Kanpur Kidney Case: नशा, ऐश और फिजूलखर्ची... डोनर आयुष की चौंकाने वाली कहानी, पिता ने की आत्महत्या, पत्नी भी छोड़ गई
Kanpur Kidney Case: कानपुर किडनी कांड में डोनर आयुष की चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। बेगूसराय के एक संपन्न परिवार से होने के बावजूद, नशे और फिजूलखर् ...और पढ़ें
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मेडिकल कालेज कानपुर में भर्ती आयुष। जागरण अर्काइव
HighLights
किडनी डोनर आयुष बिहार के बेगूसराय के औगान गांव के संभ्रांत परिवार का
अय्याशी के लिए पहले खून बेचा और अब उसने अपनी किडनी तक बेच दी
साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टेबाजी में भी आयुष की संलिप्तता पाई गई है
30 मार्च को पुलिस ने कानपुर में किडनी कांड का किया था राजफाश
जागरण न्यूज नेटवर्क, कानपुर। Kanpur Kidney Case: कानपुर किडनी कांड में डोनर आयुष की कहानी चौंकाने वाली है। साइबर ठगी से लेकर नशा, मौज-मस्ती और फिजूलखर्ची...उसके जीवन का सच है। पिता आत्महत्या कर चुके हैं, पत्नी भी छोड़कर जा चुकी है। पैसों के लिए किडनी बेचने से शुरू हुई यह कहानी अब कई सवाल खड़े कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।
बेगूसराय से सामने आया ये सच
कानपुर के चर्चित किडनी कांड में सामने आया बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष। बेगूसराय जिले के औगान गांव के एक संभ्रांत परिवार में जन्मा आयुष गलत संगत, नशे और ऐशो-आराम की जिंदगी के चलते इस कदर भटक गया कि उसने पहले अपनी पुश्तैनी जमीन गंवाई और अंततः किडनी तक बेचने को मजबूर हो गया।

