लो फिर डूब गया... नगर निगम के 116 'ब्लैक स्पॉट' वाले दावे हुए फेल, रविवार की बारिश में टापू बन गए कानपुर का ये इलाका
कानपुर में नगर निगम के 116 ब्लैक स्पॉट के दावों के बावजूद पहली बारिश में ही कई इलाके जलमग्न हो गए, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ...और पढ़ें
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गोविंद नगर चावला मार्केट चौराहा के पास भरे पानी से निकलते लोग |जागरण
HighLights
कानपुर में नगर निगम के 116 ब्लैक स्पॉट के दावे विफल
दक्षिण कानपुर, किदवई नगर में भारी जलभराव से जनजीवन प्रभावित
स्थायी जल निकासी समाधान की कमी से लोग परेशान
जागरण संवाददाता, कानपुर। नगर निगम ने शहर में जलभराव वाले 116 ब्लैक स्पाट चिह्नित कर विशेष तैयारियों का दावा जरूर किया है, लेकिन शहर में कई ऐसे इलाके हैं जहां हर मानसून में जलभराव लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है। वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, मगर स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है। रविवार शाम को एक बार फिर बारिश का पानी दक्षिण क्षेत्र के कई हिस्सों में भर गया।
वहीं बेरतरीब खोदाई और ठीक से गड्ढे न भरने से पोली सड़क भी मुसीबत बन रही है। धंस रही है। करीब एक दर्जन स्थानों में धंसी सड़क खतरनाक हो गई है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका दक्षिण क्षेत्र है। इसमें भी सबसे अधिक प्रभावित इलाका किदवई नगर माना जाता है। यहां वाई ब्लाक, के-ब्लाक और डी ब्लाक में मामूली बारिश के बाद ही सड़कें पानी से भर जाती हैं।
बाबूपुरवा में घरों से निकलना मुश्किल
बाबूपुरवा स्थित सेंटर पार्क के आसपास भी जलभराव आम बात है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि लोगों को घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में फंस जाते हैं, जबकि पैदल निकलने वालों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
यहां हर साल ऐसे ही हालात
गोविंदनगर, जूही, सफेद कालोनी, लाल कालोनी और हरी कालोनी में भी हर साल ऐसे ही हालात देखने को मिलते हैं। वसंत विहार, यशोदा नगर, गोपाल नगर, खाड़ेपुर योगेंद्र विहार और कर्रही जैसे क्षेत्रों में भी बारिश का पानी घंटों तक सड़कों व गलियों में जमा रहता है।
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जनजीवन होता प्रभावित
कई स्थानों पर नालियां उफनाने लगती हैं और पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। इससे न केवल जनजीवन प्रभावित होता है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ जाती है।
नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं
कई स्थानों पर नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं, जिससे जलनिकासी का संकट रहता है। वहीं, नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय का कहना है कि 116 ब्लैक स्पाट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर पंपिंग सेट लगाकर पानी निकाला जाएगा और संबंधित टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
जूही खलवा पुल का समाधान नहीं
दक्षिणवासियों का कहना है कि हर साल अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं, जबकि जरूरत स्थायी जलनिकासी की है। स्थायी व्यवस्था होने के बाद ही लोगों को जलभराव से निजात मिल सकेगा। जूही खलवा पुल के जलभराव से अभी तक निजात नहीं मिल पाई है। हर बार बारिश में भर जाता है।
यहां सीवर लाइन ही चोक
यहीं हाल जरीब चौकी से लेनिन पार्क, मरियमपुर चौराहा, आचार्य नगर समेत कई जगह जलभराव हो जाता है। यहां भी घंटों बाद पानी निकलता है। जरीब चौकी से पीरोड की तरफ का नाला व सीवर लाइन चोक हो गई है। नई डाली जाए तभी निजात मिल पाएगी। देवकी चौराहा से छपेड़ापुलिया तक खोदी सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके अलावा बंद नालियों के कारण रास्ता खतरनाक हो गया है और धूल उड़ती है।
80 फीट रोड तीन जगह पर धंसी
इसके अलावा बरसात में पोली सड़कें भी खतरनाक हो गई है। 80 फीट रोड में तीन जगह सड़कें धंसी है। एक जगह गड्ढा भर दिया है। एक में शटरिंग लगाकर तिरपाल डाल दिया है। वहीं ब्रह्मनगर चौराहा के पास लीकेज में एक और गड्ढा हो गया है। पीरोड में तीन जगह सड़क लीकेज के कारण बैठ गई है। इसके कारण जल निकासी में दिक्कत आ रही है। मालरोड में भी तीन जगह सड़क धंसी है। ठीक से चलने लायक न किए जाने के कारण सड़कें धंस रही है।
प्रभावित इलाके
किदवई नगर (वाई, के और डी ब्लाक), बाबूपुरवा सेंटर पार्क और उसके आसपास का इलाका, गोविंदनगर में चावला मार्केट चौराहा और बाजार रोड, जूही में परमपुरवा का इलाका, सफेद कालोनी, लाल कालोनी, हरी कॉलोनी, वसंत विहार, यशोदा नगर, गोपाल नगर, साकेत नगर, निराला, नौबस्ता का खाड़ेपुर योगेंद्र विहार और बर्रा का कर्रही इलाका।
जलभराव के प्रमुख कारण
- नालों और नालियों की समय पर व प्रभावी सफाई नहीं होना।
- मुख्य नालों में सिल्ट और कचरा जमा रहने से पानी का बहाव बाधित होना।
- कई मुहल्लों में जलनिकासी नेटवर्क का पुराना और क्षमता से कम होना।
- सड़कों का स्तर ऊंचा होने से घर और गलियां नीचे होने से पानी का भरना।
- नालियों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के कारण प्रवाह का रुकना।
- नालियों में पालीथिन, प्लास्टिक और ठोस कचरा फेंके जाने से समस्या।
- निचले क्षेत्रों में अधिक बारिश होने पर आसपास का पानी भी आकर जमा हो जाना।
- सीवर और नाली के आपस में प्रभावित होने से बरसात में पानी की निकासी धीमी पड़ना।
- नई कालोनियों और बढ़ते शहरीकरण के अनुरूप जलनिकासी व्यवस्था का विस्तार न होना।
- तेज बारिश के दौरान मुख्य नालों के ओवरफ्लो होने से सड़कों और गलियों में जलभराव होना।
हर बारिश में नगर निगम बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन सड़कें फिर भी जलमग्न हो जाती हैं। जलभराव से लोग परेशान हैं।
-अमित कश्यप, कारोबारी, जरौली फेस वन बर्रा
कई बार मांग उठाने के बाद अब गहरी सीवर लाइन डाली जा रही है। उम्मीद है कि सीवर लाइन पड़ने के बाद बारिश में लोगों को जलभराव की समस्या से जरूर राहत मिलेगी।
-उमा देवी, गृहणी, खाड़ेपुर नौबस्ता
ब्लैक स्पाट की पहली बार चिह्नित किए गए है। किस कारण पानी भरता है उनको कारणों की पहचान करके भविष्य में जलभराव न हो। इसको लेकर सभी जोनल अभियंताओं को कार्रवाई के आदेश दिए है।
अर्पित उपाध्याय. नगर आयुक्त
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