फाइलों में कैद हुआ कानपुर की जमीनों का सच, 1 साल से अधर में अटका नजूल और सीलिंग विवाद
कानपुर में नज़ूल और सीलिंग भूमि विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया शासन स्तर पर धीमी पड़ गई है, जिससे एक साल से अधिक समय से कोई बड़ा फैसला नहीं हो सका ह ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
कानपुर में नज़ूल-सीलिंग भूमि विवादों का निस्तारण धीमा।
शासन स्तर पर एक वर्ष से अधिक समय से निर्णय लंबित।
23 नए मामले सामने आए, बिना अनुमति जमीनें मुक्त।
जागरण संवाददाता, कानपुर। जिले में सीलिंग और नजूल भूमि से जुड़े विवादित मामलों के निस्तारण की रफ्तार शासन स्तर पर धीमी पड़ी है। जिला प्रशासन लगातार रिपोर्टें और संस्तुतियां और रिमाइंडर शासन को भेज रहा है, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद किसी भी बड़े मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।
इस बीच सीलिंग विभाग ने ऐसे ही 23 और नए मामलों की रिपोर्ट भी जिलाधिकारी को सौंप दी है, जिनमें आरोप है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना ही जमीनों को सीलिंग से मुक्त कर दिया गया था। इन मामलों की जांच पूरी होने के बाद इन्हें भी शासन को भेजे जाने की तैयारी है।
जिला प्रशासन इससे पहले सीबीसीआईडी कार्यालय, संगीता अपार्टमेंट, आगमन गेस्ट हाउस समेत कई नजूल संपत्तियों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज चुका है। वहीं सीलिंग भूमि प्रकरण में पिछले तीन वर्षों के दौरान दो अलग-अलग जिलाधिकारियों ने शासन को पत्र भेजकर निर्णय लेने का अनुरोध किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं हो सका है।
इससे पहले प्रशासन ने ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) और नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन (एनटीसी) की 58 नजूल संपत्तियों की विस्तृत रिपोर्ट भी शासन को भेजी है। इनमें री-एंट्री, लीज समाप्ति, कब्जों की स्थिति और उच्च न्यायालय में लंबित वादों का पूरा ब्यौरा शामिल है। शासन ने नजूल भूमि से जुड़े मामलों के निस्तारण की जिम्मेदारी स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (एसटीसी) को सौंप दी है, लेकिन कई दौर के पत्राचाराें के बाद भी इन मामलों में कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
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प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार बीआईसी और एनटीसी की बंद मिलों की जमीनें वर्षों से कानूनी विवाद, लिक्विडेशन प्रक्रिया और कब्जों के कारण उलझी हुई हैं। जिला प्रशासन अब तक 18 संपत्तियों पर री-एंट्री की कार्रवाई पूरी कर चुका है, जबकि लगभग 40 संपत्तियों में कंपनियों के लिक्विडेटर नियुक्त होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। सबसे बड़ा विवाद म्योर मिल की जमीन को लेकर है। यहां प्रशासन ने री-एंट्री की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन मामला उच्च न्यायालय पहुंचने के बाद स्थगन आदेश मिलने से पूरी प्रक्रिया रुक गई।
बीआईसी की पांच प्रमुख मिलें लाल इमली, एल्गिन मिल-एक, एल्गिन मिल-दो, कानपुर टेक्सटाइल्स और ब्रस वेयर सहित कई पुराने बंगले भी इस कार्रवाई के दायरे में हैं। इनमें एल्गिन गेस्ट हाउस, कैनिलवर्थ, पुलिस कमिश्नर आवास, आशियाना, एवरस्ले और डेल जैसे भवन शामिल हैं। बीआईसी की संपत्तियों का कुल क्षेत्रफल 2,86,780.46 वर्गमीटर तथा प्लाटों का संयुक्त क्षेत्रफल 77,038.66 वर्गमीटर है।
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इन संपत्तियों की लीज वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है और अधिकांश मामलों में री-एंट्री को लेकर कानूनी पेच बने हुए हैं। दूसरी ओर एनटीसी के अधीन म्योर मिल्स (49.20 एकड़), न्यू विक्टोरिया मिल्स (31.50 एकड़), स्वदेशी काटन मिल्स (67.36 एकड़), लक्ष्मीरतन काटन मिल्स (76.57 एकड़) और अथरटन मिल्स (15.05 एकड़) समेत कुल 239.68 एकड़ भूमि प्रशासन के रिकार्ड में दर्ज है।
इनमें म्योर मिल और न्यू विक्टोरिया मिल की जमीन नजूल श्रेणी में आती है। इन सभी मामलों की रिपोर्ट भेजी गई है, लेकिन शासन और प्रशासन स्तर से केवल कागजी कार्रवाई होती रही,लेकिन धरातल पर कोई विकास की तस्वीर नजर नहीं आईं।
नजूल और सीलिंग भूमि से जुड़े सभी मामलों की रिपोर्ट नियमानुसार शासन को भेजी जा चुकी है। सीलिंग विभाग से प्राप्त 23 नए मामलों की भी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से भेजी जाएगी। नजूल भूमियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई चल रही है, इस सुनवाई के पूरा होने के बाद ही शासन स्तर पर नजूल भूमियों को लेकर निर्णय लिए जाएंगे।
-विवेक कुमार चतुर्वेदी, एडीएम वित्त एवं राजस्व