यह फोटो एआई जनरेटेड है।
पिता ने कर ली थी आत्महत्या
औगान गांव के ग्रामीण बताते हैं कि आयुष के पिता राजेश चौधरी उर्फ फनटुश इलाके के संपन्न जमींदारों में गिने जाते थे। आयुष को विरासत में अच्छी-खासी जमीन और संपत्ति मिली थी। बचपन में अच्छे स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही वह गलत संगत में पड़ गया। धीरे-धीरे उसे नशे, मौज-मस्ती और फिजूलखर्ची की आदत लग गई। पिता ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उसकी हरकतें लगातार बिगड़ती चली गईं। बेटे की करतूतों से आहत होकर करीब आठ-नौ वर्ष पूर्व पिता ने आत्महत्या कर ली।
छोटे भाई साथ रखने से किया था मना
ग्रामीणों के मुताबिक, आयुष वर्ष 2021 में वापस गांव आया, लेकिन उसके छोटे भाई रिषभ ने उसे अपने साथ घर में रखने से इन्कार करते हुए भगा दिया। इसके बाद से आयुष बेगूसराय नहीं आया। आयुष की करतूतों की वजह से उसका परिवार बिखर गया। मां अकेले गांव में रह रही हैं, जबकि दादी रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
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युवती से दिल्ली में की थी शादी
पिता की मौत के बाद आयुष पूरी तरह बेलगाम हो गया। उसने पुश्तैनी जमीन और जायदाद बेचकर ऐशो-आराम की जिंदगी शुरू कर दी। दोस्तों के साथ जन्मदिन मनाने के लिए वह हवाई जहाज से मुंबई तक जाता था। इसी दौरान वह सोशल मीडिया के जरिए एक युवती के संपर्क में आया, जिससे उसने शादी कर ली। हालांकि शादी ज्यादा दिन नहीं चली और कुछ ही महीनों में पत्नी लाखों रुपये लेकर उसे छोड़कर चली गई।
देहरादून में बना डिलीवरी ब्वाय
इसके बाद भी आयुष की जिंदगी में सुधार नहीं आया। वह देहरादून पहुंचा और डिलीवरी ब्वाय का काम करने लगा, लेकिन वहां भी वह एक अन्य युवती के चक्कर में पड़कर अपनी बची-खुची कमाई गंवा बैठा। आर्थिक तंगी बढ़ने पर उसने पहले खून बेचने का रास्ता अपनाया और फिर कर्ज व गलत आदतों के दबाव में किडनी बेचने का फैसला कर लिया।
दोस्तों के कहने पर तैयार हुआ किडनी बेचने को
आयुष को लेकर इंटरनेट मीडिया पर एक खबर पिछले दिनों चर्चित हुई थी, किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह ने उसे फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के एक किडनी का हवाला देकर किडनी बेचने के लिए तैयार हुआ था। मगर, पुलिस की जांच में सामने आया है कि आयुष के दो दोस्त हैं, जो पूर्व में किडनी दे चुके हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने किडनी बेची थी या दान दी थी, लेकिन सही है कि उन दोस्तों ने उसे किडनी बेचने के लिए तैयार किया था। उन्होंने बताया था कि एक किडनी पर वह आराम से जीवन यापन कर रहे हैं, तो वह भी किडनी बेचकर अपने उधार चुका सकता है।
टेलीग्राम ग्रुप के जरिए आया किडनी खरीद-फरोख्त में
जांच में सामने आया है कि आयुष टेलीग्राम ग्रुप के जरिए सक्रिय अवैध किडनी खरीद-फरोख्त गिरोह के संपर्क में आया। इसी नेटवर्क के माध्यम से उसने अपनी किडनी बेच दी। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि उसका संबंध साइबर ठग गिरोह से भी रहा है और वह म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था। गुजरात की साइबर सेल ने भी उसे नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर पेश होने का आदेश दिया है।
किडनी देने आ रहा था, रास्ते में हार गया छह हजार रुपये
आयुष को लेकर जो सूचनाएं पुलिस को मिली हैं, वह बेहद चौकाने वाली हैं। प्रशिक्षु आइपीएस सुमेध जाधव ने बताया कि अब तक हुई जांच में सामने आया है कि आयुष का संबंध साइबर ठग गिरोह से है। वह साइबर ठगों को म्यूल अकाउंट मुहैया कराया था। इस दिशा में जांच चल रही है। इसके अलावा आयुष ड्रग्स भी लेता है। वह आनलाइन सट्टे का भी बड़ा खिलाड़ी। सट्टे का वह किस तरह का लती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आपरेशन वाले दिन अफजाल और परवेज जब उसे लेकर मेरठ से कानपुर आ रहे थे तो रास्ते में आयुष ने अफजाल से छह हजार रुपये उधार मांगे। इसके बाद वह कार में ही उधार के छह हजार रुपयों से आनलाइन सट्टा खेलने लगा। हालांकि वह सट्टे कह रकम हार गया।

तबीयत बिगड़ने पर रेफर
कानपुर के मेडलाइफ अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया, लेकिन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई। जरूरी इम्युनोलॉजिकल जांच और एचएलए टेस्ट तक नहीं किए गए। ऑपरेशन के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर किया गया, जहां इलाज के बाद हालत स्थिर होने पर उसे छुट्टी दे दी गई। किडनी पाने वाली महिला की हालत में भी सुधार बताया जा रहा है।
गुजरात की साइबर सेल ले भेजा नोटिस
ग्रामीणों के अनुसार, आयुष ने अपने बारे में गलत जानकारी दी है। वह न तो गरीब परिवार से है और न ही उसकी जमीन गिरवी रखी है। बल्कि वह साइबर अपराध से जुड़ा हुआ है। आशंका है कि उसके खाते में ठगी कर रकम भी आती है। गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले की साइबर सेल ने शुक्रवार को भगवानपुर थाने में आयुष के खिलाफ नोटिस भेजा था। नोटिस तामील कराने पुलिस टीम शनिवार को आयुष के घर पहुंची थी, लेकिन उसके घर पर ताला लगा मिलने पर नोटिस को वापस किया जा रहा है। जारी नोटिस में बताया गया कि आयुष ने अपने यूको बैंक खाते के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी व हवाला का कारोबार किया है। नोअिस मिलने के 15 दिन के भीतर साइबर सेल ने हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
जानें आखिर क्या था किडनी कांड

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