तारीख पर तारीख से परेशान होकर कबूला जुर्म... फिर कोर्ट ने भी सुनाई ऐसी सजा, मामला पिता और दत्तक बेटे से जुड़ा
कानपुर में 16 साल से तारीख पर तारीख मिलने से परेशान एक व्यक्ति ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। कोर्ट ने उसकी परेशानी और अपराध की प्रकृति को देखते हुए छह म ...और पढ़ें

HighLights
16 साल से तारीख मिलने से परेशान आरोपी ने कबूला जुर्म
कोर्ट ने छह माह की परिवीक्षा अवधि पर रिहा किया
दत्तक पुत्र पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी का आरोप
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। 16 साल से तारीख पर तारीख मिलने के बाद और कोर्ट के चक्कर लगाने से परेशान आरोपित ने खुद ही गुनाह कबूल लिया। उसकी इस परेशानी और अपराध की प्रकृति को देखते हुए कोर्ट ने भी सजा सुनाई।
अभियोजन के एक भी गवाह पेश न कर पाने पर मारपीट के मुकदमे में 16 साल से तारीख पर तारीख लगती रहीं। आखिर अभियुक्त ने जुर्म कबूल कर लिया। इस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम अमित सिंह ने उसे छह माह की निगरानी (परवीक्षा अवधि ) की सजा सुनाते हुए 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। शर्त लगाई है कि इस दौरान वह दोबारा कोई अपराध नही करेगा।
ग्राम सिगरवा थाना सहजनेवा जिला गोरखपुर के इंद्रासन ने नौ जून 2010 को बर्रा थाने में अपने दत्तक पुत्र अमर सिंह उर्फ रामदुलारे के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा था कि अमर की मारपीट से तंग आकर एक साल पहले बर्रा का अपना मकान बेचकर वह गोरखपुर चला गया था।
नौ जून को लौटा तो टैंपो स्टैंड पर अमर ने रोक लिया और गालियां देते हुए कहा कि यहां से चले जाओ नहीं तो जान से मार दूंगा। मारपीट करने लगा तो आसपास के लोगों ने बचाया था। इस मामले में 16 अगस्त 2013 को अमर के खिलाफ कोर्ट में आरोप तो तय हो गए थे लेकिन अब तक अभियोजन एक भी गवाह कोर्ट में पेश नहीं कर सका था।
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अमर सिंह ने अपने अधिवक्ता कैलाश सैनी के माध्यम से कोर्ट में जुर्म कबूल करने का का प्रार्थना पत्र दिया। इस पर कोर्ट ने उसे दोषसिद्ध करार देते हुए बीस हजार रुपये के निजी मुचलके पर छह माह की परिवीक्षा अवधि पर रिहा करने का आदेश दिया।