत याचिका खारिज
    • 15 अक्टूबर 2020 को हाईकोर्ट ने पीयूष को जमानत दी
    • 8 अक्टूबर 2020 को फर्जी सिम से धोखाधड़ी मामले में हाईकोर्ट से पियूष को जमानत
    • 20 अक्टूबर 2022 को पियूष उसकी प्रेमिका मनीषा सहित 6 को दोषी करार दिया गया
    • 20 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रेमिका मनीषा को छोड़ा, जबकि अन्य की सजा बहाल रखी


    चार्जशीट में दाखिल किए गए थे ये सुबूत

    • पीयूष से बरामद मनीषा का ब्लैक बेरी मोबाइल
    • हत्यारोपित रेनू, सोनू द्वारा खून से सने हाथ को पोछने वाले सफेद चेकदार रुमाल
    • हत्यारोपित पीयूष की वारदात के समय पहनी गई टी-शर्ट
    • पोस्टमार्टम से मिले मृतका के खून से सने कपड़े, नाखून में फंसा बाल
    • वारदात में प्रयोग की गई बाइक
    • सोनू और रेनू से बरामद खून से सने कपड़े
    • अभियुक्त अवधेश, रेनू व आशीष का मोबाइल
    • ज्योति की डायरी
    • कार होंडा एकार्ड में आगे की बाईं सीट के पास से काटन से मिला ब्लड सैंपल
    • ड्राइवर के पीछे की सीट से काटन से
    • मिला ब्लड सैंपल
    • एक सफेद रुमाल खून से सना मिला
    • कार की पिछली सीट पर मिले हेयर सैंपल
    • ड्राइवर के पीछे की सीट पर मिले बैग से बरामद तीन चाकू
    • खून से सनी लेडीज सैंडिल
    • एक एफपीटी कार्ड पर पांच फिंगर प्रिंट
    • वरांडा होटल की सीसीटीवी फुटेज
    • माल की सीसीटीवी फुटेज
    • बरामद आलाकत्ल (चाकू)
    • ज्योति की तीन अंगूठी, दो कान की बाली
    • होंडा एकार्ड की चाबी
    • होंडा एकार्ड की घटना स्थल पर ली गई फोटोग्राफ
    • ज्योति के फोटोग्राफ


    चार्जशीट का अहम तथ्य

    चार्जशीट के मुताबिक पीयूष वारदात के दिन ज्योति को वरांडा होटल ले गया था, जहां खाना खाते समय ज्योति से झगड़ा करने लगा। ज्योति को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद फोन पर बात करते हुए बाहर चला गया। 10 मिनट बाद वापस लौटा। वरांडा होटल के कर्मचारी संजय खान और मानिक चक्रवर्ती को गवाह बनाते हुए सीसी कैमरे की फुटेज दाखिल की गई। हत्याकांड से पहले ज्योति आखिरी बार पति पीयूष के साथ थी। जिसके सुबूत के रूप में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज दाखिल की थी।


    दैनिक जागरण की फोटो बनी थी शक की पहली वजह

    पीयूष ने ही पत्नी को अगवा करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। उस वक्त दैनिक जागरण में एक फोटो प्रकाशित हुई, जिसमें यह साक्ष्य दिया गया कि जब बदमाशों ने ज्योति को अगवा किया तो उसने दूसरी शर्ट पहनी थी और जब शिकायत करने थाने पहुंचा तो दूसरी शर्ट पहने था। यानी उसने शर्ट बदली है। सवाल हुआ कि ऐसा कैसा हो सकता है। पुलिस को तभी पीयूष पर शक गहरा गया था।


    जस्टिस फार ज्योति

    ज्योति को न्याय दिलाने के लिए पिता शंकर लाल नागदेव ने दो अगस्त 2014 को एक फेसबुक पेज जस्टिस फार ज्योति-पूजा नागदेव कानपुर के नाम से बनाया गया था। इसमें पूरे सालों की संघर्ष की दास्तां दर्ज है। इस फेसबुक पेज को वर्तमान में 19 हजार से ज्यादा लोग फालो करते हैं। पिता शंकर नागदेव ने बताया कि उनकी बेटी बीएड में गोल्ड मेडलिस्ट थी। जब शादी हुई थी, उस वक्त वह जबलपुर के एक प्राइवेट स्कूल में 40 हजार रुपये में नौकरी कर रही थी।

    kanpur jyoti murder case

    ज्योति के पिता शंकर नागदेव। स्वयं


    न्याय के लिए डटे रहे पिता, बोले-पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे

    शंकर नागदेव ने अपने बेटी के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहने वाले शंकर नागदेव ने सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। तारीख पर तारीख मिलती रही, लेकिन वह पैरवी के लिए मुस्तैदी से हर तारीख पर कोर्ट में खड़े रहे। उनका प्रयास रहा कि उनकी बेटी के हत्यारों को सजा मिले।

    बेटी के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी 

    मनीषा मखीजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने पर उनका कहना है कि वह पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। फोन पर बातचीत में वह कई बार भावुक हुए। बात करते-करते कई बार उनका गला रुंधा और मानों जुबान ने साथ देना छोड़ दिया। लंबी सिसकारी सुनाई दी और थोड़ी देर के लिए शांत..फिर उधर से आवाज आई। कहा, उन्हे न्याय मिला है। वह अब भी पैरवी करते रहेंगे। मनीषा मखीजा की दोषमुक्ति पर वह पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।

    सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक जमकर की पैरवी

    उनका कहना है कि सात साल से ज्यादा सजा पाने वाले दोषी को जिला जेल से सेंट्रल जेल भेज दिया जाता है, लेकिन पियूष श्यामदसानी अभी भी जिला जेल में ही है। बाकी दोषियों की तरह उसे भी जिला जेल में नहीं रखना चाहिए। इस बारे में उन्होंने कई बार जेल अफसरों से पत्राचार किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल किया, ऐसी कौन सी मजबूरी है, जो पियूष श्यामदसानी को जिला जेल में रखा जा रहा है। इस बारे में जेल अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन मिलाया, लेकिन रिसीव नहीं हुआ।

    दो साल पहले लगी थी पीयूष के घर आग

    पियूष के घर में एक नवंबर 2024 को आग भी लगी थी। अग्निकांड में बिस्कुट कारोबारी संजय श्याम दासानी और उनकी पत्नी कनिका व नौकरानी छवि चौहान की मौत हो गई थी। संजय पीयूष के चचेरे भाई थे। इलेक्ट्रानिक लाक न खुलने की वजह से वह अंदर फंस गए थे।

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