कानपुर चिड़ियाघर झील में सैंकड़ों मछलियों की मौत, पहले हुई लापरवाही से नहीं लिया था सबक
कानपुर चिड़ियाघर की झील में गंदे नाले का पानी मिलने से 1000 से अधिक मछलियां मर गईं, जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो गई। झील की सफाई के लिए केमिकल डाल ...और पढ़ें

चिड़ियाघर के नाले में उतराती मछलियां। चिड़ियाघर
HighLights
कानपुर चिड़ियाघर झील में 1000 से अधिक मछलियां मृत पाई गईं।
गंदे नाले के पानी से झील में ऑक्सीजन की कमी हुई।
नगर आयुक्त को नाले का पानी रोकने हेतु पत्र लिखा।
जागरण संवाददाता, कानपुर। चिड़ियाघर के जंगल सफारी क्षेत्र की झील में 1000 से अधिक मछलियां मरीं मिली हैं। जांच करने पर पता चला कि वर्षा की आजादनगर रोडवेज डिपो क्षेत्र नाले का गंदा पानी झील में पहुंचा है। गंदे पानी की वजह से झील के पानी में आक्सीजन की मात्रा कम हो गई। इसकी वजह से मछलियां मर गई। झील को साफ करने के लिए टाक्सिन रोकने वाला केमिकल टाक्सीमा व आक्सीजन का स्तर बढ़ाने वाली ओटू मैक्स टेबलेट डाली गई है। नगर आयुक्त को पत्र लिख इसकी जानकारी दी गई है। नाले का पानी रोकने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
चिड़ियाघर के जंगल सफारी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरन चौकीदार को झील में मछलियां उतराती मिली। उन्होंने इसकी जानकारी चिड़ियाघर के निदेशक डा.कन्हैया पटेल व क्षेत्रीय वन रक्षक फिरोज खान को दी। उन्होंने मौके पर पहुंच कर देखा तो काफी संख्या में मछलियां मरी हुई थी। झील के पानी का रंग भी बदला हुआ था जांच की गई तो झील में नाले का पानी मिलने की जानकारी सामने आई। गंदा पानी विकास नगर नाले से झील में पहुंचा था। वर्षा होने से नाले का पानी ओवरफ्लो हुआ और झील के पानी में पहुंच गया।
चिड़ियाघर के निदेशक डा. कन्हैया पटेल ने झील के पानी को साफ करवाने के लिए केमिकल व आक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए दवा डलवाई। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिख नाले का पानी झील में आने से अवगत कराया। इसको रोकने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्षा के कारण अगर नाले का पानी इसी तरह झील में आता रहा तो अन्य जलजीवों के लिए भी खतरा बना रहेगा झील में मछलियों के अतिरिक्त मगरमच्छ व कछुएं भी हैं।
पहले भी नाले का पानी आने से मर चुकी मछलियां
वर्षा में पहले भी नाले का पानी आने से कुछ वर्ष पहले झील में मछलियां मर चुकी हैं। उस समय चिड़ियाघर प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पानी की जांच कराई थी। जांच में पानी प्रदूषित पाया गया था। आक्सीजन का स्तर बहुत कम था। वर्षा के कारण नाले का पानी ओवर फ्लो होकर झील में मिलने की समस्या का समाधान न होने से दोबारा मछलियां मरी हैं।