IIT Kanpur से भारत के भावी अंतरिक्ष महायुग का शंखनाद, 18 जुलाई को लॉन्च होगा निजी कंपनी का पहला ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1'
आईआईटी कानपुर के दीक्षा समारोह में डॉ. पवन गोयनका ने भारत के निजी अंतरिक्ष महायुग का शंखनाद किया। 18 जुलाई को स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल रॉकेट ...और पढ़ें

आईआईटी के 59वें दीक्षा समारोह में संबोधित करते डॉ. पवन गोयनका । जागरण
HighLights
इन-स्पेस के अध्यक्ष पद्मश्री डा. पवन गोयनका ने भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की दी जानकारी
पांच साल में 40 से बढ़कर 400 हुए स्पेस स्टार्टअप, निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में लहराएंगी तिरंगा
बोले- स्पेस सेक्टर को निजी उद्योगों के लिए खोलने के निर्णय के बाद बढ़े निवेश और नवाचार
जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी का 59वां दीक्षा समारोह बुधवार को सिर्फ डिग्रियों का उत्सव नहीं, बल्कि भारत के भावी अंतरिक्ष महायुग के शंखनाद का गवाह भी बन गया। समारोह के मुख्य अतिथि और इन-स्पेस के अध्यक्ष पद्मश्री डा. पवन गोयनका ने छात्रों से सीधा संवाद किया और सपनों व सफलता की कहानी साझा किए तो पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद, उन्होंने भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जानकारी देकर देश को भी झूमने की वजह दे दी।
उन्होंने बताया कि अब सिर्फ इसरो ही नहीं, बल्कि भारत की निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में तिरंगा लहराएंगी और उपग्रह स्थापित करेंगी। इसी कड़ी में 18 जुलाई को हैदराबाद की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला आर्बिटल राकेट 'विक्रम-1' श्रीहरिकोटा से लांच किया जाएगा। यह देश का पहला निजी तौर पर विकसित आर्बिटल लांच व्हीकल है, जिसे 350 किलोग्राम तक के छोटे, माइक्रो और नैनो उपग्रहों को पृथ्वी से करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई पर लो-अर्थ आर्बिट में स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही भारत निजी आर्बिटल लांच क्षमता वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।
डा. गोयनका ने कहा कि स्पेस (अंतरिक्ष) सेक्टर को निजी उद्योगों के लिए खोलने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले के बाद इस क्षेत्र में तेजी से निवेश और नवाचार बढ़ा है। आज 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिला उद्यमी भी शामिल हैं। नई स्पेस पालिसी के तहत निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों के लगभग सभी क्षेत्रों में अवसर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का सपना आज के युवा ही साकार करेंगे। ऐसे में उन्हें केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने का लक्ष्य भी रखना चाहिए।
ई-20 ईंधन के अनुसार तैयार हो रहे वाहन
महिंद्रा एंड महिंद्रा के पूर्व प्रबंध निदेशक रहे डा. गोयनका ने ई-20 ईंधन को लेकर कहा कि अब आटोमोबाइल कंपनियां उसी के अनुरूप वाहन डिजाइन कर रही हैं। ई-20 से नुकसान की आशंकाएं निराधार हैं।
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डा. गोयनका ने सफलता के दिए पांच मूलमंत्र
- कभी हार न मानें: शुरुआती संघर्ष और असफलताएं आपकी क्षमता तय नहीं करतीं।
- दिल की भी सुनें: जीवन के बड़े फैसलों में केवल तर्क नहीं, अपने अंतर्मन की आवाज भी महत्वपूर्ण होती है।
- बड़े जोखिम लेने से न डरें: नई चुनौतियां ही बड़ी उपलब्धियों का रास्ता बनाती हैं।
- लोगों पर भरोसा करें: टीमवर्क और रिश्ते सफलता की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
- सीखना कभी न छोड़ें: उम्र चाहे जो हो, नई शुरुआत और नए कौशल सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें।
'हिंदी माध्यम से पढ़ा था, मेरी अंग्रेजी पर पूरा हास्टल हंस पड़ा'
अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए डा. गोयनका ने बताया कि वह हिंदी माध्यम से पढ़कर आईआईटी कानपुर पहुंचे थे और शुरुआती दिनों में अंग्रेजी बोलने में कठिनाई होती थी। उन्होंने मुस्कराते हुए बताया कि रैगिंग के दौरान एक सीनियर ने उनसे अंग्रेजी में "मैंने कल ज्वाइन किया था" बोलने को कहा तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा, "आइ हैव ज्वाइंड टुमारो"। यह सुनकर पूरा हास्टल हंस पड़ा। उन्होंने अपने जीवन के फैसलों में पत्नी की भूमिका को अहम बताया और कहा कि जब वह तार्किक तौर पर कोई निर्णय करते थे तो उनकी पत्नी ने भावनात्मक तौर पर उन्हें मजबूत बनाया और सही फैसला लेने में मदद की। अमेरिका से भारत लौटने में भी उनकी भूमिका रही है।